-कानपुर समेत पूरे उत्तर प्रदेश में पिछले दो दिन तेज आंधी के साथ हुई बारिश से किसान बेहाल

-खेत में खड़ी गेहूं की लाखों हेक्टेयर फसल हुई बर्बाद, लाखों किसानों के सामने संकट

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यन्हृक्कक्त्र: कानपुर ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले दो दिनों में मौसम ने जो रुख दिखाया है उसने अन्नदाता के सामने बड़ा 'संकट' खड़ा हो गया है. चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के त्वरित आंकलन के मुताबिक इस बार प्रदेश में गेंहू की उत्पादन क्षमता करीब 25 प्रतिशत कम होगी. जिससे लाखों 'अन्नदाता' संकट में आ गए हैं. 'अन्नदाता' इस संकट से सदमे में हैं. 'अन्नदाता' के संकट आने का असर हर किसी की जेब पर भी पड़ेगा. गेंहू के कम उत्पादन की वजह से आटा और गेहूं से संबंधित कई चीजें महंगी होने की पूरी संभावना है.

करीब 85 प्रतिशत मुसीबत में

कृषि विभाग उत्तर प्रदेश के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि दो दिनों हुई जोरदार बारिश ने खेत में तैयार खड़ा गेहूं खराब कर दिया है. जिसका असर गेंहू की पैदावार पर पड़ेगा. उनके मुताबिक इस वर्ष प्रदेश में 98 लाख 12 हजार 818 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं बोया गया था. एक हेक्टेयर में करीब 35 क्विंटल गेहूं पैदा होने की संभावना थी. इस आंधी और बारिश से कितनी फसल को नुकसान हुआ है इसका डाटा अभी नहीं मिल पाया है. अगर अचानक ये संकट न आता तो इस बार की फसल पिछली बार से ज्यादा पैदा होती. ये मौसम गेहूं की कटाई का है. पूरे प्रदेश में अभी 15 प्रतिशत गेहूं की कटकर खेत से हटा है बाकी का 85 प्रतिशत खेत में ही किसी न किसी रूप में पड़ा हुआ है. ऐसे में अचानक संकट की तरह आई बारिश ने मुश्किल खड़ी कर दी है.

'दाने' की चमक फीकी भी

सीएसए के डायरेक्टर रिसर्च प्रो. एचजी प्रकाश ने बताया कि तेज आंधी के साथ हुई बारिश को प्री हारवेस्ट लास कहते हैं. जिन किसानों की खेत में खड़ी फसल बारिश से पट गई होगी उनका सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है. उनको करीब जितना गेहूं कटने के बाद मिलना चाहिए उससे करीब 30 प्रतिशत कम मिलेगा. जिन खेतों में गेहूं की फसल कटकर गठ्ठे के रूप में पड़ी थी और उस पर पानी पड़ गया होगा उसका नुकसान तो करीब 15 प्रतिशत के आसपास होगा. उसके नुकसान की वजह होगी कि गेहूं के दाने की चमक कम हो जाएगी और उसका कलर भी बदल जाएगा. जिसकी वजह से किसानों को कीमत कम मिलेगी.

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दो दिन में 9.4 मिमी. बारिश

सीएसए के मौसम विज्ञान विभाग के हेड डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि पिछले दो दिनों में वेस्टर्न डिस्टर्बेस के साथ-साथ लोकल साइक्लोन की वजह से यूपी में 25 से 30 किमी. की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश हुई है. कानपुर में बीते दो दिन में करीब 9.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है. पिछले पांच साल से ग्लोबल वार्मिंग का असर देखने को मिल रहा है कि अप्रैल व मई में झमाझम बारिश हो रही है. यह सिलसिला 2013 से अनवरत चल रहा है. किसानों की फसल को इस बारिश से काफी नुकसान हुआ है. आगे आने वाले समय में भी मौसम के डिस्टर्ब रहने की उम्मीद है.

इयर कब-कितना प्रोडक्शन कितने एरिया में बोया गेहूं

2011-12 32.15मिलयन टन 9.79 मिलियन हेक्टेयर

2012-13 31.48मिलियन टन 9.78

2013-14 30.38मिलियन टन 9.76

2014-15 20.05मिलियन टन 9.84

2015-16 26.89मिलियन टन 9.71

2016-17 30.40मिलियन टन 9.89

नोट-आंकड़े उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के मुताबिक हैं.