खुश रहने का फार्मूला किसी संत ने नहीं बल्‍कि दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक ने दिया था, जो अब करोंडो में बिक रहा है!

By: Chandra Mohan Mishra | Publish Date: Wed 25-Oct-2017 10:02:31   |  Modified Date: Wed 25-Oct-2017 10:36:31
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खुश रहने का फार्मूला किसी संत ने नहीं बल्‍कि दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक ने दिया था, जो अब करोंडो में बिक रहा है!
खुश तो पूरी दुनिया रहना चाहती है लेकिन क्या करें खुश रहने का असली फार्मूला तो किसी के पास नहीं है। लोग तो ऐसा ही मानते हैं लेकिन जनाब दुनिया में एक इंसान ने खुश रहने का फार्मूला सालों पहले ही दे दिया था। पर वह कोई संत या महात्मा नहीं था बल्कि था दुनिया का सबसे महान वैज्ञानिक। जी हां, वो नाम है अल्बर्ट आइंस्टाइन। आज इतने सालों बाद भी उनका दिया यह फार्मूला करोड़ों रुपए में बिक रहा है। क्या है इसमें खास? जानिए हमारे साथ।

E= mc2, यह फार्मूला तो हम सभी ने कभी ना कभी पढ़ा होगा। दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने 100 साल से भी ज्यादा पहले यानी 1905 में यह थ्योरी ऑफ स्पेशल रिलेटिविटी का फार्मूला दिया था। सालों बीत गए लेकिन कोई भी वैज्ञानिक आइंस्टाइन के इस फार्मूले को काट नहीं पाया। आइंस्टाइन ने इस थ्योरी के साथ अंतरिक्ष की गहराइयों को समझने की हम सब की छमता को बहुत बढ़ा दिया। आइंस्टाइन के फॉर्मूले कितने कारगर साबित होते हैं यह तो कोई वैज्ञानिक ही ठीक से समझ सकता है, लेकिन एक मजेदार बात यह है कि आइंस्टाइन ने साल 1922 में एक और फार्मूला लिखा था जिसे कहते हैं थ्योरी ऑफ हैप्पीनेस यानी खुशी का फार्मूला। करीब सौ साल बाद उनके हाथों से लिखा यह फार्मूला वाला कागज करीब 10 करोड रुपए में बिका है। जर्मन भाषा में लिखा हुआ यह छोटा सा लेटर आइंस्टाइन ने एक कोरियर वाले को दिया था।

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95 साल पहले आइंस्टाइन ने लिखा था ‘खुशी का यह फार्मूला’
दरअसल साल 1922 के नवंबर महीने में अलबर्ट आइंस्टाइन जापान की राजधानी टोक्यो में मौजूद थे। इसी शहर के इंपीरियल होटल में रुकने के दौरान आइंस्टाइन के पास एक कुरियर वाला उनका पार्सल लेकर आया।आइंस्टाइन ने कोरियर वाले को कुछ टिप देनी चाही लेकिन उस व्यक्ति ने टिप के पैसे लेने से मना कर दिया। इस घटना के बारे में कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं कि उस कोरियर वाले ने आइंस्टाइन से टिप के पैसे मांगे लेकिन आइंस्टाइन के पास खुले पैसे नहीं थे कोरियर वाला खाली हाथ न जाए इसलिए आइंस्टाइन ने अपने हाथों से लिखकर एक कागज उसके हाथ में दिया। उन्होंने यहां इंपीरियल होटल की स्टेशनरी पर जो कुछ लिखा था उसे ही खुशी का फार्मूला कहा जाता है। आइंस्टाइन ने इस कागज़ पर लिखा था

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‘कामयाबी के पीछे भागने से हमेशा बेचैनी ही हाथ आती है लेकिन शांत और सादगी से भरी जिंदगी हमेशा खुशियां देती हैं’
आइंस्टाइन के हाथों लिखा यह छोटा सा नोट हाल ही में इजराइल के येरुशलम में नीलाम किया गया जिसे 1.56 मिलियन डॉलर में खरीदा गया यानी कि भारतीय रुपयों में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा में आइंस्टीन का यह खुशियों का फार्मूला बिका है। आइंस्टीन के इस खुशियों के फॉर्मूले के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने उस कोरियर वाले को एक और नोट लिख कर दिया था जिसमें उन्होंने लिखा था अगर तुम्हारी किस्मत अच्छी हुई तो यह नोट तुम्‍हारे लिए किसी भी टिप से बहुत ज्यादा बेशकीमती साबित होगा।

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इतने सालों बाद आइंस्टाइन की बात सच निकली और बेचने वाला बना करोड़पति
सालों पहले आइंस्टीन के हाथों लिखी यह बात आज सच साबित हो गई क्योंकि आइंस्टीन के हाथों लिखा थ्योरी ऑफ़ हैप्पीनेस वाला कागज जिस व्यक्ति ने नीलाम किया है वह उसी पार्सल वाले का भतीजा है। आइंस्टीन के हाथों लिखा यह खुशनुमा फार्मूला जिस कीमत पर बिका है वह बहुत ज्यादा है। बताया जा रहा है कि इसराइल में आज तक किसी कागज की इतनी ज्यादा बोली नहीं लगाई गई है। आपको बता दें कि यूरोप के जिस शख्स ने आइंस्टीन की हैंडराइटिंग वाले इस नोट को खरीदा है वो वाकई खुशनसीब होगा जिसने आइंस्टीन के हाथों लिखी इस बेहतरीन बात की असली कीमत आंकी है। आइंस्टीन की इस बात में कितनी बड़ी सच्चाई छुपी है और यह बात हम सभी जानते भी हैं लेकिन जिंदगी में उसे फॉलो करना भूल जाते हैं। चलिए आइंस्टीन के नाम पर ही सही कोशिश करें अपनी जिंदगी में खुशियों की इस फार्मूले को शामिल करने की। Image source

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