27 परसेंट बढ़ जाएगी कामकाजी लागत
एयरलाइंस की कामकाजी लागत 27 परसेंट बढ़ गई है। हवाई किराए में बढ़ोतरी मुख्य तौर पर यात्रा के कुछ समय पहले बुक किए जाने वाले टिकटों पर होगी। स्पाइसजेट के सीएमडी अजय सिंह ने कहा कि काफी डिमांड पहले से चली आ रही है। मुझे लगता है कि किराए बढ़ेंगे। लागत बढ़ रही है क्योंकि फ्यूल महंगा हो रहा है। जीएसटी से भी लागत बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि भारत में एविएशन की ग्रोथ में मदद देने के लिए सरकार को जेट फ्यूल को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए। उसे इसके लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट देने पर गौर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेट फ्यूल की कीमतों में लगभग 16 परसेंट और दूसरी लागत में करीब 7 परसेंट बढ़ोतरी के चलते एविएशन इंडस्ट्री के लिए कॉस्ट बढ़ गई है।
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2017 से फ्यूल कीमतों में हो रही बढ़ोतरी
इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर जेट फ्यूल की कीमतों पर नजर डालें तो पता चलता है कि अगस्त 2017 से इसमें बढ़ोतरी हो रही है। अगस्त में इसका दाम 48110 रुपये प्रति किलोलीटर था। जनवरी 2018 में यह 19 परसेंट बढ़कर 57460 रुपये प्रति किलोलीटर हो गया। जानकारी के अनुसार किराए में असल बढ़ोतरी इस साल मार्च के बाद शुरू होगी। एक विमानन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कामकाजी लागत बढ़ी है तो किराया भी बढऩा चाहिए, लेकिन मार्च तक यह बढ़ोतरी ज्यादा महसूस नहीं होगी क्योंकि एयरलाइंस के लिए यह नॉन-पीक क्वॉर्टर होता है। बढ़ोतरी मार्च के बाद होगी, जब ट्रैवल का पीक सीजन शुरू होगा।
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