अवैध हॉलमार्किग का भी धंधा
सोना खरीदने से पहले ग्राहक हॉलमार्क का निशान देख कर सोना खरीदता है. इससे सोना असली होने की पहचान होती है. लेकिन, अगर यह हॉलमार्क ही नकली हो तो ग्राहक किस पर भरोसा करेगा? यह थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा है, लेकिन ज्वेलरी के बाजार में अवैध हॉलमार्किंग का धंधा भी जोरों पर है. लो कैरेट सोने पर हायर फिटनेस नंबर डलवाने या ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंड‌र्ड्स बीआईएस के लाइसेंस के बिना ही अपनी ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग करवाने वालों की कमी नहीं है.

दो तरह से होता फर्जीवाड़ा
सोने के हॉलमार्क के नाम पर फर्जीवाड़ा दो तरह से होता है. एक हॉलमार्किंग तो असली होती है, लेकिन रजिस्टर्ड ज्वेलर्स मार्किंग सेंटर वालों को पैसे खिलाकर लो कैरेट सोने पर एक दो नंबर ज्यादा कैरेट का निशान छपवा लेते हैं. दूसरा बीआईएस रजिस्ट्रेशन के बिना ही आधा-अधूरा हॉलमार्किंग करा ली जाती है, जिसमें अनिवार्य 5 चिह्नों की जगह 3 या 4 चिह्न ही रखे जाते हैं. यह सिर्फ ग्राहक को इंप्रेस करने के मकसद से होता है, उसे कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता.

ऐसे पहचानें असली हॉलमार्क
असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है. उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है. उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है.

हर कैरेट का फिटनेस नंबर अलग-अलग
हॉलमार्किंग फिटनेस नंबर हर कैरेट के लिए अलग-अलग होता है. मसलन 23 कैरेट सोने के लिए 958, 22 कैरेट 916, 21 कैरेट 875, 18 कैरेट 750, 17 कैरेट 708, 14 कैरेट 585, 9 कैरेट 375, 8 कैरेट 333.

14 साल पहले शुरू हुई थी हॉलमार्किंग
सोने के गहनों की हॉलमार्किंग 14 साल पहले शुरू हुई थी. इसके तहत सर्राफा कारोबारियों को अपने गहनों को हॉलमार्क कराने के लिए बीआईएस से प्रमाण पत्र लेना होता है. बीआईएस कानून के मुताबिक हॉलमार्किंग या ज्वेलरी की किसी भी शिकायत पर जिम्मेदारी हॉलमार्किंग सेंटर की नहीं, बल्कि ज्वेलर्स की होगी और उसी के खिलाफ मामला दर्ज होगा. ऐसे में लोग रजिस्ट्रेशन लेने से बचते हैं.