1- अनसूया का जन्म 11 नवंबर, 1885 को अहमदाबाद में साराभाई परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम साराभाई और माता का नाम गोदावरीबा था।

2- जब वह नौ साल की थीं तो उनके माता-पिता का निधन हो गया। उनका परिवार काफी संपन्न था क्योंकि उनके पिता उद्योगपति थे।

3- प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अनसूया साराभाई  ने बुनकरों और टेक्स्टाइल उद्योग के मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए 1920 में मजूर महाजन संघ की स्थापना की थी जो भारत के टेक्स्टाइल मजदूरों का सबसे बड़ा पुराना यूनियन है।
उद्योगपति पिता की बेटी जिन्‍होंने महिला मजदूरों के हक के लिए बनाई यूनियन
4- इसके बाद उन्हें, उनके भाई अंबालाल साराभाई और छोटी बहन को एक चाचा के पास रहने के लिए भेज दिया गया। 13 साल की उम्र में उनका बाल विवाह हुआ जो सफल नहीं रहा।

5- 1912 में अपने भाई की मदद से अनसूया मेडिकल की डिग्री लेने के लिए इंग्लैंड चली गईं लेकिन बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में चली गईं।

6- अनसूया भारत वापस आने के बाद उन्होंने महिलाओं और समाज के गरीब वर्ग की भलाई के लिए काम किया। उन्होंने एक स्कूल खोला।

7- अनसूया ने जब 36 घंटे की शिफ्ट के बाद थककर चूर हो चुकी मिल की महिला मजदूरों को घर लौटते देखा तो उन्होंने मजदूर आंदोलन करने का फैसला लिया।
उद्योगपति पिता की बेटी जिन्‍होंने महिला मजदूरों के हक के लिए बनाई यूनियन
8- 1914 में उन्होंने अहमदाबाद में हड़ताल के दौरान टेक्स्टाइल मजदूरों को संगठित करने में मदद की। वह 1918 में महीने भर चले हड़ताल में भी शामिल थीं।

9- बुनकर अपनी मजदूरी में 50 फीसदी बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे लेकिन उनको सिर्फ 20 फीसदी बढ़ोतरी दी जा रही थी जिससे असंतुष्ट होकर बुनकरों ने हड़ताल कर दिया था।

10-  अनसूया को लोग प्यार से मोटाबेन कहकर बुलाते थे जिसका गुजराती में मतलब बड़ी बहन होता है। गांधी जी ने भी मजदूरों की ओर से हड़ताल करना शुरू कर दिया और अंतत: मजदूरों को 35 फीसदी बढ़ोतरी मिली। इसके बाद 1920 में मजूर महाजन संघ की स्थापना हुई। अनसूया का निधन 1972 में हुआ।

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