क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ :मां बनने का अहसास होता है सबसे खास. घर में एक नए सदस्य आने की खुशी से पूरा घर खिल उठता है, लेकिन नई मां बनी औरत एक साथ ही कई सारे मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक बदलावों, दर्द और अनुभवों से होकर गुजरती है. हाल के दिनों में डिलीवरी के बाद कई महिलाएं डिप्रेशन में जा रही हैं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 100 में दस महिलाएं बच्चों को जन्म देने के बाद डिप्रेशन में चली जाती हैं. ये बातें मणिपाल यूनिवर्सिटी से आए प्रो प्रताप कुमार नारायण ने कही. मौका था रांची ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी के एनुअल कांफ्रेंस का. उन्होंने कहा कि प्रेग्नेंसी के दौरान काउंसेलिंग बहुत मायने रखती है, नहीं तो आने वाले दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है.

रेगुलर मानिटरिंग करें तो बेहतर

प्रेग्नेंसी में सात महीने पूरे होने के बाद रेगुलर मानिटरिंग करने की जरूरत है. डॉ.मधुलिका ने बताया कि इसके बाद बच्चे की मूवमेंट पर भी नजर रखी जाती है. इसके अलावा लास्ट मंथ में तो हर हफ्ते मानिटरिंग की जाती है. ताकि किसी भी स्थिति से आसानी से निपटा जा सके.

प्रेग्नेंसी में डायबिटीज का खतरा

कांफ्रेंस में प्रो प्रताप नारायण ने बताया कि प्रेग्नेंसी के पहले दिन से ही कई महिलाओं की स्थिति क्रिटिकल हो जाती है. इस दौरान डायबिटीज भी उन्हें अपनी चपेट में ले लेती है. इसका सीधा असर मां और बच्चे दोनों पर ही पड़ता है. इसलिए प्रेग्नेंसी में शुगर की रेगुलर चेकिंग करने की जरूरत है. कांफ्रेंस में प्रेसिडेंट डॉ.रेणुका सिन्हा, डॉ.उषा नाथ, डॉ.आशा सिंह, डॉ.शोभा चक्रवर्ती, डॉ.समरीना आलम, डॉ.मधुलिका होरो, डॉ.मनीषा, डॉ.विपुला वर्मा समेत अन्य मौजूद थीं.

प्रेग्नेंसी में तेजी से वजन बढ़ना भी खतरनाक

डॉ अल्पेश गांधी ने कांफ्रेंस में कहा कि अगर कोई महिला प्रेग्नेंट और अचानक से उसके वजन में बढ़ोतरी होने के लक्षण दिखे तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए. चूंकि प्रेग्नेंसी में वजन बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन जब तेजी से वजन बढ़े तो यह मां-बच्चे दोनों के लिए रिस्की हो जाता है.