-बेसिक स्कूल्स के स्टूडेंट्स को उपलब्ध कराए गए जूते तीन महीने भी नहीं चले, फट गए

-पेरेंट्स ने हेड मास्टर्स से की कम्प्लेन, सप्लाई में कमीशनखोरी की आशंका

-बच्चे फिर से चप्पल पहनकर स्कूल जाने को हुए बाध्य

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VARANASI

बेसिक स्कूल्स के स्टूडेंट्स को उपलब्ध कराए गए जूते तीन महीने में ही फट गए. ऐसे में नौनिहालों के लिए जूतों की दी गई सप्लाई में करोड़ों रुपये के कमीशनखोरी की आशंका जताई जा रही है. वहीं जूते की क्वालिटी को लेकर भी पेरेंट्स सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि कमीशन के चक्कर में बच्चों को बेहद खराब जूता उपलब्ध कराया गया है. यही कारण है कि बच्चों के पैर में तीन महीने भी जूता नहीं चला और फट गया. पेरेंट्स ने इसकी जांच कराने की मांग की है ताकि कमीशनखोरी पर रोक लग सके.

करोड़ों के घालमेल का आरोप

डिस्ट्रिक्ट के 1,367 स्कूल्स में रजिस्टर्ड बच्चों के लिए 1,76,214 जोड़ी जूते शासन से उपलब्ध कराये थे. एक जोड़ी जूते का रेट 299 रुपये बताया जा रहा है. हर जूते पर प्राइस भी अंकित है. इस प्रकार करीब पांच करोड़ 26 लाख, 87 हजार 986 रुपये के जूतों की सप्लाई हुई थी. ऐसे में जूतों की खरीद में करोड़ों रुपये के गोलमाल की आशंका पेरेंट्स को है. वहीं जूता फट जाने के कारण पहले ही की तरह बच्चे फिर से चप्पल पहन कर विद्यालय जाने के लिए बाध्य हो रहे हैं.

पचासों जोड़ी जूते डंप

गवर्नमेंट ने नवंबर 2017 में ही स्कूल्स को जूते उपलब्ध करा दिये थे. बेमेल साइज का जूता होने के कारण कई विद्यालयों में जनवरी तक वितरित किए गए. कई स्कूल्स में सैकड़ों जोड़ी जूते अब भी डंप पड़े हैं. हेड मास्टर्स का कहना है कि साइज काफी छोटी होने के कारण आधे बच्चों को जूता वितरित नहीं किया जा सका. हेड मास्टर्स ने इसकी जानकारी एबीएसए को भी दी. आश्वासन के बाद भी अब तक जूता बदला नहीं जा सका.

रफ यूज करने के कारण कुछ बच्चों के जूते फट गए होंगे. व्यापक पैमाने पर जूता फट जाने की जानकारी नहीं है. इस बारे में एबीएसए से रिपोर्ट मांगी जाएगी. यदि ज्यादातर बच्चों के जूते फट गए होंगे तो इसकी रिपोर्ट शासन को भी प्रेषित की जाएगी.

बृज भूषण चौधरी, बीएसए