नोटबंदी से वर्तमान परेशान पर भविष्य है उज्जवल

By: Inextlive | Publish Date: Sun 08-Oct-2017 07:00:34
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नोटबंदी से वर्तमान परेशान पर भविष्य है उज्जवल

- आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में पूर्व निदेशक रहे किरण कर्णिक ने नोटबंदी को बताया सरकार का बोल्ड निर्णय

- कहा, वर्तमान में भले इसका नकारात्मक असर दिख रहा पर भविष्य में इसका अच्छा असर दिखायी देगा

VARANASI

आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में पूर्व निदेशक रहे किरण कर्णिक ने कहा कि नोटबंदी सरकार को बोल्ड निर्णय था। वर्तमान में भले ही इसका नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है लेकिन भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक प्रभाव दिखायी देगा। यह भविष्य कितने दिनों बाद आयेगा यह कहना थोड़ा कठिन है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगले वित्तीय वर्ष में हमें इसका अच्छा असर दिख्ायी देगा।

अलग पड़ गई अर्थव्यवस्था

वर्तमान की बात करें तो ग्लोबल इकॉनमी ऊपर की ओर जा रही है। पर हमारी इकॉनमी डाउनफाल की ओर है। इसका कारण यह है कि विश्व अर्थव्यवस्था से हमारी अर्थव्यवस्था अलग हो गयी है। ऐसा पिछले साल भर के अंदर हुआ है। अर्थव्यवस्था में आये इस बदलाव के कारण के रूप में हम नोटबंदी और जीएसटी को ले सकते हैं। मैं यह नहीं कहता कि यही कारण है लेकिन यह तो कहा जा सकता है कि तमाम कारणों में से यह भी एक वजह हो सकती है। नौकरियों में कमी आयी है। जहां तक हम जीडीपी की बात करें तो सरकारी दावे के अनुसार हमें चीजें दिखायी नहीं दे रही हैं। अगर सरकार के बताये आंकड़ों पर गौर करें तो हमें उस मुताबिक स्थिति दिख नहीं रही है। अर्थव्यवस्था भी थोड़ी नरम है और रोजगार में कमी आयी है। नोटबंदी पर सरकार की तैयारियों के बाबत कहा कि यह एक सरप्राइजिंग इवेंट था। सरकार की तैयारियां ठीक थीं। अगर इसकी तैयारियों में अधिक समय दिया जाता तो इसके लीक होने का खतरा था। ऐसे में नोटबंदी का उद्देश्य पूरा नहीं होता। सरकार नोटबंदी के फैसले को अतिगोपनीय रखना चाहती थी और इसमें सफल भी रही।

सरकार ने नहीं की थी मदद

पिछले दिनों हुए सत्यम कंप्यूटर घोटाले में सरकार की ओर से संकट मोचक की भूमिका में उभरे किरन कर्णिक ने कहा कि बहुत सी कंपनियां बंद होती रहती हैं लेकिन सरकार का इस कंपनी में हस्तक्षेप करने का सिर्फ एक कारण था। इस कंपनी में भ्0 हजार से अधिक कर्मचारी काम करते थे। कंपनी बंद होती तो ये सब बेरोजगार हो जाते। ऐसे में सरकार ने मामले में दखल दिया और बिना एक भी सहायता राशि दिये कंपनी को फिर से खड़ा किया। इसके लिए कंपनी के प्रबंधकीय ढांचे में बदलाव किये गये। इसके साथ ही कंपनी एक्ट ख्0क्फ् में बदलाव किया ताकि सत्यम जैसे मामले की पुनरावृति न हो सके।

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