- भगतदा के करीबी रहे हैं त्रिवेंद्र रावत

- त्रिमूर्तियों में से कोश्यारी का दबदबा है कायम

DEHRADUN: प्रदेश अध्यक्ष की कमान अजय भट्ट को सौंपने से लेकर त्रिवेंद्र रावत की ताजपोशी तक पूर्व सीएम सांसद भगतदा की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. भले ही ये माना जा रहा है कि नवनियुक्त सीएम त्रिवेंद्र रावत को संघीय पृष्ठभूमि और अमित शाह के करीबी होने का फायदा मिला हो. लेकिन त्रिवेंद्र रावत को कोश्यारी का भी काफी करीबी बताया जाता है.

पार्टी में लगातार सक्रिय हैं भगतदा

केन्द्र में मोदी सरकार आते ही उत्तराखंड की राजनीति में त्रिमूर्ति खंडूडी, कोश्यारी, निशंक युग का अंत माना जाने लगा था. भले ही बीसी खंडूडी, भगत सिंह कोश्यारी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक तीनों ही सांसद की भूमिका में हैं. लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में जिस तरह की दखलअंदाजी इन तीनों नेताओं की थी, इसे पीएम मोदी ने तीनों सीनियर नेताओं को कैबिनेट में जगह न देकर पहले ही साफ संकेत दे दिए थे, कि पार्टी में गुटबाजी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिसे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी अपने स्तर से क्लियर किया था. लेकिन इन सभी परिस्थितियों के बाद भी पिछले कुछ समय में जिस तरह के हालात उत्तराखंड की बीजेपी के अंदर देखने को मिली हैं, उसमें भगतदा की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. अजय भट्ट को प्रदेश की कमान सौंपने से लेकर नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिलना और त्रिवेंद्र रावत की ताजपोशी तक भगतदा की सक्रियता सब कुछ बयां कर चुकी है. आपको बता दें कि इन सभी निर्णयों में भगतदा का रोल काफी अहम रहा है. अजय भट्ट और त्रिवेंद्र रावत कोश्यारी के काफी करीबी रहे हैं. इसके अलावा टीएसआर कैबिनेट में एक मात्र महिला मंत्री रेखा आर्या को जगह मिलना भी काफी चौंकाने वाला रहा है. आपको बता दें कि रेखा आर्या कुमांऊ के सोमेश्वर सीट से विधायक चुनकर आई हैं. रेखा आर्या भी भगतदा खेमे की मानी जाती हैं. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि बीजेपी के अंदर अभी भी भगतदा का दबदबा कायम है.