संशय दूर करने को इस्‍तीफा
श्रीनगर/जम्‍मू (प्रेट्र)। वरिष्‍ठ भाजपा नेता ने कहा है कि मंत्रियों के इस्‍तीफे न सिर्फ राज्‍य में सहयोगी पीडीपी व जम्‍मू एवं कश्‍मीर के लोगों बल्‍क‍ि देश भर में इस बारे में किसी भी तरह के संशय को दूर करने के लिए हैं। राम माधव जो कि पार्टी के महासचिव व राज्‍य के प्रभारी भी हैं ने यह भी कहा कि राज्‍य सरकार से जनजातीय मामलों के विभाग के वन्‍य भूमि पर घुमंतुओं के अतिक्रमण के संबंध में जारी निर्देश वापस लेने को भी कहा गया है।

प्रदेश अध्‍यक्ष सीएम को भेजेंगे इस्‍तीफे
उन्‍होंने बीजेपी विधायकों व विधान परिषद सदस्‍यों की बैठक में हिस्‍सा लेने के बाद कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष सत शर्मा इस्‍तीफे मुख्‍यमंत्री को भेज देंगे। उन्‍होंने कहा कि वन मंत्री लाल सिंह व उद्योग मंत्री चंद्र प्रकाश ने इस्‍तीफा जो छवि बनाई जा रही थी उसे देखते हुए दिया है। उन्‍होंने कांग्रेस पर मामले का राजनीतिकरण करने का भी आरोप लगाया।

पीडि़ता को इंसाफ गुनहगारों को सजा

राम माधव ने कहा कि बीजेपी जो कि सरकार में है, यह सुनिश्‍च‍ित करेगी पीडि़ता को इंसाफ और गुनहगारों को सजा मिले। इस मामले में सीबीआई जांच के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि पुलिस ने जांच पूरी कर ली है व मामला अब कोर्ट में है। इस संबंध में कोर्ट ही कोई फैसला ले सकता है।

एक सप्‍ताह बाद म‍िला था मासूम बच्‍ची का शव

बतादें क‍ि 10 जनवरी को कठुआ में आठ साल की एक मासूम का का अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने बार-बार उसके साथ रेप क‍िया था। इसके बाद उन लोगों ने उस बच्‍ची की हत्‍या भी कर दी थी। पुल‍िस को 17 जनवरी को उस मासूम का शव म‍िला था। इस घटना की जांच करने के लिए अपराध शाखा का एक विशेष जांच दल गठ‍ित हुआ था। मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसमें दो विशेष पुलिस अधिकारी भी शाम‍िल है। कांस्टेबल और एक सब-इंस्पेक्टर पर साक्ष्‍य नष्‍ट करने का आरोप लगा है।

आरोप‍ियों को बचाने का आरोप लगा
इतना ही नहीं इस मामले में इस्‍तीफा देने वाले दोनों मंत्रियों पर आरोप लगे क‍ि वह आरोप‍ियों को बचा रहे हैं। वहीं कल कठुआ के सामूहिक दुष्कर्म मामले में वकीलों के भारी विरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल आफ इंडिया, जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और कठुआ बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि वकीलों को पीड़ित या अभियुक्त का पक्ष अदालत में रखने में बाधा डालना न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना है। इसके अलावा दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीड़िता की पहचान का खुलासा करने पर लताड़ भी लगाई थी।

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