वीाआईपी ट्रेनों की कन्फर्म सीटों का टिकट बेच रहे दलाल धरे गए

By: Inextlive | Publish Date: Tue 14-Nov-2017 07:00:48
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वीाआईपी ट्रेनों की कन्फर्म सीटों का टिकट बेच रहे दलाल धरे गए

- आरके ट्रैवल्स पर छापा मारकर की गिरफ्तारी

LUCKNOW:

मुंबई और साउथ के शहरों को जाने वाले यात्रियों से भारी रकम वसूल कर उन्हें वीआईपी ट्रेनों के कन्फर्म टिकट बेचने वाले दलालों को सोमवार को सीआईबी टीम ने चारबाग स्थित आहूजा भवन में चल रहे आरके ट्रैवल्स में छापा मारकर गिरफ्तार किया। ये यात्रियों से टिकट के एवज में मनचाही रकम वसूल रहे थे। यह सारा काम रेलवे के बाबुओं के साथ सेटिंग करके किया जा रहा था। यह छापा मुख्य सुरक्षा आयुक्त राजाराम के निर्देश पर डाला गया.

पकड़े तीन दलाल

सीआईबी टीम ने यहां से तीन रेल टिकट दलालों को पकड़ा है। इन दलालों के पास से तत्काल टिकट बुक करने वाला साफ्टवेयर, 77 रेल टिकट बरामद हुए हैं। इन टिकटों में 30 तत्काल टिकट और 20 विंडो टिकट भी शामिल हैं। इसके साथ ही टीम को इन दलालों के पास से 12,1357 रुपए भी मिले.

काफी दिनों से थी नजर

वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त सहरिश सिद्दीकी के अनुसार बहुत दिनों से सीआईबी टीम आरक्षण केंद्रो पर रेल टिकटों की दलाली करने वालों पर नजर रख रही थी। इसमें सीआईबी इंस्पेक्टर अशरफ सिद्दीकी की टीम के बीएन तिवारी, सत्येन्द्र सिंह, वीरेन्द्र सिंह समेत कई लोगों को विभिन्न आरक्षण केंद्रों पर दलालों पर नजर रखने के लिए निर्देशित किया गया था। चारबाग के आहुजा भवन में आरके ट्रैवल्स के कमल चौधरी, सौरभ चौधरी व हिमांशु चौधरी रोज आरक्षण केंद्र पर टिकट बुक कराने आते थे। इन पर लगातार टीम की नजर थी।

फेक आईडी पर बनवाए टिकट

टीम ने सोमवार को छापा मार कर इन तीनों रेल टिकट दलालों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से बरामद टिकट फेक आइडी पर बनवाए गए थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि रोजाना हम लोग 30 से 40 विंडो टिकट आरक्षण केंद्रों से निकलवा रहे थे। इन लोगों के पास 29 फेक आइडी भी मिली हैं। आरोपियों ने बताया कि आईआरसीटीसी की पर्सनल आईडी वे आसानी से बना लेते थे। बस इसके लिए एक मोबाइल नम्बर की जरूरत होती है। यह आईडी टिकट लेने के लिए आए यात्री का मोबाइल नम्बर लेकर तैयार की जाती है।

हर माह 1.5 लाख की कमाई

इंस्पेक्टर अशरफ सिद्दीकी ने बताया कि यह दलाल रेलवे के बाबुओं के साथ सेटिंग कर महीना एक से डेढ़ लाख रुपए की कमाई कर रहे थे। बाबू इनके इशारे पर अच्छी ट्रेनों में सीटें रोक रहते थे.

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