बहरौली में कैंसर से 51 मौतें

By: Inextlive | Publish Date: Sun 14-Jan-2018 07:00:04
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बहरौली में कैंसर से 51 मौतें

- दूषित पानी पीने से लोग गवां रहे जान, दो लोग अब भी कैंसर से पीडि़त

- जल निगम के हैंडपंप उगल रहे जानलेवा पानी,

क्चन्क्त्रश्वढ्ढरुरुङ्घ:

मीरगंज के बहरोली गांव में जल जीवन ही नहीं, जानलेवा बन चुका है, गांव में दूषित पानी अब तक 51 लोगों की जान ले चुका है। फ्राइडे रात पांच साल से कैंसर से पीडि़त राम गोपाल की पत्नी हीरावती की मौत हो गई। दिल्ली के एक हॉस्पिटल से उनका इलाज चल रहा था। इसके अलावा दो अन्य लोग भी कैंसर से जूझ रहे हैं।

36 हैंडपम्प में 16 उगल रहे आर्सेनिक

बहरौली गांव की आबादी करीब छह हजार है। गांव में 36 इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, जिनमें 16 से आर्सेनिक युक्त पानी निकल रहा है। करीब तीन साल पहले मामला उजागर होने के बाद जल निगम और स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगे हैंडपंप के पानी की जांच कराई थी। जांच में 16 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। साथ ही इसे स्वस्थ्य के लिए हानिकारक भी बताया गया। विभाग ने उन्हें चिह्नित कर ग्रामीणों से इनके पानी का इस्तेमान न करने को कहा। चेतावनी स्वरूप जल निगम ने इनपर खतरे का निशान बना दिया, लेकिन बाद में इनकी सुध नहीं ली। न ही इन्हें उखाड़ने की जरूरत समझी। लोग इनका पानी इस्तेमाल करते रहे और कैंसर की चपेट में आते गए।

आयुर्वेदिक हॉस्पिटल का नल से भी उगल रहा दूषित पानी

बहरौली गांव में सरकारी आयुर्वेदिक हॉस्पिटल भी है। हॉस्पिटल परिसर में लगा सरकारी हैंडपंप भी दूषित पानी ही उगल रहा है। हॉस्पिटल में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था न होने के कारण यहां इलाज को आने वाले रोगियों को मजबूरन इसी नल का पानी पीना पड़ता है।

जानकर अंजान बने अफसर

ग्रामीणों ने बताया कि जल निगम को अच्छी तरह से जानकारी है कि गांव में लगे हैंडपंप जानलेवा पानी उगल रहे हैं फिर भी इन पर लाल निशान लगाने के बाद इन्हें हटवाया नहीं गया और ग्रामीणों के स्वास्थ्य को भगवान भरोसे छोड़ दिया। न ही स्वस्थ्य विभाग के किसी अफसर ने गांव को इस गंभीर समस्या से निकालने का प्रयास किया। हालांकि जल निगम ने ओवरहेड टैंक बनाने का वादा किया था, लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ। ग्रामीणों ने पाइप लाइन पेयजल योजना से जोड़ने के लिए एसडीएम मीरगंज को पत्र भी लिखे मगर नतीजा शून्य रहा।

जल निगम के हैंडपंप बने जानलेवा

ग्राम प्रधान अशोक मोहन गंगवार ने बताया कि कई बार जलनिगम और स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के सामने इस समस्या को रखा। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की, मगर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। जिन हैंडपंपों से आर्सेनिक युक्त पानी निकल रहा है वह किसी अन्य के नहीं बल्कि जल निगम के लगवाए हुए हैं।

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