बचाने को खर्चा, आयोग को दे रहे गच्चा

By: Inextlive | Publish Date: Wed 15-Nov-2017 07:01:22
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बचाने को खर्चा, आयोग को दे रहे गच्चा

- चुनावी खर्चो के दायरे से बचने के लिए उम्मीदवारों ने खोज निकाला है रास्ता

- बगैर परमीशन के ही चल रहे अधिकतर प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालय

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नाम वापसी और सिम्बल डिस्ट्रीब्यूशन के बाद नगर निकाय चुनाव के लिए वैध कैंडीडेट्स डिक्लेयर हो चुके हैं। नगर निगम, गंगापुर नगर पंचायत और रामनगर पालिका परिषद के उम्मीदवारों ने समर्थन के लिए कैंपेन भी शुरू कर दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि वोटिंग का डेट नजदीक होने के बावजूद चुनाव कार्यालय खोलने के लिए आवेदन की संख्या में बढ़ोतरी क्यों नहीं हुई? इसकी वजह ये है कि चुनावी खर्चो के दायरे से बचने के लिए कई प्रत्याशियों की ओर से ये हथकंडा अपनाया जा रहा है।

शुरू हो जाएगी खर्चो की काउंटिंग

प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालय खुलते ही उनके खर्चो की काउंटिंग शुरू हो जाएगी। एडमिनिस्ट्रेशन के पास परमीशन का आवेदन पहुंचते ही संबंधित प्रत्याशी निगरानी समिति की निगरानी में आ जाएंगे। इसके बाद उन्हें अपने खर्चो से एक- एक पाई का ब्यौरा निर्वाचन आयोग को देना होगा। क्योकि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी दिशा निर्देश के अनुसार निकाय चुनाव के उम्मीदवारों को तय राशि से ज्यादा खर्च नहीं करना है।

पहले नं। पर पार्षदी के प्रत्याशी

निकाय चुनाव में सभी मेयर, चेयरमैन और नगर पंचायत अध्यक्ष के उम्मीदवारों का चुनाव कार्यालय खुल चुका है। जबकि पार्षद और नगर पंचायत सदस्य व वार्ड अध्यक्ष के अधिकतर प्रत्याशियों की ओर से चुनाव कार्यालय खोलने की अर्जी नहीं पहुंची है। इनमें निर्दल प्रत्याशियों की संख्या सबसे ज्यादा है।

वर्जन

जिन्होंने चुनाव कार्यालय के लिए परमीशन नहीं लिया है, वह इलाकाई एसीएम व एसडीएम को जल्द आवेदन करें। वरना चेकिंग के दौरान पकड़े जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आरआर वर्मा, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी

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लाख रुपये तक मेयर के उम्मीदवार को खर्च करने का अधिकार

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लाख रुपये से ज्यादा नहीं खर्च कर सकते पार्षद पद के प्रत्याशी

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परसेंट तक ही चुनाव कार्यालय खोलने के आये आवेदन

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कैंडीडेट्स हैं चुनाव के मैदान में

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पदों के लिए होनी है चुनावी जंग

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