'विधवा हो, पेंशन चाहिए शाम को 7 बजे विकास भवन आ जाना, काम हो जाएगा!

By: Inextlive | Publish Date: Wed 14-Feb-2018 03:27:08   |  Modified Date: Wed 14-Feb-2018 03:31:25
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'विधवा हो, पेंशन चाहिए शाम को 7 बजे विकास भवन आ जाना, काम हो जाएगा!
बरेली में समाज कल्याण विभाग के कर्मचारियों पर 'शाम को मिलने और मुलाकात' का आरोप। डीएम तक पहुंची महिलाएं, उन्होंने कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मंाग की।

एक्सक्लुसिव न्यूज

BAREILLY: समाज में विधवाओं के क्या हाल हैं यह किसी से छिपा नहीं है. खासतौर पर वह जिन्हें जीवनयापन के लिए पेंशन पर निर्भर रहना पड़े. ऐसी ही, लाचार महिलाओं के शोषण का सनसनीखेज मामला समाज कल्याण विभाग में प्रकाश में आया है. दो पीडि़त महिलाओं ने डीएम को शिकायत करते हुए पत्र में लिखा है कि कर्मचारी उनके पारिवारिक और विधवा पेंशन देने के लिए रिश्वत मांगने के साथ ही शाम को विकास भवन बुलाते हैं. इस बेवक्त शाम को बुलाने का क्या मतलब है यह किसी से छिपा नहीं है. कई बार चक्कर लगाने के बाद जब बार-बार उनसे यही कहा गया, तो वह डीएम के पास अपनी गुहार लेकर पहुंची और कार्रवाई की मांग की. क्या है पूरा मामला पढि़ए..

 

मंत्री ने कहा था 'मुझे पता है'

बता दें कि हाल ही में प्रभारी मंत्री ने विकास भवन में आयोजित विकास कार्यो की समीक्षा बैठक में समाज कल्याण विभाग की कारगुजारियों की जानकारी होने की बात कही थी. कहा कि 'मेरा मुंह मत खुलवाओ, समाज कल्याण विभाग में क्या क्या हो रहा है इसका मुझे पता है. बोल दूंगा तो मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहोगे. आखिरी बार कह रहा हूं सुधर जाओ'. समाज कल्याण विभाग में पेंशन के मामलों के निस्तारण और आईजीआरएस पोर्टल पर समाज कल्याण विभाग में कारगुजारियों की समीक्षा के दौरान यह बातें कहीं थी, जिस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने कहा था कि 'विभाग में उनकी हाल ही में तैनाती हुई है. काफी कुछ गड़बडि़यां यहां हुई हैं, जिसे ठीक कर रहा हूं. उन्होंने मंत्री की बात का समर्थन किया था' साथ ही लापरवाह और मनमुताबिक कार्रवाईयों पर लगाम लगाने का आश्वासन दिया था.

 

पहले भी हो चुका है हंगामा

समाज कल्याण विभाग में यह शिकायत कोई नहीं है. लास्ट ईयर जिला समाज कल्याण विभाग में महिला कर्मचारियों के साथ अधिकारी द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करना और अश्लील हरकत करने का मामला चर्चा का विषय बना था. जिसके बाद प्रीवेंशन ऑफ वीमेंस हैरेसमेंट कमेटी बनी और मामले की जांच के आदेश दिए गए. विकास भवन के ही तीन विभागों के अधिकारियों को जांच समिति का प्रभारी बनाया गया. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई. सूत्रों के मुताबिक करीब दो माह तक चली जांच के बाद कर्मचारी और अधिकारी द्वारा स्पष्ट जवाब नहीं मिला था. जिसकी वजह से मामला की रिपोर्ट ओपन नहीं की गई.

 

केस वन - शाम 7 बजे विकास भवन आ जाना काम हो जाएगा

'मीरगंज के गांव फतेहगंज निवासी महिला के पति का निधन 2 अगस्त 2016 को हुआ था. उन्होंने शिकायती पत्र में लिखा है कि उन्होंने पारिवारिक लाभ योजना का फार्म भरा था जो तहसील से स्वीकृत होकर विकास भवन आ गया था. जब वह विकास भवन पहुंची तो मौजूद बाबू ने कहा कि तुम्हारा पैसा जल्दी पहुंच जाएगा. इसके लिए मूंछों वाले बाबू ने 1 हजार रुपए लिए. रूपए देकर वह घर चली गई, लेकिन दो माह तक इंतजार करने के बाद भी जब रुपया नहीं पहुंचा तब जिला समाज कल्याण अधिकारी से बात की. ऐसा लगा कि वह शराब पीकर नशे में सीट पर बैठे थे. साहब ने मुझे मूंछ वाले बाबू के पास फिर भेज दिया. तो बाबू ने कहा कि शाम को 7 बजे विकास भवन आ जाना तुम्हारा काम हो जाएगा'.

 

केस टू - 2 हजार रुपए लिए और मुलाकात के लिए बुलाया

'शहर के चाहबाई निवासी महिला के पति की आकस्मिक मृत्यु हो गई थी. उन्होंने पारिवारिक लाभ के लिए आवेदन किया, जो तहसील से लेखपाल व कानूनगो समेत तहसीलदार और एसडीएम साहब से स्वीकृत होकर विकास भवन कमरा नंबर 5 में आ गया है. प्रार्थिनी वहां सत्येंद्र बाबू से मिली और तब उन्होंने बताया कि तुम्हारा फार्म स्वीकृत होकर आ गया है. इसके बदले उन्होंने 2 हजार रुपए लेकर काम करने का आश्वासन दिया. और फिर मुलाकात करने की बात कही. मुलाकात के लिए हामी भरी तो उन्होंने कहा कि माह भर में तुम्हारा रुपया पहुंच जाएगा, लेकिन वह वापस विकास भवन नहीं गई. प्रार्थिनी का अब तक कोई पैसा भी नहीं पहुंचा. जिस पर वहां न जाकर डीएम से शिकायत की है'.

 

नोट - गोपनीयता की वजह से महिलाओं के नाम नहीं लिख्ो गए हैं.

 

एक नजर में - विधवा पेंशन

- 41,633 महिलाओं को मिल रहीं विधवा पेंशन

- 6 हजार विधवा पेंशन के मामले हैं पेंडिंग

- प्रोबेशन ऑफिसर के पास पहुंचते हैं आवेदन

- जरूरत पर समाज कल्याण विभाग करता है सत्यापन

- ऑनलाइन होता है आवेदन, ऑनलाइन डाटा फीडिंग

 

पारिवारिक लाभ

- 30 हजार अब तक लाभान्वित

- समाज कल्याण विभाग देता है लाभ

- मैन्युअली होता है आवेदन फिर सत्यापन

- 30 हजार रुपए एकमुश्त मिलती है मदद

 

मामला संज्ञान में है. शिकायतों में जिस बाबू के बारे में जिक्र किया गया है, उससे पूछताछ की तो उसने ऐसी किसी भी बात की जानकारी होने से इनकार किया है. हालांकि, इस बाबत मामले की जानकारी के लिए संबंधित महिलाओं को आरोपी की पहचान के लिए पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई उत्तर नहंीं आया है. यदि महिलाएं आकर पहचान करें और आवश्यक सुबूत दें तो तत्काल कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

अशोक दीक्षित, जिला समाज कल्याण अधिकारी

 

इस बारे में मुझे नहीं पता है. हो सकता है शिकायती पत्र अभी मेरे पास नहीं पहुंचा हो. पत्र मिलते ही तत्काल ऐसे प्रकरण पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. मैं खुद इस मामले की परख करुंगा और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करुंगा.

सत्येंद्र कुमार, सीडीओ