देहरादून: यहां तो हर जगह है रेडिएशन का खतरा!

By: Inextlive | Publish Date: Wed 11-Oct-2017 04:15:49   |  Modified Date: Wed 11-Oct-2017 04:18:14
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देहरादून: यहां तो हर जगह है रेडिएशन का खतरा!
सरकारी अस्पतालों के पास नहीं एईआरबी का लाइसेंस अधिकारियों को नहीं पता लाइसेंस की अनिवार्यता

DEHRADUN : दून में चल रहे सरकारी अस्पतालों में किसी मशीन के लिए एईआरबी से लाइसेंस नहीं लिया गया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने यह आई है कि विभाग के कई अधिकारियों को यही जानकारी नहीं कि बिना एईआरबी की अनुमति के आयोनाइजिंग रेडिएशन वाली मशीनें नहीं लगाई जा सकती. एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड द्वारा दून अस्पताल की तीन मशीनों को सील किए जाने के बाद दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने अन्य सरकारी अस्पतालों के स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया तो यह जानकारी सामने निकल कर आई.


एक महीने के बाद दूसरे अस्पतालों का भी हो सकता है निरीक्षण

-एईआरबी ने प्राइवेट अस्पतालों की 4 मशीनें सील कीं, 5 को वार्निग

लाइसेंस की जानकारी ही नहीं

विभिन्न सरकारी अस्पतालों में लगी मशीनों के बारे में जब सीएमओ डॉ. टीसी पंत से बात की गई तो उन्होंने बताया कि एईआरबी के कुछ मानक होते हैं. बोर्ड की टीम मशीनों का निरीक्षण करती है और यदि मानकों से अधिक रेडिएशन हो तो मशीनों को सील कर देती है. जब उनसे पूछा गया कि कितनी मशीनों के लिए एईआरबी से लाइसेंस लिया गया है, तो उनका जबाव था कि ऐसा कोई लाइसेंस नहीं होता, एईआरबी वाले रेडिएशन चेक करते हैं.

 

स्थिति चिन्ताजनक : एईआरबी

दून में अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे एईआरबी के वैज्ञानिक अधिकारी बीके सिंह से जब पूछा गया कि सीएमओ लाइसेंस की बात नकार रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो स्थिति वास्तव में चिन्ताजनक है. एक बड़े अधिकारी को यदि यही मालूम नहीं है कि मशीन चलाने के लिए एईआरबी का लाइसेंस अनिवार्य है तो यह हैरानी वाली बात है.

 

एक महीने बाद फिर निरीक्षण संभव

बीके सिंह ने कहा कि फिलहाल बोर्ड जो कार्रवाई कर रहा है वह सभी अस्पतालों के लिए चेतावनी है. जिन अस्पतालों की मशीनें सील की जा रही हैं उनके साथ ही अन्य अस्पतालों को भी एक महीने के भीतर लाइसेंस ले लेना चाहिए. यदि ऐसा नहीं किया गया तो बोर्ड को मजबूर होकर आपराधिक मुकदमा दर्ज करना पड़ेगा.

 

ताकि न मिले अनचाही रेडिएशन

एईआरबी के वैज्ञानिक अधिकारी के अनुसार इस तरह की कार्रवाई का मुख्य मकसद यह है कि किसी भी मरीज को जांच के दौरान अनचाही रेडिएशन न मिले. इस तरह की जांच में रेडिएशन का एक मानक होता है, लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग संबंधी कमी या दूसरे कारणों से कई बार मशीनों से जरूरत से ज्यादा रेडिएशन निकलती है. इससे मरीज के साथ ही लैब में काम करने वाले लोगों और लैब में बाहर भी लोगों को खतरा हो सकता है.

 

निजी अस्पतालों की भी मशीनें सील

एईआरबी की टीम ने मंगलवार को भी अस्पतालों में मशीनों के निरीक्षण का सिलसिला जारी रखा. मंगलवार को म् निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया गया. इस दौरान ब् मशीनों को सील किया गया, जबकि म् मशीनों को सील करने की वार्निग दी गई. यह कार्रवाई देहरादून और ऋषिकेश में की गई.