जब ये 9 लक्षण नजर आएं तो डॉक्‍टर को तुरंत दिखाएं

By: Inextlive | Publish Date: Thu 12-Oct-2017 10:27:12
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जब ये 9 लक्षण नजर आएं तो डॉक्‍टर को तुरंत दिखाएं
आर्थराइटिस या गठिया जिसे संधिशोथ भी कहा जाता है एक प्रकार की जोड़ों की सूजन होती है। यह एक या एक से अधिक जोड़ो को प्रभावित कर सकती है। गठिया के लक्षण आमतौर पर समय के साथ विकसित होते रहते हैं, लेकिन ये अचानक भी दिखाई दे सकते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए 12 अक्‍टूबर को वर्ल्‍ड आर्थराइटिस डे मनाया जाता है।

#WorldArthritisDay : जब ये 9 लक्षण नजर आएं तो डॉक्‍टर को तुरंत दिखाएं
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जब ये 9 लक्षण नजर आएं तो डॉक्‍टर को तुरंत दिखाएं
आर्थराइटिस या गठिया जिसे संधिशोथ भी कहा जाता है एक प्रकार की जोड़ों की सूजन होती है। यह एक या एक से अधिक जोड़ो को प्रभावित कर सकती है। गठिया के लक्षण आमतौर पर समय के साथ विकसित होते रहते हैं, लेकिन ये अचानक भी दिखाई दे सकते हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए 12 अक्‍टूबर को वर्ल्‍ड आर्थराइटिस डे मनाया जाता है।

1- सुबह से शाम तक शरीर में कमजोरी रहती है। मुहं सूखने लगे। आंखें के किनारों पर खुजली होने लगे। आंखों से कीचड़ आए। सोने में परेशानी हो या आसानी से नींद ना आए। सांस लेते समय सीने में दर्द उठे। भूख कम लगे और वजन घटने लगे तो यु आर्थराइटिस के लक्षण हैं। तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

2- जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है।

3- गठिया के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न और फुलाव होने लगता है। रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है।

4- महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण, शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता, पोषण की कमी, मोटापा, ज्‍यादा शराब पीना, हाई ब्‍लड प्रेशर और किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करने की वजह से गठिया होता है।

5- पैरों में गठिया का असर सबसे पहले देखने को मिलता है। अंगूठे बुरी तरह से सूज जाते हैं और तब तक ठीक नहीं होते जब तक की उनका इलाज ना करवाया जाए।

6- संतुलित और सुपाच्य आहार लें। चोकर युक्त आटे की रोटी तथा छिलके वाली मूंग की दाल खाएं। हरी सब्जियों में सहिजन, ककड़ी, लौकी, तोरई, पत्ता गोभी, गाजर, आदि का सेवन करें। दूध और उससे बने पदार्थों का सेवन करें।

7- गठिया के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न और फुलाव होने लगता है। रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है। इसका प्रभाव प्राय घुटनों, नितंबों, उंगलियों तथा मेरू की हड्डियों में होता है उसके बाद यह कलाइयों, कोहनियों, कंधों तथा टखनों के जोड़ भी दिखाई पड़ता है।

8- शरीर गर्म हो जाता है। लाल चकत्ते भी पड़ जाते हैं और जलन की शिकायत होती है। जोड़ों में जहां-जहां दर्द होता है वहां सूजन आना भी इस बीमारी में आम है। सुबह बिस्तर से उठने का मन बिल्कुल भी नहीं करेगा हाथ-पैर इस कदर अकड़ जाएंगे कि उन्हें नॉर्मल होने में 15-20 मिनट लग जाएंगे।

9- इसके शुरुआत में मरीज को बार-बार बुखार आएगा, मांसपेशियों में दर्द रहेगा, हमेशा थकान और टूटन महसूस होगी, भूख कम हो जाएगी है और वजन भी घटने लगेगा। गठिया महिलाओं से ज्‍यादा पुरुषों को होता है। यह पुरुषों को 75 की उम्र के बाद होता है। महिलाओं में यह मेनोपॉज के बाद होता है।

10- महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता, पोषण की कमी, मोटापा, ज्‍यादा शराब पीना, हाई ब्‍लड प्रेशर और किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करने की वजह से गठिया होता है।

1- सुबह से शाम तक शरीर में कमजोरी रहती है। मुहं सूखने लगे। आंखें के किनारों पर खुजली होने लगे। आंखों से कीचड़ आए। सोने में परेशानी हो या आसानी से नींद ना आए। सांस लेते समय सीने में दर्द उठे। भूख कम लगे और वजन घटने लगे तो यु आर्थराइटिस के लक्षण हैं। तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

2- जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है।

3- गठिया के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न और फुलाव होने लगता है। रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है।

4- महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण, शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता, पोषण की कमी, मोटापा, ज्‍यादा शराब पीना, हाई ब्‍लड प्रेशर और किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करने की वजह से गठिया होता है।

5- पैरों में गठिया का असर सबसे पहले देखने को मिलता है। अंगूठे बुरी तरह से सूज जाते हैं और तब तक ठीक नहीं होते जब तक की उनका इलाज ना करवाया जाए।

6- संतुलित और सुपाच्य आहार लें। चोकर युक्त आटे की रोटी तथा छिलके वाली मूंग की दाल खाएं। हरी सब्जियों में सहिजन, ककड़ी, लौकी, तोरई, पत्ता गोभी, गाजर, आदि का सेवन करें। दूध और उससे बने पदार्थों का सेवन करें।

7- गठिया के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न और फुलाव होने लगता है। रोग के बढ़ जाने पर तो चलने-फिरने या हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है। इसका प्रभाव प्राय घुटनों, नितंबों, उंगलियों तथा मेरू की हड्डियों में होता है उसके बाद यह कलाइयों, कोहनियों, कंधों तथा टखनों के जोड़ भी दिखाई पड़ता है।

8- शरीर गर्म हो जाता है। लाल चकत्ते भी पड़ जाते हैं और जलन की शिकायत होती है। जोड़ों में जहां-जहां दर्द होता है वहां सूजन आना भी इस बीमारी में आम है। सुबह बिस्तर से उठने का मन बिल्कुल भी नहीं करेगा हाथ-पैर इस कदर अकड़ जाएंगे कि उन्हें नॉर्मल होने में 15-20 मिनट लग जाएंगे।

9- इसके शुरुआत में मरीज को बार-बार बुखार आएगा, मांसपेशियों में दर्द रहेगा, हमेशा थकान और टूटन महसूस होगी, भूख कम हो जाएगी है और वजन भी घटने लगेगा। गठिया महिलाओं से ज्‍यादा पुरुषों को होता है। यह पुरुषों को 75 की उम्र के बाद होता है। महिलाओं में यह मेनोपॉज के बाद होता है।

10- महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता, पोषण की कमी, मोटापा, ज्‍यादा शराब पीना, हाई ब्‍लड प्रेशर और किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करने की वजह से गठिया होता है।

 

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