दो बेटियों के साथ मां-बाप की एक साथ हत्या का खुलासा

कंपनी के फ्रॉड के चलते दबाव में दबाव में आ गया था परिवार

बेटी पर युवक ने बनाया प्रेशर तो बढ़ा तनाव, सरेआम जवाब देने को मान लिया अपमान

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ALLAHABAD: फ्रॉड कंपनी ने किया था जो पैसा जमा कराने के बाद ताला लटकाकर गायब हो गई. एजेंट होने के नाते युवती तनाव में आ गई. लोगों की अनाप-शनाप बातें और खरी-खोटी सुनना उसकी मजबूरी गई थी. इसी में उसने एक दिन जवाब दे दिया तो उसे युवक ने अपना अपमान मान लिया और इसका बदला उसने गैंगरेप के साथ नरसंहार से लिया. जी, हां! यही कहानी है नवाबगंज थाना क्षेत्र के जुड़ापुर गांव के मा-बाप और दो बेटियों की एक साथ हत्या की घटना के पीछे की. पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार करने के बाद यह खुलासा किया है.

परिवार में बचे हैं सिर्फ दो सदस्य

23 अप्रैल की रात हुई इस घटना में जुड़ापुर के किराना व्यवसायी दम्पति और उनकी दो बेटियों की निर्मम हत्या कर दी गई थी. एक बेटी के साथ वहशियों ने गैंग रेप भी किया था. घटना के बाद इस परिवार में दो ही सदस्य जिंदा बचे. एक प्रतापगढ़ में परीक्षा देने गया था और दूसरी बेटी जो पढ़ाई के चक्कर में बाहर थी. इस घटना की गूंज लखनऊ तक सुनाई पड़ी थी. परिवार के जिंदा बचे सदस्यों को सुरक्षा के नाम पर पुलिस ने सर्किट हाउस में रख दिया. इन लोगों ने पड़ोसियों से पूर्व में हुए विवाद के आधार पर पांच लोगों को नामजद किया तो पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया. बाद में परिवार के सदस्यों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी बात पहुंचाई तो नए सिरे से जांच एसटीएफ को सौंप दी गई. गिरफ्तार लोगों का डीएनए टेस्ट कराया गया. इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई लेकिन सूत्रों का कहना था कि इससे पुष्टि हो गई थी हत्याकांड में वे शामिल नहीं हैं. इसके बाद फोरेंसिट टीम ने नए सिरे से जांच शुरू की.

साढ़े सात हजार रुपए बने काल

सोमवार को इस मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि एसटीएफ व नवाबगंज की संयुक्त पुलिस टीम ने मिलकर हत्या में शामिल चार कातिलों को पकड़ लिया है. एसएसपी आंनद कुलकर्णी ने सभी आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया. मुख्य आरोपी नीरज ने बताया कि मृतक की बेटी कविता (काल्पनिक नामम) गांव से कुछ दूरी पर स्थित कॉलेज में शिक्षिका थी. उसके घर के सामने बीएलआर नाम से एक जन कल्याण ट्रस्ट का कार्यालय था. कविता उसमें एजेंट के रूप में काम करती थी. कम्पनी लोगों से पैसा लेकर इनाम दिया करती थी. कमीशन के चक्कर में एजेंट बनी कविता ने कई लोगों को पैसा लगाने के लिए मोटीवेट किया. नीरज ने अपने लोगों के साढ़े सात हजार रुपए जमा कराए थे. बदले में उसे पांच साइकिलें मिलनी थी. काफी समय बीतने के बाद भी कविता उसे कंपनी से साइकिल नही दिलवा सकी. नीरज इसके लिए उस पर लगातार दबाव बना रहा था. 28 फरवरी को कविता ने विश्वास दिलाया कि उसे साइकिल मिल जाएगी. संयोग से इसी के बाद कंपनी ताला लगाकर गायब हो गई. इस पर नीरज, कविता से उलझ गया तो उसने बचाव में कहा कि इसके बारे में कंपनी से बात करे. बात आगे बढ़ी तो कविता ने उन्हें कुछ शब्द बोल दिए. नीरज को ऐसा जवाब मिलने की अपेक्षा नहीं थी तो वह दिल पर ले बैठा. इसी के चलते उसने यह पूरी साजिश रची. पुलिस ने हत्यारों के पास से दो चाकू, खून से सनी शर्ट व जींस पैट के साथ दो बाइक बरामद किया है.

परीक्षा दिलाने का किया था अनुरोध

नीरज की मंशा से अनभिज्ञ परिवार उससे बात करता रहा. 21 अप्रैल को पिता के कहने पर नीरज, कविता को एमए की परीक्षा दिलाने के लिए ले गया. इस दौरान कविता ने नीरज को यह भी बता दिया कि उसका भाई नहीं है वह परीक्षा देने प्रतापगढ़ गया है. इसके बाद नीरज ने बदले की योजना को अंजाम तक पहुंचाने का प्लान बना लिया. इस योजना में उसने प्रदीप, मोहित व सत्येन्द्र को शामिल किया. 23 अप्रैल की रात करीब पौने बारह बजे वे सभी कविता के घर पहुंचे. बाइक के लिए पेट्रोल लेने के बहाने फोन करके दरवाजा खोलवाया. जैसे मृतका ने दरवाजा खोला, नीरज समेत सभी अंदर घुस गए और उसका मुंह दबाकर कमरे में ले गए. दोनों युवतियों से रेप किया और फिर दोनों के साथ उनके मां-बाप की भी हत्या कर दी.

दूसरे दिन घटनास्थल पर थे मौजूद

एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि चारो कत्ल करने के बाद बाइक लेकर अपने घर चले गए. दूसरे दिन मोहित को छोड़ सभी मौके पर मौजूद थे और सारी स्थितियों को देख रहे थे. सत्येन्द्र ने अपनी खून से सनी शर्ट को नीजर के घर पर बदलने के बाद वहीं छोड़ दिया था. नीरज के कपड़े भी पुलिस को उसके घर से मिले हैं.

बेवजह तीन महीने जेल में रहे पांच

इस घटना के बाद मृतक के परिवार की तरफ से दी गई तहरीर में पड़ोस में रहने वाले पांच लोगों को नामजद किया गया था. नामजद रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने शिवबाबू यादव, भल्लू यादव,नरेन्द्र यादव, अजय व नवीन यादव को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था. तब इसका कारण होली के समय पुलिस को बबिता द्वारा पेड़ काटे जाने की सूचना देना पर नामजद एक सदस्य की गिरफ्तारी और पांच हजार रुपए लेकर उसे थाने से छोड़ दिया जाना बताया गया था. इस पर पुलिसवालों पर भी कार्रवाई हुई थी. नए खुलासे के बाद उनके बाहर आने का रास्ता खुल गया है.

खुलासे से भाई-बहन खुश नहीं

जूड़ापुर हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपा रहें है लेकिन मृतक के परिवार बचे भाई रंजीत और उसकी बहन बबिता अभी भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है. बबिता ने बताया कि उन्हें पुलिस अधिकरियों ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की अभी भी जांच की जा रही है. चार अभियुक्त पकडे़ गए हैं, लेकिन उन्हें लगता है इस घटना में और भी कई लोग शामिल हैं.

जल्द ही कोर्ट में हत्या से जुडे साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे ताकि जो दोषी हैं उन्हें सजा मिले और जो निर्दोष हैं वे जेल से बाहर आ सकें.

आनंद कुलकर्णी

एसएसपी, इलाहाबाद