सुसाइड करने से रोकेगा फेसबुक का यह नया फीचर

By: Inextlive | Publish Date: Thu 16-Jun-2016 01:46:05   |  Modified Date: Thu 16-Jun-2016 01:46:26
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सुसाइड करने से रोकेगा फेसबुक का यह नया फीचर
युवाओं में बढ़ते डिप्रेशन और सुसाइड के मामलों को देखते हुए फेसबुक एक नया फीचर लॉन्‍च करने जा रही है। यह फीचर फेसबुक पोस्‍ट के जरिए यूजर्स के इमोशनल और मेंटल हेल्‍थ पर नजर रखेगा। ताकि यदि कोई सुसाइड जैसा बड़ा कदम उठाने का विचार कर रहा है तो उसे काउंसलिंग कर बचाया जा सके।

कैसे मदद करेगा फेसबुक
खबरों की मानें तो सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक पर जब कोई यूजर्स डिप्रेशन से जुड़ी कोई पोस्‍ट करेगा। तो फेसबुक टीम की ओर से उसे खास काउंसलिंब दी जाएगी। इसका मकसद यूजर्स के मेंटल सिचुएशन को तनाव मुक्‍त रखना है। ताकि कोई सुसाइड जैसा कदम न उठा सके। फेसबुक इस तरह का फीचर यूएस और यूके के यूजर्स के लिए पहले ही रिलीज कर चुका है। ऐसे में अब फेसबुक इंडिया भी सुसाइड प्रिवेंशन फीचर को जल्‍द से जल्‍द भारत में लॉन्‍च कर सकता है।

ऐसे करें सुसाइड प्रिवेंशन एप्लीकेशन का इस्तेमाल
(1) फेसबुक पर कोई भी दोस्त डिप्रेशन और सुसाइड के संकेत दे रहा है तो आप उसकी पोस्ट को रिपोर्ट कर सकते है। ऐसी पोस्ट के टॉप पर जाकर आपको दाईं तरफ दिए गए एक चिन्ह को क्लिक करना है।

(2) इसे क्लिक करते ही ये पोस्ट रिपोर्ट हो जाएगी। जैसे ही आप किसी दोस्त की पोस्ट रिपोर्ट करेंगे वैसे ही इसका नोटिफिकेशन फेसबुक को भेजा जाएगा। फेसबुक की सुसाइड प्रिवेंशन टीम उस यूजर की मदद करेगी।

एनजीओ का सहारा

फेसबुक अपने सुसाइड प्रिवेंशन के लिए भारत के दो एनजीओ के साथ भी समझौता कर रहा है। इसमें आसरा और द लिव लव फाउंडेशन को जोड़ा जाएगा। ये दोनों एनजीओ फेसबुक पर तनावग्रस्त युवाओं के लिए हेल्पलाइन का काम करेंगी।

14.8 करोड़ फेसबुक यूजर्स को मिलेगी मदद
भारत में करीब 14 करोड़ 80 लाख लोग फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इस नए फीचर की मदद से तनाव से जूझ रहे लोगों को इससे बाहर निकाला जा सकता है। आंकडों के अनुसार 2014 में भारत के अंदर 1,31,666 लोगों ने आत्महत्या की। इस हिसाब से हर घंटे देश में करीब 15 लोग सुसाइड कर रहे हैं। आत्महत्या के सबसे ज्यादा केस महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में सामने आए हैं। शहरों में गांवों की तुलना में कहीं ज्यादा सुसाइड हो रही हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार ज्यादातर सुसाइड केसेज का कारण घर से जुड़ी समस्या है। वहीं पढ़ाई और नौकरी के तनाव की वजह से भी भारतीय यूथ ये कदम उठा रहा है।

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