मुस्‍लिम देशों के नागरिकों पर रोक के ट्रंप के आदेश पर कोर्ट का स्‍टे

By: Inextlive | Publish Date: Mon 30-Jan-2017 12:30:12   |  Modified Date: Mon 30-Jan-2017 12:37:16
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मुस्‍लिम देशों के नागरिकों पर रोक के ट्रंप के आदेश पर कोर्ट का स्‍टे
अमेरिका के नवर्निवाचित राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के खिलाफ लोगों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। राष्‍ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों पर अमेरिका में प्रवेश करने पर रोक लगाई है। इसके साथ ही ट्रंप ने प्रवासियों को वीजा देने के नियमों को भी सख्‍त करने की घोषणा की है। ट्रंप की इस फैसले पर न्‍यूयॉर्क की संघीय कोर्ट ने स्‍टे लगया दिया है। ऑस्‍कर नॉमिनेटिड फिल्‍म की अभिनेत्री ने ऑस्‍कर का बहिस्‍कार कर ट्रंप का विरोध करने का फैसला किया है।


ऑस्‍कर में शामिल नहीं हो सकेंगे असगर फरहादी
फरवरी में होने वाले ऑस्‍कर समारोह में ईरानी डॉयरेक्‍टर असगर फरहादी राष्‍ट्रपति ट्रंप के आदेश के बाद अब समारोह में शामिल नहीं हो सकेंगे। फरहादी को बेस्‍ट फॉ‍रेन फिल्‍म केटागिरी द सेल्‍समैन के लिए नॉमिनेट किया गया है। फरहादी ईरान के रहने वाले हैं। ट्रंप ने ईरान सहित और छह मुस्लिम देशों के नागरिकों को अमेरिका में बैन कर दिया है। ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिका में रह रहे हजारों लोगों पर संकट आ गया है जो पढ़ाई करने या किसी और काम से पिछले कुछ सालों से रह रहे हैं। ट्रंप के आदेश के कुछ घंटे बाद ही केरियों में 12 माइग्रेंट को रोक न्‍यूयॉर्क में रोक लिया गया क्‍योंकि वो ट्रंप के आदेश के कुछ घंटो बाद ही वहां पहुंचे थे।


ईरानी अभिनेत्री ने किया ट्रंप का विरोध
ईरानी फिल्‍म द सेल्‍समैन की अभिनेत्री ने कहा है कि राष्‍ट्रपति ट्रंप की नीतियों की वजह से वह ऑस्‍कर का बहिस्‍कार करेंगी। उन्‍होंने कहा कि मुस्लिम देशों पर पाबंदी लगाने का फैसला नस्‍लवादी है। ईरान की अदाकारा तारानेह अलीदूस्ती ने असगर फरहादी की फिल्म दि सेल्समैन में राणा एतेसामी का मुख्य किरदार निभाया है। इस फिल्म की कहानी एक ऐसे दंपति के बारे में है जिनके संबंध अचानक एक अजनबी के आने के बाद बिगड़ जाते हैं। 2012 में दि सेपरेशन के लिए ऑस्कर जीतने वाले फरहादी और फिल्म के अभिनेता साहब होसिनी ने अभी तक इस पुरस्कार समारोह में शामिल होने के बारे में कुछ नहीं कहा है। इस फिल्‍म को कान, शिकागो और म्‍यूनिख फिल्‍म समारोह में पुरस्‍कारों से नवाजा जा चुका है।


राष्‍ट्रपति ट्रंप के तुगलकी फरमान पर कोर्ट का स्‍टे
राष्‍ट्रपति ट्रंप के आदेश के बाद न्‍यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट के बाद हजारों की संख्‍या में पहुंचे प्रवासी नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद न्‍यूयॉर्क की एक‍ संघिय अदालत ने प्रेसीडेंट ट्रंप के अस्‍थायी आव्रजन प्रतिबंध के कुछ हिस्‍सों पर स्‍टे लगा दिया है। साथ ही अदालत ने अधिकारियों को आदेश देते हुए कहा कि वे अमरिकी एयरपोर्ट पर फंसे शरणार्थियों और सहित अन्‍य प्रवासी यात्रियों को निर्वासित करना बंद करें। अमरिकी सिविल लिबर्टीज यूनियन के वकीलों ने ट्रंप के शासकीय आदेश को रोकने के लिए सरकार पर मुकदमा किया था। ट्रंप के इस आदेश के बाद मुस्लिम देशों ने भी इसका जमकर विरोध किया।


आतंकवाद से संबंध रखने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई
ट्रंप ने बातचीत के दौरान कहा कि उनकी योजना मुस्लिमों के आवागमन को प्रतिबंधित करना नहीं है। उनका काम उन देशों को निशाना बनाना है जिनका आतंकवाद से संबंध है। इराक, सीरिया, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन के सभी वीजा आवेदन एक कार्यकारी आदेश के तहत एक महीने के लिए रोके जाने की संभावना है। यह कार्यकारी आदेश वाशिंगटन पोस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित किया गया है। इस आदेश में अधिकारियों द्वारा कम जोखिम वाले देशों की एक सूची तैयार करने के रूप में चार महीने के लिए अमेरिकी शरणार्थी कार्यक्रम स्थगित करने की बात भी कही गई है।


गूगल के सीईओ ने भी की प्रेसीडेंट के आदेश की आलोचना
भारतीय मूल के गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश की आलोचना की है। इस आदेश के बाद गूगल ने अपने ट्रैवलिंग स्टाफ को वापस अमेरिका बुला लिया है। सुंदर पिचाई ने कहा कि यह फैसला अमेरिका में आने वाले टैलेंट के लिए बैरियर जैसा है। पिचाई ने स्टाफ को भेजे ईमेल में लिखा है कि सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर अस्थायी रोक के फैसले से गूगल के करीब 187 कर्मचारी प्रभावित होंगे।

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