फुटबॉल में इतिहास रचेगा इंडिया, फीफा अंडर-17 का आगाज

By: Prabha Punj Mishra | Publish Date: Fri 06-Oct-2017 05:09:20
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फुटबॉल में इतिहास रचेगा इंडिया, फीफा अंडर-17 का आगाज
शुक्रवार का दिन इंडियन फुटबॉल के इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो जाएगा, जब इंडिया में पहली बार फीफा के बड़े टूर्नामेंट अंडर-17 वर्ल्‍ड कप का शुभारंभ हो गया। इंडियन टीम के खिलाड़ी शुक्रवार को अमेरिका के खिलाफ अंडर-17 वर्ल्‍ड कप के शुरुआती लीग मुकाबले के लिए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में उतरेंगे तो उनकी निगाहें मैदान पर परिणाम की चिंता किए बिना अपना बेस्ट परफॉर्मेंस कर जरूरी अनुभव हासिल करने पर लगी होंगी। हालांकि टीम पूरी तैयारी और कड़ी प्रैक्टिस के बाद वर्ल्‍ड कप में उतर रही है, जहां दुनिया की 23 अन्य दिग्गज टीमें भी खिताब के लिए दावेदारी पेश कर रही हैं। इंडिया इस टूर्नामेंट में निश्चित ही खिताब के प्रबल दावेदार या मजबूत टीम के तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन 'ब्लू कब्स' के नाम से जाने जानी वाली इंडियन टीम घरेलू मैदान और घरेलू परिस्थितियों में बड़ा उलटफेर करके खुद को अंडरडॉग साबित कर सकती है।

FIFA U 17 World Cup India face a severe test when they play USA in opener
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फुटबॉल में इतिहास रचेगा इंडिया, फीफा अंडर-17 का आगाज
शुक्रवार का दिन इंडियन फुटबॉल के इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो जाएगा, जब इंडिया में पहली बार फीफा के बड़े टूर्नामेंट अंडर-17 वर्ल्‍ड कप का शुभारंभ हो गया। इंडियन टीम के खिलाड़ी शुक्रवार को अमेरिका के खिलाफ अंडर-17 वर्ल्‍ड कप के शुरुआती लीग मुकाबले के लिए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में उतरेंगे तो उनकी निगाहें मैदान पर परिणाम की चिंता किए बिना अपना बेस्ट परफॉर्मेंस कर जरूरी अनुभव हासिल करने पर लगी होंगी। हालांकि टीम पूरी तैयारी और कड़ी प्रैक्टिस के बाद वर्ल्‍ड कप में उतर रही है, जहां दुनिया की 23 अन्य दिग्गज टीमें भी खिताब के लिए दावेदारी पेश कर रही हैं। इंडिया इस टूर्नामेंट में निश्चित ही खिताब के प्रबल दावेदार या मजबूत टीम के तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन 'ब्लू कब्स' के नाम से जाने जानी वाली इंडियन टीम घरेलू मैदान और घरेलू परिस्थितियों में बड़ा उलटफेर करके खुद को अंडरडॉग साबित कर सकती है। 

इतिहास में दर्ज हो जाएगी टीम 
मणिपुरी मिडफील्डर अमरजीत सिंह कियाम एंड कंपनी किसी भी फीफा टूर्नामेंट में शिरकत करने की उपलब्धि हासिल करने वाली पहली इंडियन टीम बन जाएगी, जो अभी तक बाईचुंग भूटिया, आई एम विजयन और सुनील छेत्री जैसे महान इंडियन प्लेयर्स के हिस्से में भी नहं आ सकी है। 60 से ज्यादा वर्ष पहले इंडिया ने उरूग्वे (जब यह इनविटेशनल टूर्नामेंट होता था) में 1950 वर्ल्‍ड कप में भाग लेने से इंकार कर दिया था। उसके बाद यह अंडर-17 वर्ल्‍ड कप में भाग लेने वाली पहली टीम होगी। 

5वां एशियाई देश 
इंडिया पहली बार किसी फीफा वर्ल्‍ड कप की मेजबानी कर रहा है, जिसकी बदौलत उसे इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का मौका मिला। इसके 52 मैचों का आयोजन शुक्रवार से 28 अक्टूबर तक यहां दिल्ली समेत मुंबई, कोच्चि, गोवा, गुवाहाटी और कोलकाता में किया जाएगा। चीन, जापान, साउथ कोरिया और यूनाइटेड अरब अमीरात के बाद इंडिया पांचवां एशियाई देश है, जो 1985 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है। 

अमेरिका जीत का दावेदार 
अमेरिका, कोलंबिया और दो बार की चैंपियन घाना के साथ कठिन ग्र्रुप-ए में शामिल इंडियन टीम को निश्चित रूप से 24 टीमों के टूर्नामेंट के अगले दौर में पहुंचने के दावेदार के रूप में नहीं देखा जा रहा है, लेकिन टीम के खिलाड़ी जोश से भरे हैं और अपना बेस्ट करने के लिए बेताब हैं। इसमें अमेरिकी टीम प्रबल दावेदार है, जिसके ज्यादातर खिलाड़ी मेजर लीग सॉकर की युवा टीम में खेल चुके हैैं और कुछ तो टॉप यूरोपीय क्लबों के लिए खेलने के लिए तैयार हैं। 

टॉप-2 टीमें पहुंचेंगी अगले दौर में 
प्रत्येक ग्र्रुप में टॉप पर रहने वाली दो टीमें और ग्र्रुप में तीसरे स्थान पर रहने वाली बेस्ट चार टीमें नॉकआउट राोंड में जगह बनाएंगी। टूर्नामेंट में तीन बार की चैंपियन ब्राजील, यूरोपीय चैंपियन स्पेन और मेक्सिको ट्रॉफी जीतने की प्रबल दावेदार हैं, जबकि दो बार की चैंपियन घाना, जर्मनी, इंग्लैंड और अमेरिका भी अपने प्रदर्शन से हैरान कर सकती हैं।  

माटोस को खिलाडिय़ों पर भरोसा
टीम के मुख्य कोच लुई नार्टन डि माटोस को खिलाडिय़ों के साथ तैयारी के लिए केवल आठ महीने का समय मिला है, लेकिन उन्हें अपने खिलाडिय़ों से अच्छे प्रदर्शन करने का पूरा भरोसा है। हालांकि वह भी मानते हैं कि अगर टीम किसी भी लीग मैच में नहीं हारती और ड्रॉ भी हासिल कर लेती है तो यह भी उनके लिए अच्छा परिणाम होगा। हालांकि आल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने मेजबान होने के नाते अपने खिलाडिय़ों की तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और उन्हें इंटरनेशनल एक्सपोजर मुहैया कराया है, जिसमें यूरोप का ट्रेनिंग दौरा और मेक्सिको में टूर्नामेंट शामिल हैं।

फॉर्मर प्लेयर्स को उम्मीदें 
फेडरेशन के साथ ही कुछ फॉर्मर प्लेयर्स को भी इस टूर्नामेंट से काफी उम्मीद है। वे मानते हैं कि इंडियन टीम फिर से 1950 और 1960 के डिकेड जैसी मजबूत बन सकची है। अंडर-17 वर्ल्‍ड कप की मेजबानी से निश्चित रूप से बड़े टूर्नामेंट के आयोजन के रास्ते भी खुल जाएंगे, जिसमें अंडर-20 फीफा वर्ल्‍ड कप टूर्नामेंट शामिल है जिसके लिए इंडिया ने 2019 सीजन के लिए बोली लगाई है। 

बिना प्रेशर के खेलें खिलाड़ी 
कोच डि माटोस चाहते हैं कि खिलाड़ी बिना किसी दबाव के कांप्टीटिव होकर खेलें और गोल का कोई मौका नहीं गंवाएं। उन्होंने अमेरिका के खिलाफ मुकाबले के बारे में कहा, 'उनका आक्रमण काफी मजबूत है और हमें डिफेंस में मजबूत होना होगा।' वहीं, अमेरिका के मुख्य कोच जान हैकवर्थ ने इंडिया को हल्के में लेने से इंकार करते हुए कहा, 'हम पहले एक बार इंडिया के खिलाफ  खेल चुके हैं और उनके खिलाफ  सफल रहे थे, लेकिन वो वर्ल्‍ड कप का शुरुआती मैच नहीं था और वे वर्ल्‍ड कप की मेजबानी भी नहीं कर रहे थे। उन्हें काफी घरेलू समर्थन मिलेगा।' पिछले साल ब्रिक्स चैंपियनिशप में ब्राजील के खिलाफ शानदार गोल करने वाले मिडफील्डर कोमल थाटल की कोशिश वैसा ही प्रदर्शन करने पर लगी हैं, जिनका मानना है कि टीम के खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह से तैयार हैं। 

घरेलू दर्शकों का मिलेगा समर्थन
उद्घाटन मैच का हाउसफुल होना तय हो चुका है। ऐसे में घरेलू दर्शकों के समर्थन के बीच इंडिया के पास अपने पहले मैच में ही उलटफेर भरा नतीजा देने का सुनहरा अवसर होगा। अमेरिका के सामने लंबे सफर की थकान से उबरने और सबकांटिनेंट के मौसम में खुद को ढालने की चुनौती भी होगी। अमेरिका के संभलने के पहले अगर इंडिया वार करने में सफल रहा, यानी शुरुआती मिनटों में ही गोल करने में सफल रहा तो एक अरब से ज्यादा की आबादी वाले इस देश का अगला राउंड लगभग तय हो जाएगा। अगर इंडिया ने ड्रॉ भी खेल लिया तो भी उम्मीदों की डोर टूटेगी नहीं। 

अमेरिका के पास अपार अनुभव 
अमेरिकी टीम ने फीफा अंडर-17 वर्ल्‍ड कप के कुल 16 सीजंस में से 15 में हिस्सा लिया है। अमेरिका ने अब तक केवल 2013 में एक बार इस कैटेगरी के फीफा टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है। इस लिहाज से वह मेजबान टीम के सामने न सिर्फ  काफी मजबूत होगी, बल्कि उसके पास वर्ल्‍ड कप का अपार अनुभव भी है। इसके अलावा अमेरिकी टीम के 21 में से 12 खिलाड़ी दुनिया के बड़े फुटबॉल लीग क्लबों की ओर से भी खेलते हैं। 
इतिहास में दर्ज हो जाएगी टीम 

मणिपुरी मिडफील्डर अमरजीत सिंह कियाम एंड कंपनी किसी भी फीफा टूर्नामेंट में शिरकत करने की उपलब्धि हासिल करने वाली पहली इंडियन टीम बन जाएगी, जो अभी तक बाईचुंग भूटिया, आई एम विजयन और सुनील छेत्री जैसे महान इंडियन प्लेयर्स के हिस्से में भी नहं आ सकी है। 60 से ज्यादा वर्ष पहले इंडिया ने उरूग्वे (जब यह इनविटेशनल टूर्नामेंट होता था) में 1950 वर्ल्‍ड कप में भाग लेने से इंकार कर दिया था। उसके बाद यह अंडर-17 वर्ल्‍ड कप में भाग लेने वाली पहली टीम होगी। 

 

5वां एशियाई देश 

इंडिया पहली बार किसी फीफा वर्ल्‍ड कप की मेजबानी कर रहा है, जिसकी बदौलत उसे इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का मौका मिला। इसके 52 मैचों का आयोजन शुक्रवार से 28 अक्टूबर तक यहां दिल्ली समेत मुंबई, कोच्चि, गोवा, गुवाहाटी और कोलकाता में किया जाएगा। चीन, जापान, साउथ कोरिया और यूनाइटेड अरब अमीरात के बाद इंडिया पांचवां एशियाई देश है, जो 1985 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है। 

 

अमेरिका जीत का दावेदार 

अमेरिका, कोलंबिया और दो बार की चैंपियन घाना के साथ कठिन ग्र्रुप-ए में शामिल इंडियन टीम को निश्चित रूप से 24 टीमों के टूर्नामेंट के अगले दौर में पहुंचने के दावेदार के रूप में नहीं देखा जा रहा है, लेकिन टीम के खिलाड़ी जोश से भरे हैं और अपना बेस्ट करने के लिए बेताब हैं। इसमें अमेरिकी टीम प्रबल दावेदार है, जिसके ज्यादातर खिलाड़ी मेजर लीग सॉकर की युवा टीम में खेल चुके हैैं और कुछ तो टॉप यूरोपीय क्लबों के लिए खेलने के लिए तैयार हैं। 

 

टॉप-2 टीमें पहुंचेंगी अगले दौर में 

प्रत्येक ग्र्रुप में टॉप पर रहने वाली दो टीमें और ग्र्रुप में तीसरे स्थान पर रहने वाली बेस्ट चार टीमें नॉकआउट राोंड में जगह बनाएंगी। टूर्नामेंट में तीन बार की चैंपियन ब्राजील, यूरोपीय चैंपियन स्पेन और मेक्सिको ट्रॉफी जीतने की प्रबल दावेदार हैं, जबकि दो बार की चैंपियन घाना, जर्मनी, इंग्लैंड और अमेरिका भी अपने प्रदर्शन से हैरान कर सकती हैं।  

 

माटोस को खिलाडिय़ों पर भरोसा

टीम के मुख्य कोच लुई नार्टन डि माटोस को खिलाडिय़ों के साथ तैयारी के लिए केवल आठ महीने का समय मिला है, लेकिन उन्हें अपने खिलाडिय़ों से अच्छे प्रदर्शन करने का पूरा भरोसा है। हालांकि वह भी मानते हैं कि अगर टीम किसी भी लीग मैच में नहीं हारती और ड्रॉ भी हासिल कर लेती है तो यह भी उनके लिए अच्छा परिणाम होगा। हालांकि आल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने मेजबान होने के नाते अपने खिलाडिय़ों की तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और उन्हें इंटरनेशनल एक्सपोजर मुहैया कराया है, जिसमें यूरोप का ट्रेनिंग दौरा और मेक्सिको में टूर्नामेंट शामिल हैं।

 

फॉर्मर प्लेयर्स को उम्मीदें 

फेडरेशन के साथ ही कुछ फॉर्मर प्लेयर्स को भी इस टूर्नामेंट से काफी उम्मीद है। वे मानते हैं कि इंडियन टीम फिर से 1950 और 1960 के डिकेड जैसी मजबूत बन सकची है। अंडर-17 वर्ल्‍ड कप की मेजबानी से निश्चित रूप से बड़े टूर्नामेंट के आयोजन के रास्ते भी खुल जाएंगे, जिसमें अंडर-20 फीफा वर्ल्‍ड कप टूर्नामेंट शामिल है जिसके लिए इंडिया ने 2019 सीजन के लिए बोली लगाई है। 

 

बिना प्रेशर के खेलें खिलाड़ी 

कोच डि माटोस चाहते हैं कि खिलाड़ी बिना किसी दबाव के कांप्टीटिव होकर खेलें और गोल का कोई मौका नहीं गंवाएं। उन्होंने अमेरिका के खिलाफ मुकाबले के बारे में कहा, 'उनका आक्रमण काफी मजबूत है और हमें डिफेंस में मजबूत होना होगा।' वहीं, अमेरिका के मुख्य कोच जान हैकवर्थ ने इंडिया को हल्के में लेने से इंकार करते हुए कहा, 'हम पहले एक बार इंडिया के खिलाफ  खेल चुके हैं और उनके खिलाफ  सफल रहे थे, लेकिन वो वर्ल्‍ड कप का शुरुआती मैच नहीं था और वे वर्ल्‍ड कप की मेजबानी भी नहीं कर रहे थे। उन्हें काफी घरेलू समर्थन मिलेगा।' पिछले साल ब्रिक्स चैंपियनिशप में ब्राजील के खिलाफ शानदार गोल करने वाले मिडफील्डर कोमल थाटल की कोशिश वैसा ही प्रदर्शन करने पर लगी हैं, जिनका मानना है कि टीम के खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह से तैयार हैं। 

 

घरेलू दर्शकों का मिलेगा समर्थन

उद्घाटन मैच का हाउसफुल होना तय हो चुका है। ऐसे में घरेलू दर्शकों के समर्थन के बीच इंडिया के पास अपने पहले मैच में ही उलटफेर भरा नतीजा देने का सुनहरा अवसर होगा। अमेरिका के सामने लंबे सफर की थकान से उबरने और सबकांटिनेंट के मौसम में खुद को ढालने की चुनौती भी होगी। अमेरिका के संभलने के पहले अगर इंडिया वार करने में सफल रहा, यानी शुरुआती मिनटों में ही गोल करने में सफल रहा तो एक अरब से ज्यादा की आबादी वाले इस देश का अगला राउंड लगभग तय हो जाएगा। अगर इंडिया ने ड्रॉ भी खेल लिया तो भी उम्मीदों की डोर टूटेगी नहीं। 

 

अमेरिका के पास अपार अनुभव 

अमेरिकी टीम ने फीफा अंडर-17 वर्ल्‍ड कप के कुल 16 सीजंस में से 15 में हिस्सा लिया है। अमेरिका ने अब तक केवल 2013 में एक बार इस कैटेगरी के फीफा टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है। इस लिहाज से वह मेजबान टीम के सामने न सिर्फ  काफी मजबूत होगी, बल्कि उसके पास वर्ल्‍ड कप का अपार अनुभव भी है। इसके अलावा अमेरिकी टीम के 21 में से 12 खिलाड़ी दुनिया के बड़े फुटबॉल लीग क्लबों की ओर से भी खेलते हैं। 



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