-कई साल से बंद पड़े हैं फायर हाइड्रेंट, कई जगहों से नामोनिशान भी मिटा

-शहरी क्षेत्र में आग लगने पर पानी का इंतजाम ही नहीं, दमकल गाडि़यों को लगाने पड़ते हैं कई चक्कर

VARANASI

सोचिए कि एक रेस्टोरेंट है, जहां खूबसूरत इंटीरियर और महंगी क्रॉकरी रखी है. सर्व करने को स्टाफ भी है मगर वहां खाना बनाने का सामान ही नहीं है. रेस्टोरेंट क्या किसी काम का होगा? बनारस के फायर ब्रिगेड की हालत भी कुछ ऐसी ही हो चली है. अत्याधुनिक मशीनें हैं, स्टाफ भी भरपूर हैं. मगर शहरी क्षेत्र में कहीं आग लग जाए तो अगल-बगल पानी का जुगाड़ करने में हालत खराब हो जाती है इनकी. पानी लाने के लिए गाडि़यों को वापस फायर स्टेशन भागना पड़ता है.

300 से ज्यादा थे आउटलेट्स

1890 में वाराणसी वाटर व‌र्क्स की शुरुआत के बाद अंग्रेज हुक्मरानों ने पेयजल सप्लाई की शुरुआत की. इसके साथ ही शहरी क्षेत्र में आग लगने पर पानी के लिए एक व्यवस्था की गई. इसके लिए पूरे शहर में एक अलग पाइप लाइन बिछाई गई जिसमें 24 घंटे पानी रहा करता था. पानी का प्रेशर 7 मीटर तक होना अनिवार्य था. शहर में इसके 300 से ज्यादा आउटलेट्स बनाए गए जिन्हें फायर हाइड्रेंट का नाम दिया गया. आग लगने की स्थिति में दमकल की गाडि़यां मौके पर पहुंचतीं और आसपास के फायर हाइड्रेंट से वह पानी लेती थीं. दौड़भाग में बचत के कारण ज्यादा जल्दी और कारगर तरीके से आग पर काबू पाया जाता था.

1990 के बाद से इस्तेमाल नहीं

फायर ब्रिगेड की फाइलों की मानें तो 1990 तक इन हाइड्रेंट्स का इस्तेमाल किया गया है. इस समय तक शहर में 246 फायर हाइड्रेंट्स काम कर रहे थे. इसके बाद शहर में हुई खोदाई, नई सड़कों का निर्माण, सीवर, पेयजल और टेलीफोन केबल डाले जाने के काम के दौरान हाइड्रेंट्स की लाइनें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई और अब यह बंद हो चुकी हैं.

अब पोखरों से लेना पड़ता है पानी

अब आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड को अजीब हालात का सामना करना पड़ता है. शहरी क्षेत्र में अगलगी होने पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग से तो ग्रामीण क्षेत्रों में ट्यूबवेल से पानी लेना पड़ता है. नई कॉलोनियों में आग बुझाने के लिए दमकल वाहनों को फायर स्टेशन तक कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, जैसा पिछले दिनों सिकरौल में एक रिहायशी अपार्टमेंट में आग लगने के दौरान हुआ. कुछ साल पहले आशापुर की एक ऑयल मिल में लगी आग को बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड के जवानों को गांव के एक पोखरे से कीचड़ युक्त पानी तक लेना पड़ा था.

वर्जन

फायर हाइड्रेंट्स की शहर में अब कहीं उपलब्धता नहीं है. ऐसे में हमें पानी स्टोर करके रखना पड़ता है या इसके दूसरे साधन तलाशने होते हैं.

राकेश कुमार राय, सीएफओ वाराणसी

एक नजर

1890

में अंग्रेजी हुकूमत के समय डाली गई थी फायर हाइड्रेंट्स की लाइन

128

साल पुरानी लाइन वर्षो से पड़ी है बंद

300

से ज्यादा फायर हाइड्रेंट्स थे शहर में

264

हाइड्रेंट्स बाद में बचे

24

घंटे उपलब्ध होता था पानी

7

मीटर की दूरी तक का प्रेशर था अनिवार्य

70

से ज्यादा छोटे-बड़े वाहन वाराणसी फायर ब्रिगेड के पास