50 हजार से ज्‍यादा सैलरी चाहिए, तो इन पांच सेक्‍टर्स में हाथ आजमाइए

By: Inextlive | Publish Date: Wed 12-Apr-2017 06:04:05
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50 हजार से ज्‍यादा सैलरी चाहिए, तो इन पांच सेक्‍टर्स में हाथ आजमाइए
समय की मांग और रोजगार में हुए बदलाव के चलते नई नौकरियों के अवसर बढ़ रहे हैं। ये नई जॉब्‍स ऐसी हैं जो समय के अनुकूल हैं। आप इनसे जुड़ेंगे तो, न केवल जल्दी नौकरी मि‍लेगी बल्‍कि‍ सैलरी में इजाफा भी औरों के मुकाबले ज्‍यादा होगा। तो आइए जानते हैं इस समय किस तरह की नौकरियां युवाओं को कर रही हैं आकर्षित....


1. प्रोक्‍योरमेंट एंड सप्‍लाई चेन :
भारत में ई-कामर्स का बाजार जिस तेजी से बढ़ रहा है। वह दिन दूर नहीं जब लोग स्‍टोर सा मॉल जाने की बजाए ऑनलाइन सामान मंगाना आसान समझेंगे। हाल ही में खबर आई कि फ्लिपकार्ट ने ईबे को खरीद लिया है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में ई-कामर्स का बाजार में कब्‍जा होगा। ऐसे में इन कंपनियों को सामान भेजने, स्‍टोर करने या आर्डर ट्रांसपोर्टेशन के लिए कुछ लोगों की मदद चाहिए। अब ऐसे प्रोफेशनल्‍स की डिमांड बढ़ गई है जिनको ग्‍लोबल लाजिस्‍टिक्‍स में एक्‍सपीरियंस है। इसके लिए जरूरी शैक्षिक योग्‍यता एमबीए होती है और सैलरी 50 हजार प्रति महीने से शुरु होती है।


2. आई सेक्‍टर :
मोदी सरकार जिस तरह से डिजिटल इंडिया को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में आईटी सेक्‍टर में ढेर सारे मौके मिलने वाले हैं। नेटवर्क एंड कंप्‍यूटर सिस्‍टम एडमिनिस्‍ट्रेटर, डेटा एनालिसिस, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और इंफार्मेशन टेक्‍नोलॉजी से जुड़े लोगों के लिए नौकरी के अवसर खुलने वाले हैं। आपके पास साफ्टवेयर इंजीनियरिंग का डिप्‍लोमा होना चाहिए। अगर आप एक अच्‍छी कंपनी से जुड़ते हैं, तो सैलरी 50 हजार से शुरु होगी।


3. सोशल मीडिया मैनेजर :
जैसा कि आपको पता होगा कि सोशल मीडिया सिर्फ चैटिंग के लिए नहीं बल्‍िक मार्केटिंग या विज्ञापन का नया जरिया बन गया है। कंपनियां अपनी ब्रांड इमेज पर ज्‍यादा फोकस्‍ड होती है। ऐसे में अपने कस्‍टमर्स से सीधे जुड़ने के लिए उनके पास सोशल मीडिया के अलावा कोई दूसरा ऑप्‍शन नहीं है। बड़ी-बड़ी कंपनियां सोशल मीडिया पर अपनी अच्‍छी पैठ बनाने के लिए सोशल मीडिया मैनेजर हॉयर करती हैं। इसके लिए मॉस कम्‍यूनिकेशन या मार्केटिंग मे ग्रेजुएशन के साथ कंप्‍यूटर स्‍किल्‍स की जरूरत पड़ती है।


4. लीगल एडवाइजर :
कोई भी कंपनी छोटी हो या बड़ी, उसे एक लीगल एडवाइजर की जरूरत पड़ती है। बड़ी कंपनि‍यां अपनी लीगल टीम रखती हैं और जरूरत पड़ने पर बड़े वकीलों को हायर भी करती हैं। इसके अलावा ऐसी लीगल फर्म भी होती हैं जो एक साथ कई कंपनियों को सर्विस देती हैं। आजकल तो लीगल एडवाइजर के साथ-साथ सीए के कांबिनेशन का चलन भी बढ़ गया है।


5. फीजियोथेरैपी :
शहर के लोगों में हड्डि‍यों और मसल्‍स के रोग बढ़ रहे हैं। इसके अलावा कि‍सी बड़ी चोट अथवा सर्जरी से उबरने में भी फीजि‍योथैरेपी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में फीजियोथेरेपी सेंटर्स की बाढ़ सी आ गई है। जो लोग सेंटर्स नहीं आ पाते, वह घर पर इसकी सर्विस चाहते हैं। जिसका चार्ज भी काफी ज्‍यादा होता है। अगर आपने भी इससे संबंधित कोई कोर्स किया है। तो फीजियोथेरेपी सेक्‍टर में हाथ आजमा सकते हैं।

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