बंधक बनकर रह गए रंजीत व बबिता

By: Inextlive | Publish Date: Sat 29-Apr-2017 07:40:57
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बंधक बनकर रह गए रंजीत व बबिता

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सर्किट हाउस के कमरे में बीतता है पूरा दिन, कम लोगों से ही मिलने की इजाजत

नेता का दौरा होने या साक्ष्यों की पड़ताल के लिए जाते वक्त साथ ले जाती है पुलिस

ALLAHABAD: सर लगता है, हम ही गुनहगार हो गए हैं। एक कमरे में पूरा दिन बीतता है। किसी नेता- मंत्री का दौरान होता है या फिर घटना से जुड़े किसी साक्ष्य की पड़ताल की बात होती है तभी पुलिसवाले हमें यहां से लेकर निकलते हैं। परिवारवाले या गांव के लोगों से मिलना मुश्किल हो गया है। कोई मिलने आता है तो सुरक्षा गार्ड तमाम सवाल पूछते हैं। इस स्थिति में तो वक्त काटना मुश्किल हो गया है। हम भाई- बहन का ज्यादातर वक्त घटना का दृश्य याद करके आंसू बहाते हुए बीतता है। यह दर्द है सर्किट हाउस में रह रहे मक्खन लाल गुप्ता के बेटे रंजीत और बबिता का। शुक्रवार को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट से बात करते हुए वे फफक पड़े और पिछले दिनों हुई घटनाओं पर सिलसिलेवार चर्चा की.

कौन करता था टोटका

नवाबगंज के जुड़ापुर में रविवार की रात एक ही परिवार के चार लोगों के कत्ल के बाद पूरा गांव आज भी सन्नाटे में है। किसी बड़े नेता के आने पर यहां सन्नाटा टूटता है। बाकी समय पुलिस का मूवमेंट ही दिखता है। घटना के दिन घर पर मौजूद न होने के चलते जिंदा बच गए मक्खन लाल के बेटे रंजीत और बेटी बबिता को सुरक्षा कारणों से सर्किट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया है। रिपोर्टर से बात करते हुए रंजीत ने बताया कि अक्सर उनके छत पर गांव के ही कुछ लोग टोना टोटका किया करते थे। कभी लाल चुंदरी, तो पूजा पाठ की गई सामग्री छत पर फेंक दी जाती थी। इससे परिवार के लोग डरे सहमे रहते थे। इसकी चर्चा गांव में हुई तो पड़ोसियों का नाम सामने आया। हमारा परिवार तब भी खामोश रहा।

बहन का हाथ पकड़कर खींचा था

रंजीत ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि होली के दिन रात में अजय उनकी छत पर चढ़ आया था। उसने हर्षिता का हाथ पकड़कर खींच लिया था। तब इसकी सूचना डॉयल 100 को दी गई। पुलिस ने छानबीन की तो घटना सही मिली और अजय समेत तीन लोगों को पकड़ा गया। इससे पहले भी वह ऐसा कर चुका था। होली की घटना के बाद अजय छूटकर घर पहुंचा और सरेआम धमकी देने लगा तो मां की दिमागी हालत पर असर पड़ गया। पूरा परिवार हमेशा सन्नाटे में रहता था।

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पिता को मारा था चप्पल से

रोते हुए रंजीत ने बताया कि दो साल पूर्व बेवजह गांव के रहने वाले हरिशंकर यादव ने पिता को चप्पल से भरे बाजार में मारा था। उनके साथ अभद्रता भी की थी। इससे पिता को काफी आघात पहुंचा था। पूरा परिवार काफी सदमे में आ गया था। परिवार के लोग इस घटना को खून के आंसू पीकर रह गए थे। इस बात का गवाह गांव के पास पास के लोग थे। जिन्होंने इस घटना को देखा था। इतने के बाद यह घटना और अब तक बदले में मिला सिर्फ आश्वासन। हम आगे क्या करें समझ में नहीं आ रहा।

डिप्टी सीएम ने आश्वासन दिया है कि वह योग्यता को देखते हुए नौकरी दिलाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने एजुकेशन से जुड़े सार्टिफिकेट मांगा है।

रंजीत, मृतक का बेटा

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