अफसरशाही की जंग से ट्रैक पार करने की जंग

By: Inextlive | Publish Date: Tue 14-Nov-2017 07:00:35
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अफसरशाही की जंग से ट्रैक पार करने की जंग

- बरेली जंक्शन पर रेलवे प्रबंधन के दो रंग

BAREILLY:

बरेली जंक्शन प्रमुख स्टेशनों में से एक हैं जहां पर एस्केलेटर्स लगने हैं। डेढ़ वर्ष पहले एस्केलेटर्स के सारे सामान भी आ चुके हैं, लेकिन रेलवे प्रबंधन की लापरवाही के चलते यह नहीं लग सका। खुले आसमान में होने से पा‌र्ट्स गलने लगे हैं। एस्केलेटर्स की आड़ में गंदगी फैल रही है। सारी व्यवस्थाएं होने के बाद भी बीमार, दिव्यांग और बुजुर्ग एस्केलेटर्स की सुविधा नहीं मिल सकी। लिहाजा, सीढ़ी चढ़ पाने में असमर्थ यात्री जान जोखिम में डाल रेलवे लाइन को पार कर एक से दूसरे प्लेटफार्म आ- जा रहे हैं।

रंग - एक

85 वर्षीय रामप्यारी। नौचंदी एक्सप्रेस से जंक्शन के प्लेटफार्म नम्बर 2 पर अपने बेटे संग उतरी। रामप्यारी काफी परेशान दिखी। इधर- उधर देखने के बाद प्लेटफार्म पर ही बैठ बई। कुछ देर बाद सिर पर गट्ठर लिए उन्होंने सीढ़ी से चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन उनकी बूढ़ी हड्डियां जवाब दे गई। एक- दो पायदान चढ़ी ही थी कि उनकी सांसें फूलने लगी। आगे सीढ़ी चढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं और सीढ़ी से उतर आई। रामप्यारी कुछ देर प्लेटफार्म पर खड़ी रही। जब सांसें फूलनी बंद हुई तो दोबारा सीढ़ी पर चढ़ने से अपने बेट को साफ मना कर दिया। फिर, खुद ही प्लेटफार्म से नीचे उतर किसी तरह रेलवे लाइन क्रॉस किया। इस बीच अप- डाउन की कई ट्रेनें गुजरी।

जान जोखिम में डाल

यह दर्द सिर्फ रामप्यारी का ही नहीं है। बल्कि, जंक्शन पर आने वाले सैकड़ों बुजुर्ग और दिव्यांगों की यही कहानी है। जंक्शन पर रोजाना 200 ट्रेनें गुजरती हैं। जंक्शन से 30 हजार से अधिक यात्री रोजाना उतरते और ट्रेन पकड़ते हैं। इनमें काफी तादाद बुजुर्गो की होती है। बरेली में होने वाले उर्स पर देश भर से लाखों जायरीन आते हैं। हरिद्वार व कटरा वैष्णो देवी की यात्रा के लिए भी हजारों बुजुर्ग यात्री जंक्शन से जर्नी करते हैं, जो कि सीढ़ी चढ़ पाने में असमर्थ होते हैं। लिहाजा, जान जोखिम में डाल रेलवे लाइन पार कर रहे हैं।

रंग दो ::::::

रेल मंत्रालय की ओर से देश के ए प्लस व ए कटेगरी के सभी रेलवे स्टेशन पर एस्केलेटर्स लगाए जा रहे हैं। वहीं सी कटेगरी के स्टेशनों को भी इस सुविधा से जोड़े जाने की तैयारी है। ए प्लस में शामिल जंक्शन पर दो एस्केलेटर्स लगने का काम होना है। डेढ़ वर्ष पहले एस्केलेटर्स के सारे सामान भी आ चुके हैं, लेकिन फाइल हेड क्वॉर्टर में ही लटकी पड़ी हुई है। दो महीने पहले हेड क्वॉर्टर के अधिकारियों ने जंक्शन के इलेक्ट्रिसिटी सेक्शन के एसएसई एमपी शर्मा से मिले थे। उन्होंने दोनों फुट ओवरब्रिज पर एस्केलेटर्स लगाने के लिए लम्बाई- चौड़ाई का जायजा भी लिया था। दो महीने बीत जाने के बाद भी हेड क्वॉर्टर की ओर से दोबारा प्रयास नहीं किए गए।

खुले में पड़े होने से लग रहा जंग

एस्केलेटर्स लगाने के लिए जो भी सामान मंगाये गये हैं, वह खुले आसमान के नीचे पड़े हुए हैं। पहले बारिश और ठंड में गिर रहे ओस की वजह से एस्केलेटर्स में पूरी तरह से जंग लग चुका हैं। यात्रियों ने पान, गुटखे की पीक थूक- थूक कर एस्केलेटर्स के कलर ही रेड कर दिया है। यदि एक बार इसे लगाने की कवायद भी की गई तो उसकी साफ- सफाई में रेलवे को रुपए खर्च करने पड़ेंगे।

दो महीने पहले हेड क्वॉर्टर से लोग आए थे। उन्होंने कितनी लम्बाई- चौड़ाई लगाए जाने का काम होना हैं यहां

एमपी शर्मा, एसएसई, इलेक्ट्रिसिटी, जंक्शन

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