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पुलिस की नाक के नीचे रोज सजता है सट्टे का कारोबार

कार्रवाई न होने से सटोरियों के हौसले हैं बुलंद, रोज लाखों के वारे न्यारे

ajeet.singh@inext.co.in

ALLAHABAD: नंबर का गेम है. यहां हर घंटे किसी की किस्मत बनती बिगड़ती है. कोई लाखों लेकर जाता है और तो कोई अपना सबकुछ लुटाकर. न कोई कागज इस्तेमाल होता है और न ही किसी को यह पता चलता कि 'नंबर गेम' खेल का असली मास्टर माइंड कौन है. भरोसा इतना जबरदस्त है कि यहां पैसा लगाने वाले अपनी पूंजी आंख बंद करके दे जाते हैं. एजेंट भी इतने इमानदार कि सिर्फ अपने कमीशन से मतलब रखते हैं. बाकी पूरा पैसा विजेता के हवाले. पैसा बोरियों में भरकर आता-जाता है. भीड़भाड़ वाली सड़क के किनारे सट्टे का यह काला कारोबार चलता है और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है.

दस नंबरों पर लाखों का दांव

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट इस धंधे की एबीसीडी जानने के लिए कॉमन मैन की तरह इसका हिस्सा बना. रेलवे हॉस्पिटल से चंद कदम आगे यह काला कारोबार हर दिन सजता है. वह भी सड़क के किनारे. सिविल लाइंस थाने से यहां की दूरी बमुश्किल डेढ़ सौ मीटर होगी. यहां सुबह से ही भीड़ लग जाती है. इसमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल होते हैं. दांव लगाने वालों को मौका देने के लिए काउंटर्स सजते हैं. चाय की दुकान से लगे चलने वाले इस धंधे में सट्टेबाज अपनी दुकान सजाते हैं सिर्फ एक रजिस्टर पर. पब्लिक के पास आप्शन होता है एक से दस नंबर के बीच कोई एक नंबर सेलेक्ट करने का. हर नंबर का रेट अलग है. किसी अंक पर दांव लगाने का रेट एक रुपए है तो किसी पर सौ रुपए. लक साथ देने पर मिलना सभी को दस गुना है.

जीत पर एजेंट का 25 फीसदी हिस्सा

इस खेल में अलग-अलग नम्बर लगाने पर एक रुपये के बदले 10 रुपये व 12 रुपये के बदले 100 रुपये मिलते हैं. हर जीत पर रकम का पच्चीस फीसदी हिस्सा एजेन्ट का फिक्स है. आई नेक्स्ट की पड़ताल में पता चला कि हार पर भी एजेंट को एक निश्चित धनराशि मिलना तय है. बताया जा रहा है कि यहां सट्टे के काले कारोबार में रूपये का लेन-देन पूरी ईमानदारी से किया जाता है. वाल्मिकी चौराहे पर सट्टे की रोजाना लगने वाली मंडी में हर एज ग्रुप के लोगों को देखा जा सकता है. इसमें युवा वर्ग से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति भी शामिल हैं.

गिरोह डिग्गी में भरकर लाते हैं रुपये

यहां रोजाना लाखों रुपए का वारा न्यारा होता है. गिरोह के सदस्य अपने वाहनो की डिग्गी में नोटों का बंडल रखते हैं. एक युवक नम्बर नोट करता रहता है. दोनों के बीच इतना डिस्टेंस होता है कि आम जाने वाले को दोनों के बीच का रिश्ता कभी पता ही न चले. हर घंटे एक लकी नंबर डिक्लेयर किया जाता है. लकी नंबर के आधार पर जीतने वाले शख्स को मौके पर ही पेमेंट कर दिया जाता है. ऐसा नहीं है कि सटोरियों का यह खेल सिर्फ सिविल लाइन एरिया में ही चल रहा है. शहर में भी इनका जाल बड़े पैमाने पर फैला हुआ है.

सख्त प्रावधान, कार्रवाई जीरो

गौरतलब है कि सटोरियों पर कार्रवाई का सख्त प्रावधान भारतीय दंड संहिता में किया गया है. बावजूद इसके सिटी में इस तरह के गिरोह के लोगों के खिलाफ कार्रवाई आलमोस्ट जीरो है. पकड़े जाने पर बाद में उन्हें या तो ले-देकर अथवा जुए में चालान करने का कोरम पूरा कर दिया जाता है. जुए में सजा का प्रावधान इतना कम है कि चालान होने पर भी थाने से ही जमानत मिल जाती है और वे फिर से अपने धंधे पर लग जाते हैं.

लाटरी का तर्ज पर सट्टा

नंबर गेम लॉटरी की तर्ज पर खेला जाता है

नंबर गेम में सिर्फ एक नंबर पर दस गुना तक राशि निकालने का होता है ऑफर

हर घंटे जारी होता है एक लकी नंबर

विजेता को आन द स्पॉट किया जाता है पेमेंट

विजेता से 25 परसेंट कमीशन मिलता है एजेंट को

कोई भी एमाउंट लगा सकता है दांव खेलने वाला

नंबर गेम में प्रिंटेड कॉगज का इस्तेमाल नहीं होता

सब कुछ रजिस्टर पर कोड वर्ड से चलता है

इसकी जानकारी मुझे नहीं है. क्षेत्र में सट्टा या जुआ चल रहा है तो उसे किसी भी सूरत में बंद कराया जाएगा. मैं खुद इसे चेक करुंगा और सही है तो कार्रवाई भी जरूर होगी.

-मनोज कुमार तिवारी,

इंस्पेक्टर सिविल लाइन