- उन्नाव कांड में रेप पीडि़ता के पिता की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

- उन्नाव विधायक के भाई और समर्थकों पर मारपीट का है आरोप

- रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर पीडि़ता ने किया था आत्मदाह का प्रयास

योगी बोले, होगी सख्त कार्रवाई
सोमवार दोपहर मुख्यमंत्री के मिलने एनेक्सी पहुंचे आरोपी विधायक सीएम योगी से मुलाकात नहीं हो पाई. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर जारी अपने बयान में कहा कि हमारी सरकार ने पहले ही कहा है कि ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. कल ही इस मामले में एडीजी लखनऊ को जांच करने के निर्देश दिए गये थे. इस प्रकरण में जो भी दोषी है, अगर पुलिस की लापरवाही कहीं पर है तो ऐसे दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गये है. इस प्रकरण में जो भी दोषी होगा, चाहे वो कोई हो, पहले की कह दिया गया है कि उसे बख्शा नहीं जाएगा. सरकार और कानून इस मामले में किसी भी दोषी के साथ कोई रियायत नहीं करेगी.

आईजी करेंगे पूरे प्रकरण की जांच
वहीं दूसरी ओर उन्नाव प्रकरण में तीन जांचें शुरू हो चुकी हैं. पहली जांच एडीजी लखनऊ जोन को सौंपी गयी है जो विधायक पर लगे रेप के आरोपों की जांच करेंगे. दूसरी जांच डीजीपी के निर्देश पर आईजी लखनऊ सुजीत पांडे को दी गयी है. वह बीते एक साल के दौरान हुए इस मामले के पूरे घटनाक्रम और पुलिस जांच में लापरवाही की पड़ताल करेंगे. सुजीत पांडे को उन्नाव भेजा जा चुका है. इसके अलावा लखनऊ के एएसपी क्राइम दिनेश सिंह को दोनों एफआईआर की विवेचना का जिम्मा सौंपा गया है. वहीं दूसरी ओर रेप पीडि़ता के पिता की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की ज्यूडिशियल इंक्वायरी के आदेश भी जारी कर दिए गये हैं.

इन्हें किया गया निलंबित
थानाध्यक्ष माखी अशोक कुमार सिंह, सब इंस्पेक्टर कामता प्रसाद सिंह, मुख्य आरक्षी राजाराम शुक्ला, आरक्षी लक्ष्य कुमार शुक्ला, आरक्षी अशोक सेन, आरक्षी मोहित कुमार.

टाइम लाइन

- 20 जून 2017 को पीडि़ता ने चार युवकों पर रेप का दर्ज कराया था मुकदमा

-12 फरवरी 2018 को विधायक के खिलाफ केस न दर्ज होने पर कोर्ट की शरण ली

- 2 अप्रैल 2018 को पीडि़ता के पिता को विधायक के भाई और समर्थकों ने पीटा

- 8 अप्रैल को पीडि़ता ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का किया प्रयास

- 9 अप्रैल को पीडि़ता के पिता की उन्नाव जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत

अखिलेश ने मांगा योगी का इस्तीफा
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रेप पीडि़ता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि इस तरह की शर्मनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री को एक पल भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है. इस मामले में सत्तारूढ़ दल के विधायक पर सीधा आरोप है. महिलाओं के मान की रक्षा के लिये नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बच्चियों से बलात्कार की घटनाओं की बाढ़ आ गयी है. उन्नाव की बेटी के साथ बलात्कार की बात कोई सुनने वाला नहीं है. पीडि़ता ने लखनऊ आकर मुख्यमंत्री का दरवाजा खटखटाया, लेकिन न्याय नहीं मिला.

नहीं मिल रहा लोगों को न्याय
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि एक बच्ची अपना दुखड़ा कहने आई थी. सत्ता में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने उसे भगा दिया. उसने अपने ऊपर तेल छिड़क कर आत्महत्या की कोशिश की, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई. उसके पिता की पुलिस प्रताड़ना से जेल में मृत्यु हो गयी. दोषियों पर सत्ता के दबाव की वजह से कार्रवाई नहीं हो रही है. आज लोग दहशत में हैं, उन्हें न्याय भी नहीं मिल पा रहा है. आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय दमनकारी माहौल बनाया जा रहा है.