समझें, ऐसे लगता है ब्‍याज की रकम पर इनकम टैक्‍स
मौजूदा इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक, किसी भी बैंक अकाउंट होल्डर्स को 10 हजार रुपये से ज्यादा ब्याज पर इनकम टैक्स चुकाना होता है। 10 हजार रुपये का कैलकुलेशन उसके सभी तरह के अकाउंट्स पर मिलने वाले ब्याज राशि को जोड़कर किया जाता है। यानी अगर किसी व्यक्ति का बैंक में सेविंग अकाउंट, एफडी, आरडी जैसे अलग अकाउंट है, तो ब्याज का कैलकुलेशन सभी अकाउंट पर मिले ब्याज का टोटल कर किया जाता है। अगर फाइनेंशियल ईयर में यह राशि 10 हजार रुपये से ज्यादा होती है तो एक्स्ट्रा राशि को अकाउंट होल्डर्स की इनकम माना जाता है। सूत्रों के अनुसार फरवरी में पेश होने वाले बजट में सरकार इस लिमिट को बढ़ा सकती हैं।
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मौजूदा हालात में आसानी से बन जाती है टैक्‍स की देनदारी
मौजूदा प्रावधान के अनुसार, अगर अभी कोई व्यक्ति बैंक 1.61 लाख रुपये की भी एफडी एक साल के लिए करता है, तो उस पर 10 हजार रुपये से ज्यादा का ब्याज बन जाता है। ऐसे में उस पर इनकम टैक्स की देनदारी बनती है। आम तौर मिडिल क्लास फैमिली में किसी भी अकाउंट होल्डर्स के पास सेविंग अकाउंट के साथ-साथ एक-दो लाख रुपये की एफडी होती ही है, जिससे उस पर आसानी से टैक्स देनदारी बन जाती है।
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