यूनिवर्सिटी में अब भी लागू नहीं जीएसटी

By: Inextlive | Publish Date: Fri 14-Jul-2017 07:41:12
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यूनिवर्सिटी में अब भी लागू नहीं जीएसटी

- कॉमर्स स्टूडेंट्स अब भी पढ़ेंगे वैट- सर्विस टैक्स

- सिलेबस में शामिल ही नहीं किया गया है जीएसटी

आगरा। विवि स्टूडेंट्स जीएसटी पढ़ने से महरूम रहेंगे। सिलेबस में इस बार जीएसटी को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में स्टूडेंट्स पुरानी टैक्स प्रणाली को पढ़ने के लिए मजबूर होंगे। हालांकि शिक्षक अपने स्तर से स्टूडेंट्स को जीएसटी की जानकारी देने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन बिना किसी बुक्स के ये कितना मुमकिन हो सकेगा इस पर संदेह है.

एग्जाम में आ सकते हैं क्वेश्चंस

आगरा कॉजेज में इकोनॉमिक्स की एक्सपर्ट डॉ। जयश्री भारद्धाज ने बताया कि स्टूडेंट्स के लिए इस सत्र से जीएसटी की पढ़ाई जरूरी है। इस बार एग्जाम में निश्चित रूप से जीएसटी पर प्रश्न आ सकते हैं। इसके लिए स्टूडेंट्स को तैयार रहने की आवश्यकता है। यदि बुक में इस पर चर्चा नहीं की गई है, तो क्लास में मौखिक ही स्टूडेंट्स को जीएसटी के विषय में जानकारी दी जाएगी।

मैगजीन का लेना पड़ेगा सहारा

नए टैक्स को लेकर स्टूडेंट्स असमंजस की स्थिति में है। एक्सपर्ट डॉ। एसके चौहान ने बताया कि स्टूडेंट्स इसके लिए मैगजीन, न्यूज पेपर या अन्य बुक्स से हेल्प ले सकते हैं। डीयू (दिल्ली यूनिवर्सिटी) साथ ही दूसरी यूनिर्वसिटी में जीएसटी का सिलेबस अपडेट कर दिया गया है। जब स्टूडेंट्स को पूरी तरह से इसकी जानकारी रहेगी, तो एग्जाम में किसी तरह की समस्या नहीं आएगी।

पहले टैक्स रेट रिवाइज

बीकॉम फाइनल ईयर और एमकॉम फाइनल में पढ़ाए जा रहे इनडायरेक्ट टैक्स यूनिट अब आउटडेटेड हो चुके हैं। इनमें वैट, सीएसटी, एक्साइज डयूटी को यूनिटवार समझाया गया है। इसकी जगह अब जीएसटी ने ली है। हैरानी वाली बात ये है कि टैक्स खत्म होने के बाद भी स्टूडेंट्स को इनकी पढ़ाई करनी होगी। इसी के अधार पर उनका मूल्यांकन होगा.

दो लाख स्टूडेंट्स होंगे प्रभावित

डॉ। भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी से अटैच कॉलेजों में कॉमर्स स्टूडेंट्स की संख्या करीब दो लाख रुपये है। जो जीएसटी के सिलेबस में शामिल नहीं होने के चलते सबसे अधिक प्रभावित होंगे। ऐसे में कामर्स के स्टूडेंट़्स को उन करों को पढ़ाया जाएगा, जो अब अस्तित्व में ही नहीं है। परीक्षा भी इसी सिलेबस पर कराने की उम्मीद है। एकाउंटस ऑफ लॉ, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के सब्जेक्ट विशेषज्ञों को कहना है कि जीएसटी के बिना आज कॉमर्स स्ट्रीम की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। लेकिन इसके बाद भी शिक्षा सत्र 2017- 2018 में इसे शामिल नहीं किया गया।

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