यहां तो हिन्दी की 'बिंदी' ही गलत

By: Inextlive | Publish Date: Thu 14-Sep-2017 07:40:49
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यहां तो हिन्दी की 'बिंदी' ही गलत

14 सितंबर यानि आज शहरवासी हिन्दी दिवस मनाएंगे। जिले के विभागों में हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाएं भी विचार गोष्ठी या अन्य कार्यक्रम के जरिए लोगों में हिन्दी के प्रयोग का पुरजोर समर्थन करेंगी, लेकिन वर्तमान समय में हिन्दी की कैसी दुर्दशा सरकारी कार्यालय कर रहे हैं इसकी बानगी दैनिक जागरण आईनेक्स्ट आपको दिखाने जा रहा है। चौराहे हों या कॉलोनी के नाम हर जगह हिन्दी की 'बिंदी' का अशुद्ध प्रयोग दिखा.

BAREILLY:

हिन्दी को हो गया 'डैंगू'

कहते हैं कि सिर का पसीना पांव तक पहुंच जाए, तब कहीं डॉक्टर की डिग्री मिलती है, लेकिन ऐसी डिग्री का क्या फायदा जब राष्ट्रभाषा का ज्ञान न हो। जिला अस्पताल में मच्छर जनित रोग 'डेंगू' को 'डैंगू' लिखकर डॉक्टर्स और स्टाफ ने राष्ट्रभाषा के प्रति ज्ञान का परिचय दे दिया है।

पीडब्ल्यूडी ने बनाई 'कालौनी'

निर्माणदायी संस्था पीडब्ल्यूडी हिन्दी के विकास में कई कदम पीछे है। चौकी चौराहा रोड से सटकर पीडब्ल्यूडी ने कॉलोनी बनाई, लेकिन उसका नामकरण 'कालौनी' कर हिन्दी के प्रति अपनी जिम्मेदारी जाहिर कर दी है। जेई, एई, एक्सईएन समेत एसई अन्य अधिकारी कितने सजग, सतर्क और जागरूक हैं यह 'कालौनी' उनकी पोल खोल रही है.

जब शपथ में ही गलती है तो

नगर निगम में प्रत्येक शनिवार अधिकारी और कर्मचारी स्वच्छता की शपथ लेते हैं। हिन्दी में लिखी गई शपथ एक बोर्ड पर अंकित है। इस बोर्ड के करीब सौ शब्दों में तमाम गलतियां दर्ज है। सवाल उठता है कि जब शपथ में ही गलती है तो सफाई क्या कर रहे होंगे? शिकायत पर निगम ने बोर्ड में 'स्वच्छाता' को स्वच्छता कर दिया लेकिन पूरे बोर्ड पर निगाह नहीं डाली। इसमें आजादी को 'आजाददी', स्वच्छता को 'स्वछता', दुनिया को 'दूनिया' लिखकर अपनी वर्तनी की जानकारी दे रहे हैं।

यहां भी है अशुद्धियां

पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की ओर से चौराहे व डिवाइडर्स पर लगाए गए साइन बोर्ड में ज्यादातर बो‌र्ड्स में हिन्दी का अशुद्ध प्रयोग है। चौकी चौराहा के डिवाइडर पर बदायूं को बदायू, तो चौपुला चौराहे पर कुतुबखाना को कुत्तव खाना लिखा गया है। इसी तरह शहर भर में कई दुकानों पर लगाए गए पहचान बोर्ड में भी हिन्दी की बिंदी को कहीं का कहीं कर दिया गया है, जो कि सरकारी कार्यालयों की कारगुजारी समेत हिन्दुस्तानियों में भी हिन्दी के प्रति किस कदर जागरुकता है इसका परिचय कराते हुए शर्मसार कर रहे हैं।

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