सोनपुर मेले में ट्रैक पर दौड़ते घोड़ों को नहीं देखा, तो कुछ नहीं देखा

By: Inextlive | Publish Date: Tue 14-Nov-2017 05:25:04   |  Modified Date: Tue 14-Nov-2017 05:28:19
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सोनपुर मेले में ट्रैक पर दौड़ते घोड़ों को नहीं देखा, तो कुछ नहीं देखा
सोनपुर मेले में चित्रों के माध्यम से बताया जा रहा रेलवे का इतिहास।

HAZIPUR/PATNA: देश की अखंडता में अपनी भूमिका निभा रही भारतीय रेल हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले में अपनी यात्रा के शुरुआती दौर की प्रदर्शनी लगाई है. माध्यम है मेले की हृदयस्थली नखास में स्थित पूर्व मध्य रेल की रेल ग्राम प्रदर्शनी. इस प्रदर्शनी में एक तरफ जहां सिग्नल सुरक्षा, संरक्षा मेडिकल, वाणिज्य और यांत्रिक, इंजीनियरिंग विभाग की प्रदर्शनी लगी है, वहीं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मेला देखने पहुंच रहे लोगों को मानव रहित फाटकों को पार करने में सावधानी बरतने के लिए अवेयर किया जा रहा है.

 

स्वच्छता का रखें ध्यान

स्वच्छता मिशन को सफल बनाने के लिए न केवल अपने घर और उसके आसपास बल्कि रेल परिसर में भी स्वच्छता का ध्यान रखा जाना चाहिए. बिना टिकट यात्रा अपराध है. इन सभी बातों को कहीं चित्र तो कहीं नाटक के माध्यम से बताया जा रहा है. 18वीं शताब्‍दी में विज्ञान इतना विकसित नहीं था तब रेल ने कैसे अपनी दुर्गम यात्रा के दौरान देश की सेवा की, इसे इन चित्रों में दिखाया गया है.

 

घोड़ों से खींचा गया बोगी

कहीं कोयला लदी बोगी को घोड़ों से, तो कहीं बैलों और हाथी के माध्यम से पटरियों पर माल लदी बोगी को खींचा गया. इसकी प्रदर्शनी आकर्षित कर रही है. सीमित संसाधनों से ही रेलवे ने अपनी सेवाएं शुरू की. इसी प्रदर्शनी हॉल में आजादी के पहले 1927 में सोनपुर स्टेशन की रूपरेखा क्या थी, उसका दुर्लभ चित्र लगाया गया है. स्टेशन पर खड़े छोटे-छोटे इंजन और उस जमाने की बोगियों में कैसे लोग चढ़ रहे हैं, उसे दिखाया गया है. इसी के सामने लगी है स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी की रेलयात्रा का चित्र. पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ राजेंद्र प्रसाद सहित अनेक बड़ी हस्तियों को भी रेल से यात्रा करते दिखाया गया है. इसमें रेल की छोटे इंजनों से लेकर स्टीम इंजन की गाथाओं को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है. इस प्रदर्शनी के समीप ही है दार्जि¨लग तथा ऊटी की टॉय ट्रेन की याद दिलाता टॉय ट्रेन से सफर का आनंद.