PATNA: भारतीय वेटलिफ्टर सतीश शिवलिंगम ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया. ऐसे ही कई वेटलिफ्टर हैं जो बेहतर प्रर्दशन कर रहे हैं. लेकिन राजधानी पटना में ऐसे वेटलिफ्टर मिलना मुश्किल है क्योंकि यहां इसके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं खिलाड़ी को नहीं मिल रही है. यहां वेटलिफ्टर बनने की तमन्ना रखने वाले बहुत खिलाड़ी है लेकिन सरकार का उदासीन रवैया इन खिलाडि़यों को मैदान में उतरने से पहले ही हरा देता है. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने पटना में वेटलिफ्टिंग को लेक र जब पड़ताल शुरू की तो सरकार की उपेक्षा साफ नजर आई.

खराब हो गए इक्विपमेंट

पटना में वेटलिफ्टिंग से जुडे़ खिलाडि़यों का कहना है कि वेटलिफ्टिंग के लिए इक्विपमेंट महंगा आता है. कोच की देखरेख में ही इसका अभ्यास करना उचित नहीं है. इसे लेकर सरकार ने हमेशा खानापूर्ति ही की है. सरकार ने करीब 12 साल पहले वेटलिफ्टिंग सहित अन्य इनडोर गेम्स के लिए सामग्री खरीदी थी लेकिन इसका कभी प्रयोग नहीं किया गया. अब तो ये पूरी तरह से खराब चुकी है.

प्रैक्टिस के लिए नहीं है स्पेस

बिहार वेटलिफ्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार केशरी ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से वेटलिफ्टिंग के लिए सामान की खरीद की गई थी. लेकिन अभ्यास नहीं हो पा रहा है क्योंकि स्पेस की कमी है. इसके अलावा नियमित रूप से यहां प्रतियोगिता भी नहीं होती है जिसके कारण खिलाडि़यों को इस खेल में कद बढ़ाने का अवसर ही नहीं मिलता.

खो-खो एसोसिएशन में चलता है ऑफिस

पटना में वेटलिफ्टिंग की दुर्दशा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसोसिएशन के पास अपना एक ऑफिस तक नहीं है. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि पाटलिपुत्र स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स में खो-खो एसोसिएशन के कमरे में इसका ऑफिस है. एसोसिएशन के प्रेसीडेंट ने बताया कि खेल विभाग के प्रधान सचिव के तौर पर आनंद किशोर के कार्यकाल में दस कमरों में से सात एसोसिएशन को ऑफिस एलॉट किया गया. लेकिन वेटलिफ्टर्स एसोसिएशन को जगह नहीं दी गई. यह उपेक्षा नहीं तो और क्या है?

नहीं है एक भी कोच

यहां वेटलिफ्टिंग के लिए एक भी कोच नहीं है जिनकी देखरेख में पुख्ता तैयारी की जाए. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट को एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि यहां कोच की समस्या है. एसोसिएशन के प्रमुख के तौर पर मैंने प्रयास किया लेकिन अंतत: निराशा हाथ लगी. झारखंड के कोच राजेंद्र प्रसाद को कोच बनाने के लिए बात की गई. लेकिन सरकार ने उन्हें एकलव्य सेंटर, सीतामढ़ी में कोच के तौर पर नियुक्त कर दिया. इस प्रकार एसोसिएशन को कोच नहीं मिल सका.