ऐसे इस्‍तेमाल होता है डाटा
वहीं गूगल ड्राइव और वाहट्सऐप 50 प्रतिशत बैकग्राउंड डाटा यूसेज लेते हैं। गूगल हैंगआउट पर करीब 39 प्रतिशत बैकग्राउंड डाटा जाता है। अब सवाल ये उठता है कि ये बैकग्राउंड डाटा यूसेज एक समस्‍या क्‍यों है। दरअसल ये बैकग्राउंड डाटा कुल मिलाकर पूरी तरह से इंटरनेट ट्रैफिक है। ये तब इकट्ठा हो जाता है जब आप ईमेल सिंक्रनाइज़, विज्ञापन, समाचार लेख या फ़ीड से जुड़े ऐप का असल में इस्‍तेमाल नहीं करते हैं। इतना ही नहीं आप तो इनको पढ़ते भी नहीं है।  

ऐसा बताते हैं अधिकारी
ओपेरा सॉफ्टवेयर के उत्पाद प्रबंधक सेर्गेई लोसेव का कहना है कि कई ऐप्‍स जबरदस्‍त यूज़र एक्‍सपीरियंस देने के लिए बनाए गए हैं, न कि सिर्फ उनका डाटा सेव करने के लिए। आप अगर इस बैकग्राउंड डाटा को वापस बिना इस्‍तेमाल करे संभाल कर रखते हैं तो ये आपके लिए अपने डाटा प्‍लान की बर्बादी करना होगा।

इतना डाटा तो यूं ही कर देते हैं बर्बाद
उनका मानना है कि ये ठीक उसी तरह है कि आप अपने 3 डॉलर मोबाइल डाटा प्‍लान में से 1 डॉलर को ऐसे ही बाहर फेंक रहे हों। वह यह भी बताते हैं कई लोग तो अपने बैकग्रांउड डाटा को हटाने के बारे में सोचते ही नहीं हैं और कुछ इसके लिए ऑथराइज्‍ड नहीं हैं, न ही तो वो ये जानते हैं कि इसको ऐसा होने से कैसे रोका जाए।

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