LUCKNOW: विभूतिखंड वेब माल के पीछे बेहननपुरवा स्थित झोपड़ पट्टी में रविवार दोपहर अचानक अवैध रिफलिंग से आग लग गई. अग्निकांड से एक झोपड़ी में सो रहे चार साल के मासूम की झुलसकर मौत हो गई. आग की लपटों में गिरकर मानसिक रूप से बीमार सायरा भी बुरी तरह झुलस गई. अग्निकांड के दौरान गैस का सिलेंडर फट गया और उसके परखच्चे झोपडि़यों में जा गिरे. जिसके बाद आग ने विकराल रूप धारण कर लिया. सूचना पर पहुंची तीन फायर स्टेशन की आधा दर्जन फायर ब्रिगेड की गाडि़यां ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया. भीषण आग की वजह से फायर कर्मियों को आग बुझाने के लिए वेब माल से पानी की मदद लेनी पड़ी. करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका. आग से तीस झोपडि़यां जलकर राख हो गई. हादसे से गुस्साए बस्ती वालों ने मुआवजा, अवैध गैस रिफलिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए राम मनोहर लोहिया गेट पर जाम लगा दिया.

फल फूल रहा था अवैध गैस रिफलिंग का धंधा

विभूतिखंड में वेब माल के पीछे एक मैदान में अस्थाई रूप से बनी करीब 40 झोपडि़यों में दर्जनों लोग अपने परिवार के साथ रहते थे. बस्ती के सामने बिल्लू का मकान है. इस मकान में एक दुकान को धर्मवीर ने किराए पर ले रखा था. वह दुकान में छोटा गैस सिलेंडर और चूल्हा बेचता था. इसके साथ ही उसने बस्ती में एक झोपड़ी भी बना रखी थी. जिसमें वह अवैध रूप से बड़े गैस सिलेंडर से छोटे गैस सिलेंडर तैयार करता था.


धमाके के साथ फटा गैस सिलेंडर

बस्ती में रहने वालों के अनुसार दोपहर में धर्मवीर अपनी दुकान से हटकर झोपड़ी में अवैध रूप से गैस रिफलिंग कर रहा था. इसी बीच वह दुकान की तरफ आया कि झोपड़ी में एक धमाका हुआ. झोपड़ी से उठी चिंगारियां अन्य झोपड़ी तक पहुंच गई. पड़ोस में रक्कू की झोपड़ी से लपटें उठने लगी. आग ने आस पास की झोपडि़यों को अपनी आगोश में ले लिया. लोगों ने लपटों पर पानी फेंककर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो सके. आग की सूचना पर वेब चौकी इंचार्ज भी मौके पर पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश शुरू कर दी.


बच्चों को छोड़कर गए थे काम पर

धर्मवीर की झोपड़ी के बगल में रक्कू और उसकी पत्नी मुन्ना व बेटा सनी रहते हैं. पास में मुन्ना की बहन मनीषा अपने पति मुकेश, बेटा देव और दुधमुंही बच्ची निशा के साथ रहती है. मुकेश राजगीर मिस्त्री है जबकि मनीषा चौका बर्तन करती है. रविवार को रोज की तरह मनीषा अपने बेटे देव और बेटी निशा को मुन्ना की झोपड़ी में छोड़कर चौका बर्तन करने चली गई. इसी बीच धर्मवीर की झोपड़ी में आग लगी और मुन्ना की झोपड़ी तक लपटें पहुंच गई.


तख्त पर सो रहे बच्चे की झुलसकर मौत

झोपड़ी में मुन्ना का बेटा सनी, मनीषा का बेटा देव व बेटी निशा थे. झोपडि़यों में आग लगते ही भगदड़ मच गई. सनी और निशा झोपड़ी से बाहर निकल आए जबकि देव तख्त पर सो रहा था. बस्ती में अफरा-तफरी का माहौल था. हर कोई अपनी झोपड़ी बचाने की जुगत लगा रहा था. इसी बीच मनीषा ने देव को तलाश करना शुरू किया. पड़ताल में सामने आया कि देव तख्त पर सो रहा था. वे लोग जली हुई झोपड़ी पर पहुंचे तो देखा कि देव का जला हुआ शव पड़ा था. इसके अलावा आग की लपटों में गिरकर मानसिक रूप से बीमार सायरा भी बुरी तरह झुलस गई. आग की चपेट में आने वालों को इलाज के लिए लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया.

पुलिस पर लगाया संरक्षण का आरोप

गैस रिफलिंग के दौरान आग लगने से झुग्गी झोपडि़यों में रहने वाले लोगों ने बच्चे की मौत पर आक्रोश जताते हुए लोहिया अस्पताल के पास जमा लगा दिया. उनका आरोप है कि स्थानीय पुलिस की शह पर अवैध गैस रिफलिंग का धंधा चल रहा था.

चार लाख का मुआवजा देगा प्रशासन

सरकार ने हादसे में बच्चे की मौत का संज्ञान लेते हुए लखनऊ जिला प्रशासन को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मृतक बच्चे के परिजनों को देने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा हादसे में प्रभावित पीडि़तों की समुचित देखरेख, राहत और चिकित्सा व्यवस्था के भी निर्देश दिए हैं.