देश की हिफाजत को उत्तराखंड का लाल शहीद

By: Inextlive | Publish Date: Wed 14-Feb-2018 07:00:11
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- सुंजवां आर्मी कैंप पर हुए हमले में उत्तराखंड का लाल राकेश रतूड़ी शहीद

- हरिद्वार में आज सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा अंतिम संस्कार

>DEHRADUN: देश की हिफाजत के लिए उत्तराखंड के एक और लाल ने अपनी शहादत दी है। जेएंडके के सुंजवां आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले में दून के बड़ोवाला निवासी 6 महार रेजीमेंट के हवलदार राकेश चंद्र रतूड़ी शहीद हो गए। वह अपने पीछे पत्नी नंदा देवी और दो बच्चों नितिन और किरण को छोड़ गए हैं। जिनका रो- रो कर बुरा हाल है। शहीद का पार्थिव शरीर ट्यूजडे देर शाम दून पहुंचा। लेकिन खबर सुनने के बाद बड़ोवाला स्थित उनके आवास पर दिनभर लोगों का जमावड़ा लगा रहा। आज सैन्य सम्मान के साथ शहीद राकेश चंद्र रतूड़ी का अंतिम संस्कार हरिद्वार में किया जाएगा.

एनएसजी में रह चुके कमांडो

कुछ दिन पहले जम्मू कश्मीर के सुंजवां में फिदायीन हमला हुआ था। इस दौरान आतंकियों से लोहा लेते हुए 44 वर्षीय हवलदार राकेश चंद्र रतूड़ी शहीद हो गए। उनके शहीद होने की सूचना मिलते ही कृष्णा विहार, बड़ोवाला स्थित उनके आवास पर कोहराम मच गया। शहीद का परिवार मूलरूप से पौड़ी गढ़वाल के पाबौ ब्लॉक की पट्टी बाली कंडारस्यूं स्थित ग्राम सांकर सैंण का रहने वाला है। करीब सालभर पहले ही उन्होंने दून में घर बनाया था। उनके चाचा शेखरानंद रतूड़ी के मुताबिक राकेश का ट्रांसफर लद्दाख हो गया था, लेकिन अभी उनकी रेजीमेंट ने उन्हें रिलीव नहीं किया था। उनका कहना है कि वे एनएसजी में भी कमांडो रह चुके थे। जबकि शहीद के पिता महेशानंद रतूड़ी भी नौसेना से रिटायर थे। लेकिन दो साल पहले लंबी बीमारी के चलते उनका देहांत हो गया। शहीद राकेश चंद रतूड़ी की शहादत पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार शहीद के परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी.

अगले साल होना था रिटायरमेंट

शहीद राकेश चंद्र रतूड़ी के भाई रेवती नंदन के अनुसार वे 1996 में फौज में भर्ती हुए थे। वह जनवरी माह में कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर आए थे। परिजनों ने बताया कि मंडे रात को उनकी शहादत की खबर मिली तो परिवारों का रो- रो कर बुरा हाल है। शहीद का बेटा नितिन एसजीआरआर, पटेलनगर में पढ़ता है, जबकि बेटी किरण बीए की छात्रा है। परिजनों के मुताबिक शहीद की रेजीमेंट लद्दाख तैनात हो गई थी। लेकिन उन्हें रिलीव नहीं किया था। सेना में एक साल की सेवा और करने के बाद उन्हें 2019 रिटायर होना था।

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