400 ग्राम की इस 'नन्ही परी' को बचाने के लिए एक डॉक्टर 7 महीने तक जुटा रहा जी जान से

By: Chandra Mohan Mishra | Publish Date: Fri 12-Jan-2018 10:35:08   |  Modified Date: Fri 12-Jan-2018 10:37:13
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400 ग्राम की इस 'नन्ही परी' को बचाने के लिए एक डॉक्टर 7 महीने तक जुटा रहा जी जान से
यह बात सुनने में बहुत ही अजीब और दिल में चुभने वाली लगती है कि कैसे कोई बच्चा सिर्फ 400 ग्राम वजन का हो सकता है और ऐसे बच्चे की क्या हालत होगी। लोग तो यही कहेंगे कि उसका जिंदा बच पाना मुश्किल है, लेकिन राजस्थान में एक डॉक्टर ने ऐसी ही एक नन्ही सी जान को बचाने के लिए 7 महीने तक जी जान लगा दी और अब वह नन्ही सी जान अपनी मुस्कान से उस डॉक्टर को सबसे कीमती शुक्रिया अदा कर रही है।

बच्‍ची की जान बचाने के लिए की नामुमकिन कोशिश

जानकारी के मुताबिक राजस्थान के उदयपुर में एक डॉक्टर सुनील जांगिड़ ने पूरे दक्षिण एशिया में अब तक के सबसे छोटे और सबसे कम वजन वाले बच्चे की जिंदगी को बचा कर ना सिर्फ एक रिकॉर्ड बना दिया है, बल्कि लाखों लोगों के दिलों को छू लिया है। राजस्थान के उदयपुर में मौजूद एक निजी हॉस्पिटल मैं पिछले साल एक बच्ची का जन्म हुआ था जन्म के समय उस बच्ची की लंबाई सिर्फ 22 सेंटीमीटर और उसका वजन मात्र 400 ग्राम था। इस हालत में बच्ची ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही थी और उसका शरीर नीला पड़ता जा रहा था। जब बच्ची के मां बाप से लेकर सभी लोग यह मानकर चल रहे थे कि वो जिंदा नहीं बच पाएगी। तब हॉस्पिटल के डायरेक्टर सुनील जांगिड और उनके सहयोगी ने इस बच्ची की जिंदगी बचाने की नामुमकिन चुनौती को स्वीकार कर लिया।

 

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अपनी क्‍यूट स्‍माइल से करती है डॉक्‍टर का शुक्रिया

इसके बाद बच्ची को इंटेंसिव केयर यूनिट में रखा गया। शुरुआत में ही बच्चे के शरीर से पानी का वाष्पीकरण होने के कारण उसका वजन और कम हो गया। कमजोर शरीर और प्रीमेच्योर होने के कारण उसकी आंतें और पेट दूध पचाने लायक भी नहीं थी। तो इस कंडीशन में उस बच्ची को ग्लूकोज, सभी तरह के प्रोटीन आदि उसकी नसों में डालकर ही शरीर में पहुंचाए गए। करीब 7 महीनों लंबे इस अथक प्रयास के बाद आज इस बच्ची का वजन करीब ढाई किलो हो गया है और वो पूरी तरह से हेल्‍दी है। अब उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। डॉ जांगिड़ का दावा है कि इससे पहले पूरे दक्षिण एशिया में इतने कम वजन वाले बच्चे के जिंदा बचने की कोई भी ऑफिशियल रिपोर्ट मौजूद नहीं है। उनके मुताबिक साल 2012 में पंजाब के मोहाली में एक 450 ग्राम वजन के शिशु को उपचार करके बचाया गया था। फिलहाल अभी यह नन्ही सी जान स्वस्थ हो चुकी है और अपनी क्यूट स्माइल से डॉक्टर और अपने पेरेंट्स के अथक प्रयासों के लिए उन्हें धन्यवाद दे रही है।

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