इंपोर्ट करके कहां लाया गया था भारत का पहला कंप्यूटर

इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट कोलकाता, जी हां यह उस जगह का नाम है जहां पर देश का पहला कंप्यूटर लगाया गया था। साल 1955 के अंतिम दिनों में यहां मंगाया गया था देश का पहला कंप्यूटर जिसका नाम था HEC-2M। इंस्टिट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिकों Dwijish Dutta, MM Mukherjee और Amaresh Ro के प्रयासों और इनकी निगरानी में ही देश का यह पहला कंप्यूटर ISI में स्थापित किया गया। अगर आप सोच रहे हैं कि यह कंप्यूटर किसी कंप्यूटर टेबल पर रखने लायक था तो जनाब एक बार दोबारा सोचिए। इंग्लैंड से दो रैक्‍स में रखकर पानी के जहाज से लाया गया यह कंप्यूटर वजन में बहुत ज्यादा भारी था। कि ISI के इंजीनियर्स को इस Tube बेस्ड कंप्यूटर में 1K memory इंस्टॉल करने में 2 महीने लग गए।

अगर आज खरीदा गया होता भारत का पहला कंप्‍यूटर तो इतनी होती कीमत

उस वक्‍त कंप्यूटर यूं ही किसी फैक्ट्री में नहीं बनते थे। UK के Birk Bak College के कंप्यूटर विभाग के प्रोफेसर एडी बूथ ने इसे खास तौर पर डिजाइन करके बनाया था। इस कंप्यूटर को ऑपरेट करने के लिए इंग्लैंड से दो जवान कंप्यूटर इंजीनियर पर भेजे गए थे। जो वहां से पूरी तरह से ट्रेनिंग लेकर आए थे और उन्हें यहां के लोगों को ट्रेनिंग देनी थी। भारत के सबसे पहले कंप्यूटर के बारे में इतनी पुरानी जानकारी कोई आम आदमी नहीं दे सकता यह जानकारी हमें मिली है आईएसआई के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के हेड Dr Dwijish Dutta Majumdar जिन्‍हें लोग भी DDM के नाम से भी पहचानते हैं। देश के पहले कंप्यूटर को आई एस आई में लाने के बाद एक फॉर्मल सेलिब्रेशन भी किया गया था। हालांकि उसकी यादें अब धुंधली पड़ गई हैं, जिन्‍हें शब्दों में बता पाना मुश्किल है


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आज के हिसाब से HEC-2M की कीमत है करीब एक करोड़ रुपए

इस कंप्यूटर के बारे में बताते हुए DDM एक अलग ही दुनिया में चले जाते हैं उन्होंने बताया कि HEC-2M एक 16 बिट की कंप्‍यूटर मशीन थी जो 1024 शब्दों की ड्रम मेमोरी के साथ मशीन कोड में काम करती थी। इस कंप्यूटर के साथ कोई प्रिंटर भी अटैच नहीं था और यह पंचकार्ड सिस्टम पर काम करता था। साल 1955 में इस कंप्यूटर को खरीदने में करीब 200000 रुपए लगे थे। उस दौर के हिसाब से यह इतना ज्यादा महंगा था जिसके लिए इंस्‍टीट्यूट को खास ग्रांट मिली थी तब इसे खरीदा जा सका। अगर आज के हिसाब से उस रकम को जोड़ा जाए तो तकरीबन 90 लाख रुपए के आसपास बैठते हैं। वाकई यह सोच कर हर कोई चौंक जाएगा। आजकल जो कंप्यूटर कुछ हजार रुपए में बड़ी आसानी से मिल जाते हैं वैसा कंप्यूटर अगर 90 लाख में मिले तो खरीदार तो बेहोश ही हो जाएगा। नीचे दी गई तस्‍वीर Hollerith Electronic Computer यानि HEC सीरीज का पुराना वर्जन है।

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फिर आया देश का दूसरा कंप्‍यूटर URAL

उस दौर में भी एक कंप्यूटर खरीदा गया और इसे 300 स्क्वायर फीट के एक एयर कंडीशन हॉल में फिट किया गया। HEC-2M के बाद साल 1958 में यूनाइटेड नेशन टेक्निकल असिस्टेंट बोर्ड द्वारा मिली ग्रांट द्वारा आईएसआई ने URAL नाम का एक 32 बिट कंप्यूटर खरीदा। HEC-2M के मुकाबले URAL को चलाने के लिए रूस से कंप्यूटर इंजीनियर्स की पूरी टीम आई थी। इन दो कंप्‍यूटर्स के साथ इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट भारत का कंप्यूटर सेंटर बन गया था क्योंकि यहां पर देश भर से तमाम साइंटिफिक प्रॉब्लम्स भेजी जाती थी। जिन्हें इन कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस किया जाता था। इन प्रॉब्लम्स में रक्षा विभाग से लेकर अन्य विभागों के सरकारी आंकड़ों से महत्वपूर्ण रिजल्ट निकालने के लिए वैज्ञानिक और कंप्यूटर काफी दिमाग और समय खर्च करते थे।

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देश के पहले कंप्यूटर के साथ वैज्ञानिकों का था दिली जुड़ाव

Dwijish Dutta Majumdar बताते हैं कि इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट में HEC-2M के बाद URAL के आने से हम लोग बहुत खुश थे और हम देर रात तक इन पर काम करते थे। हमारा और इन कंप्यूटरों का जुड़ाव इतना मजबूत था जैसे कि वह हमारे घर के कोई पालतू सदस्‍य हों। इसमें भी HEC-2M से ज्‍यादा गहरा जुड़ाव था और ऐसा ही जुड़ाव बहुत सालों तक बना रहा जब तक कि साल 1964 में IBM कंपनी ने 1401 नाम का अपग्रेडेड कंप्यूटर यहां पर इंस्टॉल नहीं कर दिया। IBM के इस कंप्यूटर के इंस्टॉल होने के बाद भारत के पहले दो कंप्यूटर HEC-2M और URAL हमेशा के लिए सो गए।

आज कहां रखें है देश के ये पहले कंप्‍यूटर

यह बात आपको जरूर चौंका सकती है कि HEC-2M और URAL, भारत के ये पहले दो कंप्यूटर आजकल किसी म्यूजियम में नहीं बल्कि कबाड़खाने में रखे हुए हैं और ना ही इनके आसपास कोई खूबसूरत सजावट की गई है बल्कि यह इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट के एक पुराने गोडाउन में ढके हुए रखे हैं, जिन्हें अब कोई आसानी से देख नहीं सकता। HEC-2M कंप्यूटर जो एक दौर में पूरे देश में कंप्यूटिंग का सरताज हुआ करता था आज वो दुनिया की नजरों से ओझल एक कंप्यूटर लैब के कबाड़खाने में चिर निद्रा में सो रहा है। source

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