डिज़नी के रंग, अनुराग का कैनवास : अनुराग बासु की एक ख़ास बात है, उनकी कहानी को सुनाने की कला, क्या फिल्म का ट्रेलर देख कर आपको कहीं भी लगा था, की फिल्म की थीम 'अंतर्राष्टीय क्राइम और हथियारों की तस्करी' पर होगी, और फिर भी हर डिज़नी फिल्म की तरह आप इस फिल्म को अपने पूरे परिवार के साथ बिना झिझक बैठ कर देख सकते हैं। खासकर बच्चों के लिए ये फिल्म  डिज़नी के रंगों से भरी एक स्टोरीबुक जैसी है, जिसको आपके बच्चे ज़रूर पढना चाहेंगे।

रेटिंग : ****
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बोल न पाया तो गा के सुनाया : फिल्म में न के बराबर संवाद हैं, चूंकि जग्गा गा नहीं सकता इसलिए गा गा के अपनी बात कहता ही। ये फिल्म एक आउट एंड आउट म्यूजिकल है, जिसकी फील डिज़नी के किसी म्यूजिकल से कम नहीं है, पर फिर भी आपको संवादों की कमी बिलकुल महसूस नहीं होती, अमिताभ भट्टाचार्य को फिल्म के लिरिकल डाइलोग के लिए स्टैंडिंग ओवेशन।

गा रे , प्रीतम प्यारे : जितना मुश्किल अमिताभ के लिए इस फिल्म के लिरिकल संवादों को लिखना रहा होगा उनता ही मुश्किल है इस फिल्म के संगीत को पिरोना, लगभग लगभग पूरी फिल्म में संगीत है, और तकरीबन 30 गाने हैं। प्रीतम की ज़िन्दगी का सबसे मुश्किल प्रोजेक्ट है ये... और कुछ गाने तो ज़बरदस्त हैं, उल्लू का पट्ठा, खाना खाके और गलती से मिस्टेक।

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वेलकम बैक रणबीर : रणबीर इस फिल्म के साथ साबित करते हैं, की वो इस इंडस्ट्री के सबसे चार्मिंग और काबिल कलाकारों में से एक हैं और इस साल उनके इस परफोर्मेंस को टक्कर दे पाना मुश्किल होगा हर एक एक्टर के लिए, उनकी लगन और मेहनत साफ़ साफ़ दिखती है।

बच्चों का खेल : बच्चों के लिए फिल्म बनाना कोई बच्चों का खेल नहीं है, पर अनुराग की ये फिल्म एक बेहद ख़ास किस्म की किड्स फिल्म है। बच्चों को इस फिल्म को देख कर ख़ासा मज़ा आने वाला है, इसलिए बारिश का मज़ा इस फिल्म के साथ ज़रूर लीजिये।

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अतिसुन्दर : फिल्म इतनी सुन्दर शॉट है की एक एक फ्रेम आपको ऐसा लगेगा की आप उसे अपने कमरे में दीवार पर फ्रेम कराकर लगवा सकें। रवि वर्मन की सिनेमेटोग्राफी को फुल मार्क्स।

एडिटिंग : इस फिल्म की एडिटिंग भी ख़ास है, एक फुल म्यूजिकल फिल्म की एडिटिंग बेहद मुश्किल काम है पर जिस तरह से ये फिल्म एडिट की गई है, उसके लिए अजय शर्मा को बधाई

 

कटरीना ने भी कमाल दिखाया : कटरीना ने भी इस फिल्म में ज़बरदस्त परफॉरमेंस दी है, उनका काम भी आपको ज़रूर पसंद आयेगा।

कास्टिंग : फिल्म की पूरी कास्टिंग एप्ट है खासकर बदल बागची का रोल करने शाश्वत का काम बेहद अच्छ्ह है

रिश्तों की डोर से : बाप बेटे के रिश्ते पर बड़े दिनों बाद कोई बढ़िया फिल्म आई है, ''

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