पेट्रोल नहीं!... इलेक्ट्रिक व्हीकल्स बदलेंगे आपकी जिंदगी

By: Chandra Mohan Mishra | Publish Date: Mon 25-Dec-2017 08:25:01   |  Modified Date: Mon 25-Dec-2017 08:25:02
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पेट्रोल नहीं!... इलेक्ट्रिक व्हीकल्स बदलेंगे आपकी जिंदगी
आज ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है पॉल्यूशन की प्रॉब्लम को कम करना। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की जगह इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स एक बेहतर विकल्प के रूप में देखे जा रहे हैं। क्या है आटोमोबाइल सेक्टर का भविष्य? कितना अहम है परम्परागत ईंधन से अलग नए विकल्प के व्हीकल को बाजार में लाना? ऐसे ही कई सवालों को लेकर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की कृतिका अग्रवाल के साथ खास बात की इलेक्ट्रानिक टू व्हीलर कंपनी ओकीनावा के फाउंडर एंड मैनेजिंग डायरेक्टर जितेंद्र शर्मा ने।

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का फ्यूचर ब्राइट है, सरकार भी इस एरिया में तेजी से काम कर रही है। लोगों के बीच इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की इंपॉर्टेंस को लेकर अवेयरनेस से बढ़ेगा इनका स्कोप। देश को चाहिए ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर जो व्हीकल्स के एक्सपीरियंस को कंफर्टेबल बनाए। हाल ही में ऐसा ई-स्कूटर लॉन्च किया गया है जो 75 किमी पर ऑवर की स्पीड प्रोवाइड करता है और आने वाले टाइम में यह टेक्नोलॉजी सिर्फ इंप्रूव ही होती जाएगी।

 

आने वाले वक्त में ऑटोमोबाइल्स इंडस्ट्री किस डायरेक्शन में मुडऩे वाली है?

ऑटोमोबाइल्स सेक्टर में फ्यूचर होगा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का। आज की डेट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का फ्यूचर दो तरह से है। एक तो जो हम पॉल्यूशन की प्रॉब्लम को फेस कर रहे हैं, सिर्फ इंडिया में ही नहीं बल्कि ग्लोबली भी। ग्लोबल फोरम पर पॉल्यूशन एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है और इसका जो इंपैक्ट आज दिख रहा है, आने वाली जेनरेशन के लिए कम से कम 200 गुना ज्यादा होगा। अभी कुछ वक्त दिल्ली में जब बच्चों का लंग टेस्ट हुआ था, तो उसमें 60 परसेंट बच्चे फेल हो गए थे। ये इंडिकेट करता है कि हमें किसी न किसी तरह से पॉल्यूशन को कम करना है और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इसमें बहुत बड़ा रोल प्‍ले कर सकते हैं।

 

ऑटो इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव क्या होने वाला है?

सबसे बड़ा बदलाव होगा व्हीकल्स से निकलने वाले कार्बन को कम करने की कोशिश। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का भी अपना एक दायरा है लेकिन इसकी बड़ी भागेदारी होगी। लेकिन ये तभी होगा जब लोग ये समझेंगे कि उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की तरफ स्विच करके क्या फायदे हो सकते हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की खासियत है कि न उससे एयर पॉल्यूशन होगा न ही नॉइज पॉल्यूशन। इनफैक्ट, गवर्नमेंट ने तो ये भी कहा है कि 2030 तक ऑटोमाइल्स के मार्केट को पूरी तरह से चेंज कर दिया जाएगा। यानि पेट्रोल और डीजल के साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का भी बड़ा मार्केट होगा। इंडिया ही नहीं, दुनिया भर में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की टेक्नोलॉजी को इंप्रूव करने पर जोर दिया जा रहा है।

 

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इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स फायदेमंद होने के बजाय लोगों के बीच पॉपुलर क्यों नहीं हैं?

अभी तक जो भी प्रोडक्ट्स मार्केट में थे वो रेंज और क्वॉलिटी वाइज इतने नहीं थे। लोगों में इस बात को लेकर डर था कि अगर वो घर से निकले हैं तो वापस घर पहुंच पाएंगे या नहीं। अभी तक जो भी ई-स्कूटर्स लॉन्च किए गए थे, उनकी एफिशियंसी को लेकर भी ये डर था लोगों में कि ये ज्यादा लोड ले पाएंगे या नहीं, रास्ते में ही बैट्री खत्म हो गई तो क्या होगा। लेकिन अब ये सिर्फ लोगों की ही नहीं, ग्लोबल लेवल पर इंडिया और बाकी देशों की जरूरत बन गए हैं। यही वजह है इनकी टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है।

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इन्हें पेट्रोल और डीजल से रिप्‍लेस करना एक बड़ा चैलेंज है, कैसे होगा ये?

जाहिर है कि जो चीजें इतने दशकों से लोगों के बीच हैं, उन्हें रिप्‍लेस करना चैलेंजिंग होगा। गवर्नमेंट भी इस इस डायरेक्शन में तेजी से काम कर रही है। एक मैन्युफैक्चरर के तौर पर सबसे बड़ा फैक्टर ये होगा कि हम लोगों को ऐसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के ऑप्‍शंस दें, जिसको देखकर लोग ये सोचें कि उन्हें पेट्रोल और डीजल को छोड़कर इस पर स्विच करना है। यानि अगर लोगों को इन प्रोडक्ट्स की तरफ अट्रैक्ट करना है तो ये तभी होगा जब प्रोडक्ट्स बेस्ट क्वॉलिटी के होंगे और लोगों को कंवीनियंस प्रोवाइड करेंगे। इसलिए हम भी इसी डायरेक्शन में काम कर रहे हैं ताकि लोग ऑटोमोबाइल्स के इस सेग्मेट की तरफ स्विच कर सकें। जैसे कि कोशिश ये होगी, कि ई-व्हीकल्स मजबूत होने के साथ-साथ नॉर्मल बाइक्स और कार की तरह स्पीड भी प्रोवाइड करें। हमने हाल ही में ऐसा स्कूटर लॉन्च किया है जो 75 किमी पर ऑवर की स्पीड पर चलता है और सिंगल चार्ज में 170-200 किमी के डिस्टेंस को कवर करता है। इसके अलावा लोगों के बीच इसे लेकर भी अवेयरनेस की बहुत जरूरत है। गवर्नमेंट की पॉलिसीज को फॉलो करना और ये सोचना कि बेहतर कल के लिए जरूरी आवश्यकता है, इस तरह का एट्टियूड भी ऑटोमोबाइल्स के सेक्टर में बड़ा चेंज ला सकता है।

 

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क्या सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लॉन्च कर देना काफी है? जिस तरह फ्यूल स्टेशंस पेट्रोल होते हैं, क्या आने वाले वक्त में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए चार्जिंग स्टेशंस की जरूरत नहीं होगी?

आप जो चार्जिंग स्टेशंस की बात कर रही हैं तो डेफिनेटली आने वाले वक्त में हमें ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी जो इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के स्मूद फ्लो के लिए काम करे। हमारी गवर्नमेंट भी इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप करने का काम कर रही है। लेकिन अगर हम ओकीनावा की बात करें तो हमारा ध्येय ये है कि हम ऐसे स्कूटर्स बनाएं जो रास्ते में रुके ही नहीं। हम इस तरह के ई-टू व्हीलर्स पर कर रहे हैं, जो एक छोटी सी बैट्री पर काम करेंगे। मान लीजिए अगर रास्ते में आपकी बैट्री खत्म भी होती है तो आपको बस वो बैट्री निकालनी होगी और उसे किसी भी पांच एंपियर के प्‍लग से चार्ज करना होगा। यानि जिस तरह से आप अपना फोन चार्ज करते हैं, वैसे ही अपने स्कूटर की बैटरी भी चार्ज कर पाएंगे। हमारा पूरा फोकस होगा कि लोग जब चलें तो पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कि उन्हें कहीं रुकना नहीं पड़ेगा।

 

जितेंद्र शर्मा ओकीनावा स्कूटर्स के फाउंडर एंड मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ओकीनावा ने हाल ही में इंडिया का पहला सबसे तेज स्पीड पर चलने वाला ई-स्कूटर लॉन्च किया है।

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