क्‍या करती है Cambridge Analytica कंपनी

Cambridge Analytica यूके की एक डेटा एनालिसिस कंपनी है, जो Strategic Communications Laboratories नाम की पेरेंट कंपनी के अंडर काम करती है। बता दें कि कैंब्रिज एनालिटिका फर्म तमाम तरह के ऑनलाइन पॉलिटिकल कैंपेन चलाती है, जिसके अंतर्गत ये अपने क्‍लाइंट यानि राजनैतिक पार्टियों को मौका देती है कि वो अपने वोटर्स तक बेहतर ढंग से पहुंच सकें। साथ ही कंपनी द्वारा दिए गए डेटा के आधार पर चुनावी गणित को समझ कर उसका फायदा उठा सकें। इस कंपनी के कोफाउंडर Christopher Wylie जो अब कंपनी का हिस्‍सा नहीं हैं, ने बताया है कि अमेरिकी चुनावों के दौरान कैंब्रिज एनालिटिका ने डोनाल्‍ड ट्रंप के चुनाव प्रचार के लिए काम किया था। क्रिस्‍टोफर ने दावा किया है कि इस कंपनी ने फेसबुक के करीब 5 करोड़ यूजर्स का डेटा बिना उनकी परमीशन के एक्‍सेस किया और उसके आधार पर वोटर्स की एक साइकोलॉजिकल प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद देश के अलग अलग हिस्‍सों में रहने में वाले इन सभी यूजर्स को डोनाल्‍ड ट्रंप के फेवर वाले खास विज्ञापन बार बार भेजे गए, ताकि वो वोटर्स चुनावों में ट्रंप का समर्थन करने को प्रेरित हो सकें।

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कैसे हासिल किया फेसबुक यूजर्स का डेटा

यह तो आपको मालूम ही होगा, कि फेसबुक तमाम डेवलपर्स को अपने प्‍लेटफॉर्म पर कई तरह की यूटीलिटी ऐप्‍स और इंटरटेनमेंट गेम बनाने की सुविधा देता है। इसी का फायदा उठाते हुए CA के एक रिसर्चर Alexsandr Kogan ने फेसबुक पर एक पर्सनैलिटी प्रेडिक्‍शन ऐप डेवलेप की, जिसका नाम है 'thisisyourdigitallife'। अब तक इस ऐप के को 2,70,000 बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस ऐप पर लोग अपनी पर्सनैलिटी प्रेडिक्‍शन के लिए आते और ऐसा करने के लिए उन्‍हें फेसबुक लॉगइन द्वारा इस ऐप को अपनी बेसिक जानकारी के साथ अपने फ्रेंड्स और इंटरेस्‍ट के बारे में भी कई पर्सनल जान‍कारियां शेयर करनी होती थीं। लोग सिर्फ इस ऐप का यूज करने के लिए अपनी और दोस्‍तों की जानकारियां इस ऐप को दे रहे थे, लेकिन इस ऐप के डेवलपर Kogan ने इससे आगे जाकर यूजर्स के पूरे डेटा को कैंब्रिज एनालिटिका को बेच दिया। सबसे बड़ी बात तो यह रही, कि कोगन की इस ऐप ने किसी एक यूजर के डेटा को जुडे हुए करीब 300 फेसबुक यूजर्स के डेटा में बदल दिया। इसी लॉजिक से ऐप पर मिला लाखों यूजर्स को डेटा करोड़ों यूजर्स के डेटा में बदल गया, जो सच में बहुत बड़ी संख्‍या है। बाद में इसी यूजर डेटा को मैनुपुलेट करके डोनाल्‍ड ट्रंप के चुनावी कैंपेन के दौरान करोड़ों यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पर एक कल्‍चरल वॉर छेड़ दिया गया। जिसके असर से 2016 के चुनावों में ट्रंप को फायदा मिला।


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कैंब्रिज एनालिटिका और फेसबुक ने क्‍या कहा

इन आरोपों के बाद फेसबुक ने कैंब्रिज एनालिटिका के फेसबुक अकाउंट समेत उसकी सभी डेवलपर ऐप्‍स को भी तत्‍काल प्रभाव से सस्‍पेंड कर दिया। करोड़ों यूजर्स के डेटा ब्रीच और उनके दुरुपयोगों को लेकर फेसबुक ने सफाई दी है कि साल 2015 में ही उन्‍हें पता चला कि एलेक्‍जेंडर कोगन 'thisisyourdigitallife' नाम की ऐप बनाकर फेसबुक यूजर्स के डेटा को अपने पास स्‍टोर कर कर रहा है। हालांकि दो सालों के बाद अब फेसबुक ने कैंब्रिज एनालिटिका से जुड़े सारे अकाउंट सस्‍पेंड किए हैं। फेसबुक यूजर्स को डेटा चोरी हो रहा है, यह जानने के बावजूद फेसबुक ने इतने वक्‍त तक कोई एक्‍शन क्‍यों नहीं लिया? यह बड़ा सवाल है। दूसरी ओर कैंब्रिज एनालिटिका का कहना है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। उसकी ऐप पर यूजर्स अपनी मर्जी से पर्सनल डेटा शेयर कर रहे थे और उसने ड्रोनाल्‍ड ट्रंप के चुनावी कैंपेन में उस डेटा का कोई यूज नहीं किया, क्‍योंकि तब तक वो डेटा डिलीज किया जा चुका था।


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कैम्ब्रिज एनालिटिका का इंडिया कनेक्‍शन
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप का चुनावी कैंपेन हैंडल कर चुकी कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका का भारत में हुए चुनावों से भी सीधा कनेक्‍शन जुड़ने से भारत में राजनैतिक हड़कंप मचा हुआ है। इस कंपनी की वेबसाइट पर दी गई एक जानकारी के मुताबिक साल 2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान उसने अपनी सर्विस दी थी और कुल टारगेट सीटों में से 90 परसेंट पर उनके क्‍लाइंट को शानदार जीत मिली थी। अब यह माना जा रहा है साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भी कई पार्टियां कैम्ब्रिज एनालिटिका के संपर्क में हैं और चुनाव में बिग डेटा का बड़ा खेल देखने को मिल सकता है। इसी सिलसिले में IT और लॉ मिनिस्‍टर रवि शंकर प्रसाद ने फेसबुक समेत कैम्ब्रिज एनालिटिका जैसी ऑनलाइन डेटा कंपनियों को खुली चेतावनी दी है कि भारत में चुनाव की प्रक्रिया के साथ किसी तरह का खिलवाड़ करने की कोशिश न करें वर्ना, कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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