Birthday special: नहीं तो भारत में ही होते 500 छोटे-छोटे देश, जानें भारत बनाने वाले पटेल की कहानी

By: Molly Seth | Publish Date: Tue 31-Oct-2017 11:10:00   |  Modified Date: Tue 31-Oct-2017 11:38:14
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Birthday special: नहीं तो भारत में ही होते 500 छोटे-छोटे देश, जानें भारत बनाने वाले पटेल की कहानी
आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के वर्तमान स्‍वरूप को अमली जामा पहनाने में इंर्पोटेंट रोल प्‍ले करने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्‍म 31 अक्टूबर, 1875 को हुआ था। भारत की आजादी के बाद सरदार पटेल पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री बने। सरदार पटेल आज भी कितने प्रासंगिक हैं इसका नमूना आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रन फॉर यूनिटी रेस का उद्वघाटन करके पेश किया। ऐसा माना जाता है बिना पटेल के, आजादी से पूर्व देश में मौजूद छोटे बड़े राज्‍यों का, भारत में विलय करके उसे एक देश मुमकिन नहीं था। आइये जाने उनकी उन्‍हीं पटेल की कहानी।

पेशे से वकील
सरदार वल्‍लभभाई पटेल का जन्म नडियाद, गुजरात में एक किसान परिवार में हुआ था। वे पिता झवेरभाई पटेल और मां लाडबा देवी की चौथी संतान थे। उनसे बड़े तीन भाई थे सोमाभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई। सरदार पटेल की शुरूआती शिक्षा स्वाध्याय से ही हुई, बाद में लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। उसी दौरान महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत की आजादी की लड़ाई में हिस्‍सा लेना शुरू किया और जल्‍दी ही इसका महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा बन गए।

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खेडा आंदोलन
स्वतन्त्रता आन्दोलन में सरदार पटेल ने सबसे पहला और बडा योगदान खेडा संघर्ष में दिया था। गुजरात का खेडा डिविजन उन दिनो भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार द्वारा लगाये जा रहे भारी कर में छूट की मांग की थी, जिसे ब्रिटिश गवरमेंट ने स्वीकार नहीं किया। तब सरदार पटेल, गांधीजी और कुछ और नेताओं ने किसानों का साथ दिया और उन्हे कर न देने के लिये कहा। आखिरकार अंग्रेज सरकार को हार माननी पड़ी और उस साल टैक्‍स में राहत दी गयी। यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी।
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बारडोली सत्याग्रह एक बार फिर किसानों के साथ
किसान परिवार से आने की वजह से सरदार पटेल उनकी समस्‍याओं को अच्‍छी तरह समझते थे। इसीलिए वे बारडोली कस्बे में वे एक बार फिर किसानों के पक्ष में आये। इसी शक्‍तिशाली आंदोलन के चलते उन्हे पहले बारडोली का सरदार और बाद में केवल सरदार कहा जाने लगा। पटेल को सत्याग्रह की सफलता पर वहां की महिलाओं ने सरदार की उपाधि दी थी।
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आधुनिक भारत का निर्माता और लौह पुरुष
इसके बाद मिली आजादी और पटेल को उपप्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री का कार्य सौंपा गया। साथ ही शुरू हुआ देश भर में फैली करीब 500 विभिन्न रियासतों को देश की मुख्‍य धारा का हिस्‍सा बनाने का प्रयास, ताकि भारत एक राष्‍ट्र बन सके। तब सरदार पटेल ने पीवी मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने के लिये कार्य आरम्भ कर दिया था, क्‍योंकि उनको लगता था कि बतौर गृहमंत्री उनकी सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी है। पटेल और मेनन ने देसी राजाओं को समझाया कि उन्हे स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। इसके बाद तीन को छोडकर शेष सभी राजवाडों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। केवल जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ तथा हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा करना नहीं स्वीकारा। जूनागढ के नवाब के विरुद्ध जब बहुत विरोध हुआ तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और जूनागढ भी भारत में मिल गया। जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो सरदार पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया। उनके इस महत्‍वपूर्ण काम में बहादुरी से अपनी भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है।

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सरदार के तेवर थे खास  

किसानों के हित के लिए ही एक और कदम बढ़ाते हुए सरदार पटेल ने गुजरात के किसानों का कैरा डिस्‍ट्रिक्‍ट को ऑपरेटिव मिल्‍क प्रोड्यूसर्स यूनियन बनाने की प्रेणना दी जो आज अमूल के नाम से जानी जाती है। पटेल को भारतीय नागरिक सेवाओं ICS को इंडियन सिविल सर्विसेज IPS और IAS में बदलने का भी क्रेडिट जाता है। सरदार पटेल की सबसे बड़ी खासियत थे उनके उग्र तेवर और दृढ़ इरादे। हालाकि वे आसानी से आपा नहीं खोते थे लेकिन उनके पक्‍के इरादे और फैसले उनकी पहचान बन चुके थे। सरदार का एक वाक्‍य बेहद मशहूर हुआ है "विनम्रता अक्‍सर बाधा बन जाती है, इसलिए अपनी आंखों को गुस्‍से से लाल होने दीजिए और अन्‍याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिए।"  
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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
उनके जन्‍मदिन 31 अक्टूबर 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल के स्मारक का शिलान्यास किया। दुनिया की इस सबसे ऊंची मूर्ति का नाम 'एकता की मूर्ति' यानि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी रखा गया है। यह मूर्ति अमेरिका की 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी'  जो 93 मीटर की है, से दुगनी ऊंची बनेगी। इसे एक छोटे चट्टानी द्वीप पर स्थापित किया जाना है जो केवाड़िया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के मध्य में है। सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह प्रतिमा 5 साल में लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होनी है।

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