मजदूर और किसान के बेटे बुन रहे राजनीति का बड़ा ख्वाब

By: Inextlive | Publish Date: Thu 12-Oct-2017 06:42:32   |  Modified Date: Thu 12-Oct-2017 06:44:36
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मजदूर और किसान के बेटे बुन रहे राजनीति का बड़ा ख्वाब
चुनावी मैदान में छात्रसंघ के महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके प्रत्याशी भी लड़ रहे

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ALLAHABAD: इविवि छात्रसंघ चुनाव में मजदूर और किसान के बेटे भी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा कई प्रत्याशी ऐसे भी हैं जो पूर्व में छात्रसंघ के महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं. बुधवार को इविवि में आयोजित दक्षता भाषण में प्रत्याशियों ने अपने अपने एजेंडे गिनाये तो इस दौरान बीएचयू में हुए बवाल का मसला भी जोरशोर से उठा. भाषण में एक दूसरे दल और प्रत्याशी पर कटाक्ष भी खूब हुए.

 

अध्यक्ष पद के प्रत्याशी और उनकी बात

शक्ति रजवार: आइसा के पैनल से चुनाव लड़ रहे शक्ति रजवार ने जातिगत आधार पर टिकट पाने वाले प्रत्याशी और चुनाव जीतने का समीकरण साधने वालों को चुनाव में करारा जवाब देने की अपील की.

परिचय:

-बरेली स्थित बहेड़ी तहसील के रहने वाले हैं.

-एमए इकोनॉमिक्स के स्टूडेंट हैं.

-बीए में 50 फीसदी अंक मिले थे.

 

अवनीश कुमार यादव: समाजवादी छात्रसभा के पैनल से चुनाव लड़ रहे हैं. छात्र हितों के लिये किये गये संघर्ष की याद दिलाई. हॉस्टल वॉशआउट, विवि प्रशासन की तानाशाही जैसी बातें शामिल रहीं.

परिचय:

-देवरिया रुद्रपुर रोड के रहने वाले हैं.

-पिता बिन्देश्वरी यादव किसान हैं.

- एलएलबी सेकेंड इयर के स्टूडेंट.

- बीए में 70 फीसदी अंक.

 

प्रियंका सिंह: एबीवीपी के पैनल से चुनाव लड़ रही हैं. प्रियंका ने कहा कि उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया तो विरोधी अभद्रता की सारी सीमायें लांघ गये. वे जीतीं तो छात्राएं कैम्पस में पूरी तरह से महफूज होंगी.

 

परिचय:

-इविवि में पीडी हॉस्टल में रहती हैं.

-हरदोई स्थित लालपालपुर की रहने वाली हैं.

-इनके बड़े भाई मध्य प्रदेश के नीमच में कलेक्टर हैं.

-फिलॉसफी से एमए प्रीवियस कर रही हैं.

-इन्होंने बीए में 59.75 फीसदी अंक हासिल किए हैं.

 

सुजीत कुमार यादव: इंकलाबी छात्र मोर्चा के बैनर तले लड़ रहे हैं. कहा कि आज कारों के काफिले से चलने वाले कल चुनाव जीतने के बाद दिल्ली की गोद में बैठ जाएंगे. उन्होंने फीस वृद्धि, छात्राओं से छेड़छाड़ जैसे मुद्दे उठाए.

परिचय:

-बीए पार्ट थ्री के छात्र हैं.

-बलिया स्थित मनिचर बांसडीह के रहने वाले हैं.

-इनके पिता मार्कंडेय किसान हैं.

 

मृत्युंजय राव परमार: निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. बीएचयू में छात्राओं के साथ हुई घटना को पुरजोर ढंग से उठाया. कहा कि मैं छात्रों के साथ खड़ा हूं और खड़ा रहूंगा.

परिचय:

-हिन्दी विषय से शोध छात्र हैं.

-देवरिया स्थित बालकुंआ के रहने वाले हैं.

-पिता गुरू प्रकाश राव व्यावसायी हैं.

 

सूरज कुमार दुबे:

-एनएसयूआई से लड़ रहे हैं. उन्होंने छात्रों को यूपीपीएससी, लाइब्रेरी और ऑनलाइन-ऑफलाइन मुद्दे को लेकर किये गये संघर्षो की याद दिलाई.

परिचय:

-भदोही स्थित बभनौटी के रहने वाले हैं.

-पिता जवाहर लाल किसान हैं.

-मीडिया स्टडीज सेंटर में एमए प्रीवियस के छात्र हैं.

-बीए में 63 फीसदी अंक मिले थे.

 

विकास कुमार भारतीय: भारतीय विद्यार्थी मोर्चा से लड़ रहे हैं. कहा कि कभी विवि से आईएएस व पीसीएस की पूरी खेप निकलती थी. लेकिन आज यहां के छात्र चपरासी की नौकरी के लिये भी जूझ रहे हैं. कहा ऐसी धारणा है आम छात्र यहां चुनाव नहीं लड़ सकता. इसलिये वे चुनाव लड़ रहे हैं.

परिचय:

-ग्राम खटंगिया जसरा के रहने वाले हैं.

-पिता राजेश भारतीय मजदूर हैं.

-एमए फाइनल के छात्र हैं.

 

उपाध्यक्ष प्रत्याशी

प्रशांत शुक्ला आजाद: प्रतियोगी छात्र मोर्चा से लड़ रहे हैं. इन्होंने 180 दिन कक्षा, लाइब्रेरी और रूम रेंट का मुद्दा उठाया.

 

सुनील कुमार यादव: जनवादी छात्रसभा से लड़ रहे हैं. मजदूर के बेटे सुनील ने कैंटीन के इश्यू को जोरशोर से उठाया.

 

आभा यादव: इविवि में परास्नातक की निर्वाचित प्रतिनिधि रह चुकी हैं. इन्होंने बीएचयू में हुई घटना का उल्लेख किया.

 

चन्द्रशेखर चौधरी: समाजवादी छात्रसभा से लड़ रहे हैं. विवि में कला संकाय प्रतिनिधि रह चुके हैं. कहा कि मैं छात्रों की आवाज बनकर चुनाव लड़ रहा हूं.

 

दीपक मिश्रा: ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में उपमंत्री रह चुके हैं. अबकी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. कहा कि विवि में समस्या की वजह संवादहीनता है.

 

सौरभ सिंह प्रिंस: राष्ट्रीय विकास मंच से चुनाव लड़ रहे हैं. कहा कि एक आम छात्र को उपाध्यक्ष बनायें. किसी दल के बूते चुनाव लड़ने वालों को नहीं.

 

शिवम कुमार तिवारी: एबीवीपी से लड़ रहे हैं. कहा कि विवि के अफसर एसी कमरों में बैठे रहते हैं. कभी छात्रों के कमरे में जाकर उनकी समस्याओं को भी जाने. कैंपस में महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती को जरूरी बताया.

 

सुमन देवी: आइसा से लड़ रही हैं. अतर्रा पीजी कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुकी हैं. उन्होंने कैम्पस में बेखौफ आजादी की मांग उठाई. कहा कि छात्रों को डेलीगेसी भत्ता मिलना चाहिए.

 

विजय सिंह बघेल: एनएसयूआई से लड़ रहे हैं. उन्होंने हॉस्टल और कैंटीन का मुद्दा उठाया. कहा कि कैम्पस में बेहतर पठन- पाठन का माहौल हर हाल में सुनिश्चित होना जरूरी है.

 

विकास यादव सौरभ: निर्दलीय लड़ रहे हैं. किसान रामचन्द्र के बेटे ने कहा कि क्लासेस के संचालन और निर्धारित जगहों पर कैंटीन की फैसिलिटी दिए जाने की मांग उठाई.