फ्लैग: एलयू ओल्ड कैंपस के छह हॉस्टल में मेस बंद होने के बाद छलका स्टूडेंट्स का दर्द

By: Inextlive | Publish Date: Sun 16-Apr-2017 07:41:01
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फ्लैग: एलयू ओल्ड कैंपस के छह हॉस्टल में मेस बंद होने के बाद छलका स्टूडेंट्स का दर्द

एलयू ओल्ड कैंपस के छह हॉस्टल में मेस बंद होने के बाद छलका स्टूडेंट्स का दर्द

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LUCKNOW :

'सर अब भूखे पेट एग्जाम की तैयारी नहीं हो पा रही है' इतना ही कहने के बाद स्टूडेंट की आंखों में आंसू आ गये गला भर आया। यह नजारा था लखनऊ यूनिवर्सिटी (एलयू) हॉस्टल में मेस को लेकर चल रहे विवाद के हल के लिए आयोजित बैठक का। एलयू ओल्ड कैम्पस के छह ब्वॉयज हॉस्टल में बीते एक हफ्ते से मेस बंद होने से स्टूडेंट्स काफी परेशान हैं। एग्जाम सिर पर हैं वह खाना पकाने की व्यवस्था करें या फिर एग्जाम की तैयारी। वहीं गरीब स्टूडेंट्स का तो काफी बुरा हाल है। वहीं दूसरी ओर यूनिवर्सिटी प्रशासन अपने हॉस्टल में मेस का सही से संचालन अभी तक नहीं शुरू करा पाया है। शनिवार को इस समस्या को दूर करने के लिए चीफ प्रॉक्टर, चीफ प्रोवोस्ट व सभी वार्डन ने विभिन्न हॉस्टल के स्टूडेंट्स के साथ बैठक कर समस्या का हल निकलाने की कोशिश की। पर इस पूरी बैठक के दौरान यूनिवर्सिटी प्रशासन और स्टूडेंट्स एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप ही करते रहे। हालात यहां तक पहुंच गए कि स्टूडेंट्स और चीफ प्रॉक्टर के बीच में जमकर बहसबाजी तक हो गई।

स्टूडेंट्स ने बयां किया दर्द

चीफ प्रॉक्टर के साथ हुई मीटिंग में कई स्टूडेंट्स ने खाना न मिलने भूखे रहने व एग्जाम की तैयारी न होने का दर्द बया किया। इस दौरान कई स्टूडेंट्स अपनी बात यूनिवर्सिटी प्रशासन के अधिकारियों के सामने रखते हुए उनका गला तक भर आया। महमूदाबाद हॉस्टल के स्टूडेंट्स शुभम, एनडी हॉस्टल के दीपक और मिथिलेस ने खाना न मिलने और भूखे होने की बात कही। साथ ही कहा कि पूरे साल का पैसा यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास जमा है। इसके बाद भी बीते एक हफ्ते से उन्हें सही ढंग से खाना तक नहीं दिया जा रहा है। कोई भी मेस संचालक खाना बनाने को तैयार नहीं है। यूनिवर्सिटी के सभी मेस में खाना बनना पूरी तरह से बंद है। जिसका खामियाजा सभी हॉस्टल स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ रहा है.

संडे को सभी हॉस्टल में होगी मीटिंग

चीफ प्रॉक्टर प्रो। विनोद सिंह ने बताया कि सभी हॉस्टल में मेस के संचालन में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए सभी वॉर्डन अपने- अपने हॉस्टल में स्टूडेंट्स के साथ बैठक करेंगे। जिसमें वह स्टूडेंट्स की समस्या, बाहरी स्टूडेंट्स को हॉस्टल में आने से रोकने और उनकी पहचान करने के तरीकों पर स्टूडेंट्स के साथ विचार करेंगे। साथ ही हॉस्टलों में मेस का सही से संचालन करने के लिए स्टूडेंट्स की एक कमेटी का गठन भी करेंगे। यही कमेटी अपने हॉस्टल में मेस का संचालन अपने निगरानी में करवाएंगी। साथ ही अगर कोई बाहर स्टूडेंट्स मेस में खाना- खाने के लिए आता है, यह उसकी पहचान कर तुरंत इसकी जानकारी वार्डेन ैर यूनिवर्सिटी प्रशासन को देंगे।

जमा करनी होगी सिक्योरिटी मनी

चीफ प्रॉक्टर प्रो। सिंह ने बताया कि अब जो भी हॉस्टल में मेस संचालक खाना बनाएंगे। उसे पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास सिक्योरिटी मनी जमा करना होगी। उन्होंने बताया कि अभी तक मेस संचालकों की ओर से ऐसी कोई भी सिक्योरिटी नहीं जमा होती थी। ऐसे में वह बिना किसी जानकारी के मेस बंद कर भाग जाते थे। उन्होंने बताया कि यह सिक्योरिटी मनी हर मेस संचालक के हॉस्टल में मौजूद स्टूडेंट्स के संख्या के आधार पर जमा कराना होगा। यहूनिवर्सिटी प्रशासन खुद तय करेगा।

मारपीट के चलते मेस बंद

यूनिवर्सिटी में बीते कुछ महीनों से मेस संचालकों को स्टूडेंट्स बुरी तरह से मारपीट रहे थे। मेस संचालकों को पीटने वालों में ज्यादातर सभी बाहरी स्टूडेंट्स है। जिनकी शिनाख्त न तो स्टूडेंट्स कर पा रहे थे और न ही यूनिवर्सिटी प्रशासन। जिसके बाद सभी मेस संचालकों ने मेस का संचालन करना बंद कर दिया था। जिसके बाद लगातार स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी वीसी के आवास व कैम्पस में प्रदर्शन कर रहे थे।

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