Lucknow Central movie review : लखनऊ सेंट्रल का जानदार कैदी बैंड

By: Inextlive | Publish Date: Fri 15-Sep-2017 04:52:57
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Lucknow Central movie review : लखनऊ सेंट्रल का जानदार कैदी बैंड
कुछ दिन पहले एक फिल्म आई थी कैदी बैंड, फिल्म न तो दर्शकों के दिल में जगह कर पाई न ही उनकी जेब पे वो कैदी डाका डाल पाए, आज रिलीज़ हुई है हु ब हु उसी प्लाट पे बेस्ड फिल्म लखनऊ सेंट्रल कैसी है ये कैदी बैंड आईये आपको बताते हैं।

कहानी
किशन एक झूठे आरोप में जेल की सज़ा काट रहा है, कभी उसका सपना था अपना बैंड बनाना लेकिन अब वो सोसाइटी से बैन होकर जेल में से अपनी रिहाई का प्लान बना रहा है, और उसका प्लान है लखनऊ सेंट्रल का कैदी बैंड। बैंड बनेगा या बजेगा जानने के लिए देखिये लखनऊ सेंट्रल

समीक्षा
इस फिल्म का प्लाट भले ही कैदी बैंड जैसा हो पर ये फिल्म बिलकुल अलग है, इस फिल्म में वो हर कुछ है जो कैदी बैंड में होना चाहिए था। पहले बात करते हैं की मुझे क्या क्या पसंद आया, इस फिल्म के सभी तकनीकी पहलु शानदार हैं, फिल्म का आर्ट डायरेक्शन, कॉस्टयूम डिजाईन और फिल्म की सिनेमेटोग्राफी काबिल ए तारीफ है, फिल्म की राइटिंग भी अच्छी है जिसके कारण ये फिल्म एक अच्छी जेल मूवी बन कर उभरती है, फिल्म के किरदार भी अच्छे लिखे हुए हैं, जिसके कारण आप उनसे रिलेट करते हैं और उनको पसंद भी करते हैं। कैदी बैंड की तरह इस फिल्म के किरदार कैरीकेचर न होकर रियल प्रतीत होते हैं। संवाद भी बढ़िया हैं। खासकर दीपक डोबरियाल के हाथ आये संवाद काफी रोचक हैं। फिल्म का नैरेटिव भी क्लीन है। अब आते हैं इसके नेगेटिव पॉइंट्स पे, फिल्म थोड़ी प्रेडिक्टेबल है और कहीं कहीं पर अपनी रियल फील की पटरी से उतर कर कुछ ज्यादा ही ड्रामेटिक हो जाती है और एक रेगुलर हिंदी फिल्म लगने लगती है पर अगर गौर किया जाए तो ये फ्ला हम दरकिनार भी कर सकते हैं क्योंकि डायरेक्टर की ये पहली फिल्म है, निश्चित ही मुझे उनकी अगली फिल्म का इंतज़ार रहेगा।

 



अदाकारी
फिल्म में अच्छे कलाकारों की पूरी फ़ौज है, एक तरफ खुद फरहान अख्तर हैं, जिन्होंने इस फिल्म में धुआंधार परफॉरमेंस दी है, वहीँ दूसरी ओर दीपक डोबरियाल हैं जो इस फिल्म में जान डाल देते हैं, हिंदी मीडियम के बाद ये उनका एक और अमेजिंग रोल है। साथ में गिप्पी ग्रेवल, राजेश शर्मा और रोनित रॉय ने भी अपना काम बढ़िया किया है। फिल्म में डायना पेंटी ही अकेली वो किरदार हैं, जिनके पास न तो अच्छा लिखा किरदार है, न ही वो अपने किरदार में सूट करती हैं, बाकी कास्टिंग एक दम लल्लनटॉप है। कास्टिंग टीम को बधाई।

कुल मिलाकर ये एक रोमांचक फिल्म है, अगर इसे शॉशंक रिडेम्पशन या प्रिजन ब्रेक से कम्पेयर न किया जाए तो यक़ीनन आपको ये फिल्म ज़रूर पसंद आएगी, तो इस हफ्ते ज़रूर जाकर देखिये कैदी बैंड।

रेटिंग : 3.5 स्‍टार

Yohaann Bhaargava
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