..आई इन्वेस्टिगेट

-लोगों की जान से खिलवाड़ कर कूड़ा घरों में डाला जा रहा है मेडिकल वेस्ट, कैंसर तक का कारण बनता है यह वेस्ट

-लाखों रुपए का है यह काला कारोबार, रैकेट में हॉस्पिटल से लेकर माफिया तक शामिल

-कूड़ा घरों से मेडिकल वेस्ट बीनकर वापस से मार्केट में बेचा जा रहा है, रोजाना 100 किलो तक आता है मेडिकल वेस्ट

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KANPUR : शहर में मेडिकल वेस्ट का खरतनाक काला कारोबार खुलेआम चल रहा है. वो भी तब जब संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. चंद पैसे और कमाने के लिए हॉस्पिटल, पैथोलॉजी और ब्लड बैंक वाले मेडिकल वेस्ट को कूड़े के ढेर में फिंकवा रहे है. इसके पीछे पूरा एक रैकेट कार्य करता है, जो कूड़ा घर से सिरिंज, आईवी सेट, ग्लब्स, ग्लूकोज बोतल सहित अन्य वेस्ट को एकत्रित करता है और एक जगह पर भेज दिया जाता है. इसके बाद इनको साफ कर पैकिंग कर फिर मेडिकल स्टोर पर भेज दिया जाता है और लोग इनको अनजाने में नए रेट पर खरीद लेते हैं. आज दैनिक जागरण आई नेक्स्ट आपको बताने जा रहा है इस काले कारोबार का पूरा सच..

3 करोड़ से ज्यादा का कारोबार

मेडिकल वेस्ट के कारोबार के पीछे पूरा एक रैकेट है, जिसमें हॉस्पिटल से लेकर गिरोह के सरगना तक शामिल रहते हैं. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक इनका यह कारोबार 3 करोड़ रुपए से ऊपर का है. जिसमें 50 से ज्यादा लोग शामिल हैं. जब दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने खंगाला तो जच्चा-बच्चा हॉस्पिटल के बाहर बने कूड़ा घर और मकरार्बटगंज स्थित कूड़ा घर में यह खेल चलता पाया गया.

चिन्हित जगहों पर फेंका जाता है

हॉस्पिटल से नियत समय पर मेडिकल वेस्ट एकत्रित किया जाता है और बंद गाडि़यों के जरिए चिन्हित कूड़ा घर में फेंक दिया जाता है. वहां पहले से मौजूद लोग इस मेडिकल वेस्ट को बीनना शुरू कर देते हैं. बीनने वाले लोगों को 1000 रुपए प्रतिदिन तक दिए जाते हैं. इसकी पुष्टि खुद वहां मौजूद बीनने वाले ने की. इंजेक्शन, आई वी सैट, ग्लब्स, ग्लूकोज की बोतल और एक्सपायरी दवाइयों को अलग-अलग कलेक्ट कर एक गोदाम में ले जाया जाता है. जहां इनको साफ कर पैकिंग कर फिर से बेचा जाता है. इस खेल में हैलट और उर्सला के बाहर स्थित कई मेडिकल स्टोर भी शामिल हैं, जहां यह खतरनाक डुप्लीकेट माल बेचा जाता है.

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यह है निस्तारण का नियम

मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए एमपीसीसी और विल व‌र्ल्ड दोनों से ही हॉस्पिटल, पैथोलॉजी आदि को सदस्यता लेनी पड़ती है. सदस्यता लेने वाले सदस्य ही यहां मेडिकल वेस्ट भेज सकते हैं. इस प्लांट में दो स्टेज में निस्तारण होता है. पहला प्राइमरी और दूसरा सेकेंड्री. प्राइमरी स्टेज में 850 डिग्री सेंटिग्रेड पर मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जाता है और सेकेंड्री स्टेज पर 1050 डिग्री सेंटिग्रेड पर निस्तारण किया जाता है.

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कैंसर तक हो सकता है

मेडिकल वेस्ट यह इतना खतरनाक होता है कि अगर इसे 1150 डिग्री सेंटीग्रेड पर जलाकर नष्ट न किया जाए तो यह लगातार डायोक्सिन और फ्यूरांस जैसे आर्गेनिक प्रदूषण फैलाते हैं, जिससे कैंसर जैसे रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती है. प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है.शुक्राणु को कम करते हैं और कई बार डायबिटिज का कारण भी बनते हैं.

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दो संस्था कर रहीं मेडिकल वेस्ट का निस्तारण

1. एमपीसीसी- मेडिकल पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी.

2. विल व‌र्ल्ड- प्राइवेट संस्था.

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मेडिकल वेस्ट की 3 कैटेगिरी

1. रेड कैटेगिरी-- इसमें संक्रमित मेडिकल वेस्ट होता है, इसे रेड डस्टबिन में रखा जाता है.

2. ऑरेंज कैटेगिरी-- इसमें बॉडी पा‌र्ट्स में रखा जाता है, इसे ऑरेंज डस्टबिन में रखा जाता है.

3. ब्लू कैटेगिरी--- इसमें सीरिंज, ग्लूकोज बोतल, हैंड ग्लब्स आदि रखे जाते हैं, इसे ब्लू डस्टबिन में रखा जाता है.

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इनमें रखना चाहिए मेडिकल वेस्ट

पीली- इसमें शरीर के भाग, खून लगी पट्टी व रूई, इनको जलाया जाता है या गहरे गड्ढे में दबा दिया जाता है.

लाल- दस्ताने, कैथेरेट, आईवी सेट, कल्चर प्लेट इनको काटकर डिस्इंफेक्ट कर जलाया जाता है.

नीली या सफेद- गत्ते, प्लास्टिक, बैग, सुई, कांच के टुकडे इनको मेडिकल ट्रीट कर जला दिया जाता है.

काली- हानिकारक बेकार दवाई, कीटनाशक पदार्थ इसको मिट्टी में दबाकर निस्तारित किया जा सकता है.

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डब्ल्यूएचओ के मुताबिक

-1-2 किलो प्रति बेड एक हॉस्पिटल से मेडिकल वेस्ट निकलता है.

-600 ग्राम क्लीनिक से मेडिकल वेस्ट निकलता है.

-100 बेड के हॉस्पिटल से 10 परसेंट तक घातक मेडिकल वेस्ट निकलता है.

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व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

शहर में प्रत्येक हॉस्पिटल, नर्सिग होम, पैथोलॉजी और ब्लड बैंक को सीएमओ ऑफिस में मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए रजिस्ट्रेशन करना होता है. इसका पूरा ब्यौरा सीएमओ ऑफिस में मौजूद होता है. नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी जानकारी होती है. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड इसकी जांच करता है. तब आखिर कैसे मेडिकल वेस्ट कूड़ा घरों में फेंका जा रहा है. जबकि इसमें 5 साल की सजा और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना भी है.

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आसपास के हॉस्पिटल पर शक

गोल चौराहा और मकरार्बटगंज कूड़ा घर के 2 किमी. के दायरे में काफी बड़े हॉस्पिटल, पैथोलॉजी और ब्लड बैंक मौजूद हैं. ऐसे में यह साफ होता है कि यह खतरनाक मेडिकल वेस्ट इन्हीं जगहों में से आ रहा है.

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आपके माध्यम से सूचना मिली है तो यह आश्चर्य की बात है. पूरे शहर में इसकी जांच के लिए अभियान चलाया जाएगा और औचक निरीक्षण कर जांच कराई जाएगी.

-कुलदीप मिश्रा, क्षेत्रीय अधिकारी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड.

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मेडिकल वेस्ट के निस्तारण अगर कूड़ा घरों में फेंक कर किया जा रहा है तो सीएमओ और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को इसकी जांच के आदेश दिए जाएंगे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

-सतीश पाल, एडीएम सिटी.