-दवाओं की 20 हजार से ज्यादा के लोकल पर्चेज पर लगी रोक से बढ़ रही समस्या

-मंडलीय और डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में नहीं मिल रहीं जीवन रक्षक दवाएं

- हाईकमान ने स्वास्थ्य विभाग से मांगी दवाओं की सूची

केस-1

तीन दिन पहले रामनगर के कोदोपुर निवासी कृपाशंकर को उल्टी के साथ पेट दर्द शुरू हुआ. परिजन उन्हें डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल गए जहां डॉक्टर ने दवा लिखी. ये दवा उन्हें सरकारी डिस्पेंसरी में नहीं मिली. इसलिए उन्हें बाहर से दवाइयां खरीदनी पड़ी.

केस-2

मलदहिया निवासी धनंजय सस्ते इलाज के चक्कर में पहुंचे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल. डिस्पेंसरी से दवा नहीं मिल सकी. मजबूर होकर उन्हें बाहर की दवा खरीदना पड़ी और इसके लिए काफी रुपये खर्च करने पड़े. हॉस्पिटल की इस व्यवस्था से व्यथित हैं.

भले ही यह मामला सिर्फ दो मरीजों का हैं, लेकिन इन दिनों दवाओं की समस्या शहर के सभी सरकारी हॉस्पिटल में बनी हुई है. लाल बहादुर शास्त्री राजकीय अस्पताल रामनगर, श्री शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय और पं. दीनदयाल उपाध्याय डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की डिस्पेंसरी में ज्यादातर जीवन रक्षक दवाएं नहीं है. यहां सबसे जरूरी दवाओं की लिस्ट से बुखार और दस्त से निदान दिलाने वाली दवाएं ही नदारद हैं. फिलहाल अब इस मामले में शासन ने स्वास्थ्य विभाग से खत्म हुई दवाओं की पूरी सूची मांग ली है.

मुसीबत बन रहा नियम

अधिकारियों की माने तो अब दवा खरीद की व्यवस्था सेंट्रलाइज्ड कर दी गई है. इसके तहत सभी हॉस्पिटल को पोर्टल पर दवाओं की सूची अपलोड करनी है. इसके बाद शासन स्तर पर बनी एक्सपर्ट की टीम उन दवाओं की जरूरतों का परीक्षण करेगी. जिसके बाद संबंधित कंपनी से दवा खरीद सुनिश्चित की जाएगी. ये सभी प्रक्रिया पूरा करने में करीब दो से तीन माह का वक्त लग सकता है. इसके बाद ही हॉस्पिटल में प्रॉपर्ली दवाएं उपलब्ध हो पाएंगी. वहीं सिर्फ 20 हजार से ज्यादा लोकल पर्चेज पर भी रोक की वजह से दिक्कत बनी रह सकती है.

स्टॉक होने का दावा

मरीजों को दवाएं न मिलने से सरकारी हॉस्पिटल्स में दवाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है, लेकिन हॉस्पिटल प्रबंधन का दावा है कि आगामी तीन माह तक का स्टॉक दवा स्टोर में रखा हुआ है. मंडलीय हॉस्पिटल के अधिकारियों की माने तो वर्तमान में 226 तरह की आवश्यक दवाओं की सूची में 192 तरह की दवाएं स्टोर में मौजूद हैं. वहीं डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में 200 तरह की दवाएं उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है. सूत्रों की माने तो डिस्ट्रिक्ट के पीएचसी, सीएचसी में भी दवाओं की कमी बनी हुई है.

आ चुका है बजट

जिला स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना हैं कि पोर्टल पर दवाओं की सूची अपलोड होने के चलते ऐसी दिक्कत आई है. लखनऊ स्थित सीएमएसडी स्टोर्स से भी दवाओं की खरीद बंद है. जिसकी वजह से दवाएं आनी बंद है. फिलहाल मुख्यालय से दवाओं के लिए करीब करोड़ का बजट जारी हो चुका है. इसमें 50 लाख मंडलीय हॉस्पिटल के लिए है. इससे जून तक का काम चल जाएगा. पोर्टल का काम पूरा होते ही सभी परचेजिंग उसी के माध्यम से होगी.

इन दवाओं का टोटा

पैरासिटामाल, सिटीजीन, बीकंप्लेक्स, ओफ्लासासीन, आई व ईयर ड्राप, बीटाडीन मलहम, मैकोना जीन, एंग्लो डीविन, मेट्रोजील सिरप ,मेट्रोजिल टैबलेट आदि की कमी है. वहीं ओआरएस, एंटीबायटिक, बच्चों के लिए एंटीबायटिक, आयरन, कैल्शियम, शुगर आदि की दवाओं का स्टॉक बेहद कम है.

करीब तीन सौ तरह की आवश्यक दवाओं की खरीद के लिए सूची पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है. दो माह तक के लिए अस्पताल में दवाओं का स्टाक सुनिश्चित कर लिया गया है. मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी.

डॉ. बीएन श्रीवास्तव, एसआइसी, मंडलीय अस्पताल

दवाओं का स्टॉक पूरा करने के लिए शासन की ओर से करीब एक करोड़ का बजट आया है. फिलहाल इससे दो माह काम चल जाएगा. पोर्टल पर दवाओं की लिस्ट अपलोड होने के बाद सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी.

डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ वाराणसी