जमीन के जाल में फंसी मेट्रो

By: Inextlive | Publish Date: Wed 14-Feb-2018 07:01:29
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जमीन के जाल में फंसी मेट्रो

जमीन के संबंध में अभिलेखों में नहीं है स्थिति स्पष्ट

शासन स्तर से तय होगा भूमि के हस्तांतरण का स्वरूप

आगरा। मेट्रो को हरी झंडी मिल चुकी है। इसके लिए डीपीआर भी शासन को भेज दी गई है। कुल जमीन में से 20.088 हैक्टेयर भूमि ऐसी है, जिसके संबंध में यह स्पष्ट नहीं है कि किस विभाग की कितनी भूमि है। कमिश्नर के। राममोहन राव ने शासन को जिलाधिकारी द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर बिन्दुवार शासन को जमीन के संबंध में रिपोर्ट भेजी है। शासन से यह अनुमति के लिए रिपोर्ट भेजी है कि जिस जमीन का हस्तांतरण होना है वह निशुल्क होना है अथवा सशुल्क होना है।

शासन स्तर पर लिया जाना है निर्णय

मेट्रो परियोजना के लिए हस्तांतरित होने वाली 20.088 हैक्टेयर भूमि के लिए हस्तांतरित होने वाली भूमि के संबंध में शासन ही तय करेगा कि भूमि का हस्तांतरण निशुल्क होना है अथवा सशुल्क होना है। इसके लिए कमिश्नर ने बिन्दुवार शासन को रिपोर्ट भेजकर अनुमति मांगी है। उत्तर प्रदेश शासन की यह परियोजना है। भूमि का प्रबंधन किस प्रकार से होना है यह तय किया जाना शासन स्तर से ही संभव है।

इन विभागों की है भूमि

नहर विभाग, उद्यान विभाग, लोक निर्माण, गृह विभाग, डिस्ट्रिक्ट बोर्ड, एवं भारत सरकार के रक्षा विभाग से आवास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि किस किस विभाग की कौन कौन से भूखंड हैं और कितना कितना कुल रकवा हस्तांतरित किया जाना है।

किया कहती है रिपोर्ट

जिलाधिकारी से इन विभागों की भूमि के हस्तांतरण के लिए विभागवार विवरण मांगा गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा आख्या दी गई है, जिसमें लिखा गया है कि खेवट विभाजन न होने के कारण पृथक पृथक विभागवार स्थिति राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट नहीं है। पीएसी के पास उपलब्ध अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए कमांडेंट 15वीं बटालियन को पत्र लिखा गया, लेकिन उनके स्तर से अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं.

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