मुस्लिम बच्‍चे को भाता है बनारस फिल्‍म दोजख एक मौलवी (ललित मोहन तिवारी) के छोटे से परिवार से शुरु होती है, मौलवी अपने क्षेत्र में चाचा नाम से मशहूर होते हैं. घर में बीवी के साथ उनका 12 साल का इकलौता बेटा जॉन मोहम्मद रहता है. जिसको जानू (गैरिक चौधरी) नाम से भी पुकारते हैं. वह अपने बेटे से बहुत प्‍यार करता है, लेकिन एक दिन अचानक जानू कहीं खो जाता है. चाचा अपने बच्‍चे की तलाश में इधर-उधर घूमते रहते हैं. हालांकि इस दौरान उनके दिमाग में बच्‍चे की पिछली बातें याद आती हैं, जो कि कहता था कि उसे हिंदू धर्म बहुत पसंद है. जानू को बनारस बहुत अच्‍छा लगता था. ऐसे में बेटे के खो जाने पर चाचा काफी परेशान हो जाते हैं. जानू की मदर बाप-बेटे के बीच पेसमेकर का काम करती हैं, लेकिन एक एक्‍सीडेंट में उनकी भी जान चली जाती है. 
कहानी है दमदार, लेकिन निर्देशन में खा गए मात दोजख फिल्‍म की कहानी काफी दमदार है. हिंदू-‍मुस्लिम के रिश्‍ते के बीच झूलती यह कहानी समाज को एक आईना दिखाने के लिए काफी है. यह फिल्‍म दोजख नावेल पर बेस्‍ड है, जिसे जैगम इमाम ने ही लिखा है. हालांकि नावेल को फिल्‍म में ट्रांसलेट करने पर वह थोड़ा चूक गए. वहीं जब डायरेक्‍शन की बात आती है तो जैगम इमाम थोड़ा निराश करते हैं. विजुअल के मामले में थोड़ी धैर्यता और कांफिडेंस जरूरी होती है, जैगम को इस बात पर सोचना होगा. इसके अलावा मूवी का फर्स्‍ट हॉफ काफी स्‍लो है जिसमें कि खराब एडिटिंग, लाउड और अनरिलेटिंग म्‍यूजिक का समावेश है. इसके साथ ही जर्की कैमरा मूवमेंट भी दर्शकों को परेशान कर सकता है. जब सेकेंड हॉफ की बारी आती है, तो यह थोड़ी तेजी तो पकड़ता है लेकिन अन्‍य ड्राबैक बरकरार रहते हैं. फिलहाल ओवरऑल देखें तो दर्शकों को एवरेज से भी कम मूवी एक्‍सपीरिंयस मिलेगा. वहीं कलाकरों ने एक्टिंग काफी जबर्दस्‍त की है.

मुस्लिम बच्‍चे को भाता है बनारस
फिल्‍म दोजख एक मौलवी (ललित मोहन तिवारी) के छोटे से परिवार से शुरु होती है, मौलवी अपने क्षेत्र में चाचा नाम से मशहूर होते हैं. घर में बीवी के साथ उनका 12 साल का इकलौता बेटा जॉन मोहम्मद रहता है. जिसको जानू (गैरिक चौधरी) नाम से भी पुकारते हैं. वह अपने बेटे से बहुत प्‍यार करता है, लेकिन एक दिन अचानक जानू कहीं खो जाता है. चाचा अपने बच्‍चे की तलाश में इधर-उधर घूमते रहते हैं. हालांकि इस दौरान उनके दिमाग में बच्‍चे की पिछली बातें याद आती हैं, जो कि कहता था कि उसे हिंदू धर्म बहुत पसंद है. जानू को बनारस बहुत अच्‍छा लगता था. ऐसे में बेटे के खो जाने पर चाचा काफी परेशान हो जाते हैं. जानू की मदर बाप-बेटे के बीच पेसमेकर का काम करती हैं, लेकिन एक एक्‍सीडेंट में उनकी भी जान चली जाती है. 

Dozakh: In Search Of Heaven
U; Drama
Dir: Zaigham Imam
Cast: Lalit Mohan Tiwari, Garrick Chaudhary, Nazim Khan and Ruby Saini

movie review : 'dozakh' धर्म पर भारी पड़ती बच्‍चे की मासूमियत


कहानी है दमदार, लेकिन निर्देशन में खा गए मात
दोजख फिल्‍म की कहानी काफी दमदार है. हिंदू-‍मुस्लिम के रिश्‍ते के बीच झूलती यह कहानी समाज को एक आईना दिखाने के लिए काफी है. यह फिल्‍म दोजख नावेल पर बेस्‍ड है, जिसे जैगम इमाम ने ही लिखा है. हालांकि नावेल को फिल्‍म में ट्रांसलेट करने पर वह थोड़ा चूक गए. वहीं जब डायरेक्‍शन की बात आती है तो जैगम इमाम थोड़ा निराश करते हैं. विजुअल के मामले में थोड़ी धैर्यता और कांफिडेंस जरूरी होती है, जैगम को इस बात पर सोचना होगा. इसके अलावा मूवी का फर्स्‍ट हॉफ काफी स्‍लो है जिसमें कि खराब एडिटिंग, लाउड और अनरिलेटिंग म्‍यूजिक का समावेश है. इसके साथ ही जर्की कैमरा मूवमेंट भी दर्शकों को परेशान कर सकता है. जब सेकेंड हॉफ की बारी आती है, तो यह थोड़ी तेजी तो पकड़ता है लेकिन अन्‍य ड्राबैक बरकरार रहते हैं. फिलहाल ओवरऑल देखें तो दर्शकों को एवरेज से भी कम मूवी एक्‍सपीरिंयस मिलेगा. वहीं कलाकरों ने एक्टिंग काफी जबर्दस्‍त की है.

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