Movie review ok jaanu: साथिया और बेफिक्रे का फीका 'मॉक' टेल

By: Shweta Mishra | Publish Date: Fri 13-Jan-2017 12:59:01   |  Modified Date: Fri 13-Jan-2017 01:13:58
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 Movie review ok jaanu: साथिया और बेफिक्रे का फीका 'मॉक' टेल
अकाल सा पड़ गया है, बॉलीवुड में नई स्क्रिप्ट्स और आइडियाज का। वही एक जैसी कहानियां देखते देखते अब मन उकता सा गया है। ओके जानू इस ही कतार में एक और फिल्म है।

Film: OK Jaanu
Cast:
Shraddha Kapoor, Aditya Roy Kapur
Director:
Shaad Ali

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कहानी

आदि वीडियोगेम डिज़ाइनर है और तारा आर्किटेक्ट है। दोनों को करियर के लिए विदेश जाना है। दोनों तय करते हैं कि जब तक चल सकेगा तब तक लिवइन रहेंगे और फिर अपने अपने रास्ते कट लेंगे। अंत में क्या होगा , बताने की ज़रुरत नहीं है।

कथा, पटकथा और निर्देशन
ओके कनमणि मणि रत्नम साहब की एक तमिल फिल्म है। दायकर सलमान और नित्या के शानदार अभिनय से सजी ये फिल्म बेहद खूबसूरत फिल्म है। किल दिल से भीषण तबाही मचाने के बाद शाद ने सेफ ही खेलना ठीक समझा और इस फिल्म को रीमेक कर डाला। पटकथा गुलज़ार साहब की है। फिल्म बेहद स्लो है, कहानी है उस ही स्पीड से आगे बढ़ती है जैसे आजकल कोहरे में ट्रेन,जो घिसट घिसट के बोरियत के स्टेशनों से गुजरते हुए फाइनली आपको नींद के स्टेशन पर पंहुचा देती है।

ऐसी फीलिंग आएगी
फिल्म देखने के बाद आपको ऐसी फीलिंग आएगी जैसे आप बेहद डल साथिया पार्ट 2 देख रहे हों। कहते हैं नकल करने के लिए भी अक्ल चाहिए, न तो फिल्म में अक्ल लगाईं गई है न ही फिल्म देखते वक़्त अक्ल लगाने की जरूरत है। अगर आप 15 मिनट के लिए सो जाएं तो हो सकता है कि जागने पर आपको कहानी वहीं मिलेगी। फिल्म में नयापन नहीं है और यही इसकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम है। फिल्म की मेन कहानी से ज़्यादा बेहतर कहानी है फिल्म में नसीर साहब की कहानी, काश वो थोडी ज़्यादा होती। फिल्म के संवाद फिल्म की कहानी से बेहतर हैं।फिल्म की सिनेमेटोग्राफी काबिलेतारीफ है।

 



अदाकारी
इस फिल्म में अगर अदाकारी की बात की जाए तो जो दो नाम आपके ज़हन में बस जाते है वो हैं मकानमालिक के किरदार में नसीर साहब और उनकी पत्नी के किरदार में लीला सेमसन, दोनों ने बड़ा ही जानदार अभिनय किया है। आपको उनके किरदारों से सहज प्यार हो जाता है। आदित्य और श्रद्धा ने बस ठीक ठाक काम ही किया है, इसमें उनकी कोई गलती भी नहीं है, उनके किरदार बेहद डल रूटीन और अझेल लिखे गए हैं।

संगीत
अगर इस फिल्म में कहीं कोई बात अच्छी है तो वो है इसका संगीत। रहमान इस फिल्म की डूबती नैया के खिवैया हैं। अगर संगीत न हो तो ये फिल्म एक नींद की गोली जैसी है जिसे अनिद्रा की दवा के तौर पे इस्तेमाल किया जा सकता है। संगीत बीच बीच में आपको जगाता है और आपके पैसे वसूल करवाता है। फिल्म का पार्श्वसंगीत भी अच्छा है।

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वर्डिक्ट
साल की पहली बड़ी बॉलीवुड रिलीज़ ओके जानू एक बेहद साधारण फिल्म है, इसमें कुछ भी नया ऑफर करने के लिए नहीं है, इसके साथ ही आज विन डीजल और दीपिका पादुकोण अभिनीत हॉलीवुड की थ्रिलर ट्रिपल एक्स - रिटर्न ऑफ़ जंडेर केज भी रिलीज़ हो रही है। ऐसी आशंका करना गलत नहीं होगा की दोनों फिल्मों की टक्कर में ओके जानू कहीं डूब न जाए। पर फिर भी अगर आप मुझसे पूछें कि ये फिल्म क्यों देखी जाए तो वो है रहमान का संगीत और नसीर साहब द्वारा निभाए गए छोटे से किरदार के लिए फिल्म एक बार देखि जा सकती है।

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Review by : Yohaann Bhaargava
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