इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्‍कॉलर को मारी गोली, हालत नाजुक

By: Inextlive | Publish Date: Tue 10-Oct-2017 03:15:44   |  Modified Date: Tue 10-Oct-2017 03:18:21
A- A+
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्‍कॉलर को मारी गोली, हालत नाजुक
म्योराबाद के इमरान लॉज में रहकर करता है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हालत गंभीर, लखनऊ रिफर, अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट

allahabad@inext.co.in

ALLAHABAD: म्योराबाद स्थित इमरान लॉज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के शोध छात्र उपेन्द्र यादव को रविवार की रात बाइक सवार युवक ने गोली मार दी. लॉज में रहने वाले छात्र जब तक उसे घेरने की कोशिश करते वह भाग चुका था. आनन-फानन में उसे निजी अस्पताल ले जाया गया जहां से डॉक्टर्स ने उसे लखनऊ रिफर कर दिया. उसकी हालत बेहद नाजुक बताई गई है. घटना के संबंध में घायल के एक फ्रेंड ने पुलिस को तहरीर दी है. इसमें तीन महीने पहले मिली धमकी का जिक्र किया गया है. पुलिस को स्पॉट के समीप एक स्थान से सीसीटीवी फुटेज मिला है. इसी के आधार पर गोली मारने वाले की पहचान करने की कोशिश की जा रही है.

गाजीपुर जिले का मूल निवासी

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग का शोध छात्र उपेन्द्र यादव मूलरूप से गाजीपुर जिले का रहने वाला था. वह ताराचंद हॉस्टल में रहता था. वॉशआउट आपरेशन के दौरान उसे हॉस्टल खाली करना पड़ गया था. इसके बाद वह म्योराबाद में आजमगढ़ जिले के रहने वाले सतीश कुमार के साथ रूम शेयर करके रहने लगा था. दोनों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. सतीश के अनुसार तीन महीने पहले उपेन्द्र का शोध प्रोजेक्ट कम्प्लीट हो चुका है.

उपेन्द्र के यहां थी रात में पार्टी

रविवार को उपेन्द्र ने फ्रेंडस को पार्टी दी थी. सतीश इस पार्टी का हिस्सा नहीं था क्योंकि उसकी तबियत खराब चल रही थी और वह पड़ोस में रहने वाले प्रतियोगी छात्र अनिल यादव के कमरे पर गया था. वहीं से खाना खाने के बाद लौटा था. सतीश ने पूछताछ में बताया कि रविवार को उपेन्द्र ने कमरे पर मुर्गा बनाया था और अपने राहुल नामक दोस्त को बुलाया था. वह कमरे पर पहुंचा तो राहुल खाना खाने के बाद अपने कमरे के लिए निकल रहा था. उपेन्द्र ने उसे भी खाने का ऑफर दिया था. सतीश के अनुसार वह दवा खाकर सोने चला गया. इस दौरान उपेन्द्र के मोबाइल पर किसी का फोन आ गया और वह बात करते हुए नीचे टहलने चला गया. फोन पर बात करने के बाद वह बाइक स्र्टाट कर अंदर खड़ी कर रहा था तभी किसी ने उस गोली मार दी. गोली उपेन्द्र के कान के नीचे लगी और वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया. इसके बाद बाइक सवार हमलावर भाग निकला.

 

फोन पर मिली थी धमकी

उपेन्द्र के रूम पार्टनर सतीश ने बताया कि करीब तीन महीने पहले उपेन्द्र के फोन पर किसी शख्स ने देख लेने की धमकी दी थी. इसके बाद से उपेन्द्र काफी डरा सहमा रहता था. पुलिस उस शख्स के बारे में जानकारी हासिल कर रही है जिसने उपेन्द्र को फोन पर धमकी दी थी. पुलिस ने लॉज में रहने वाले एक प्रतियोगी छात्र को पूछताछ के लिए उठाया है.

 

ज्वलंत सवाल

शोध छात्र को धमकी देने वाला था कौन

धमकी देने का कारण क्या था उपेन्द्र यादव को

ताराचंद हॉस्टल से तो नहीं जुड़ा है घटना का तार

कौन था जिससे बात करते हुए उपेन्द्र कमरे से निकला था

इस कॉल का उपेन्द्र पर हमले से कोई कनेक्शन है क्या

कॉल कटते ही मारी गई गोली, तो क्या कोई उपेन्द्र पर नजर रख रहा था

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव से तो नहीं है घटना का कोई कनेक्शन

 

 

उपेन्द्र के रूम पार्टनर सतीश कुमार की तहरीर पर अज्ञात हमलावर के खिलाफ रिपोर्ट की गई है. घटनास्थल से कुछ दूरी पर सीसीटीवी फुटेज मिला है. कुछ लोगों से पूछताछ भी की जा रही है. कॉल डिटेल खंगाला जा रहा है.

-सर्वेश सिंह, विवेचनाधिकारी

 

 

Brajesh Tripathi

इस घटना का संबंध भी छात्रसंघ चुनाव से होगा. छात्रसंघ चुनाव में अराजकता का नंगा नाच होता है. न कोई नियम ना कायदा. पूरा शहर डरा सहमा रहता है. जब तक छात्रसंघ चुनाव बंद रहे सब सुकून से थे. सरकार ने चुनाव शुरू करवाकर पूरा शहर छात्रसंघ चुनाव के नाम पर गुंडों के हाथ में सौंप दिया.

 

Zafar Ahmad

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र को गोली मारने की घटना यह दर्शाता है कि कैंपस में गुंडागर्दी बढ़ गयी है. असुरक्षित यूपी में कैंपस भी सुरक्षित नही रहा. इस घटना का छात्रसंघ चुनाव से ही संबंध है.

 

Shivam Yadav

इस देश की हर सेंट्रल यूनिवर्सिटी मे आखिर अराजकता ही तो फैली हुई है. सारी यूनिवर्सिटी छेड़छाड़, बवाल, मारपीट का अड्डा बनकर रह गयी हैं. कुछ दिन में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी.

 

Meetu

विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को ही खत्म कर देना चाहिये. इस राजनीती में धनबल और बाहुबल का जोर रहता है. कालेज में पढाई का माहौल भी खराब होता है. लोकतंत्र में छात्रसंघ चुनाव अगर जरूरी है तो इसका आधार योग्यता को बना देना चाहिये.

 

Farooq Qamar

हर बात तो चुनाव के नज़र से देखना सही नहीं है. हो सकता है कोई पुरानी रांजिश रही हो और माहौल को खराब करने की कोशिश हो. चुनाव का माध्यम एक मजबूत छात्र संघ का निर्माण करना है.