जेपी ग्रुप संकट: अरबों की कंपनी बनाने वाला जूनियर इंजीनियर, आज हो गया कंगाल

By: Inextlive | Publish Date: Fri 11-Aug-2017 01:06:05
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जेपी ग्रुप संकट: अरबों की कंपनी बनाने वाला जूनियर इंजीनियर, आज हो गया कंगाल
भारत की बड़ी कंपनियों में शुमार जेपी ग्रुप पर गहरा संकट मंडरा रहा है। जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया की सूची में डाल दिया गया है। वहीं पूरा ग्रुप कर्ज में डूबा हुआ है। सबसे बड़ा झटका जेपी ग्रुप के संस्‍थापक जय प्रकाश गौड़ को लगा। जिन्‍होंने जूनियर इंजीनियर के तौर पर करियर शुरु किया था और अरबों की कंपनी बना डाली। आइए जानते हैं जेपी ग्रुप के बारे में....

क्‍या है मामला
राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) इलाहाबाद ने आइडीबीआइ बैंक की याचिका मंजूर करते हुए जेपी इंफ्राटेक कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है। बैंक ने अधिकरण में यह याचिका 52 करोड़ 61 लाख 14 हजार 627 रुपये बकाए का भुगतान न करने पर कोड की धारा-7 के तहत दाखिल की है। अधिकरण ने आदेश की प्रति उन सभी वित्तीय संस्थानों जिन्होंने इस कंपनी में निवेश/ऋण दिया है, को भेजने का निर्देश दिया है। जेपी ग्रुप इस समय पूरी तरह से कर्ज में डूबा है। अभी तो जेपी इंफ्राटेक पर संकट मंडराया है। यही हाल रहा तो पूरा ग्रुप कभी भी दिवालिया हो सकता है।

ऐसी हुई थी जेपी ग्रुप की शुरुआत
जेपी ग्रुप की नींव जय प्रकाश गौड़ ने रखी थी। साल 1950 में रुड़की यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद जय प्रकाश ने यूपी सरकार में जूनियर इंजीनियरिंग की नौकरी शुरु कर दी। इसके बाद वह सिविल कांट्रैक्‍टर के तौर पर काम करने लगे। बस यहीं से उनके मन में बिजनेस का ख्‍याल आया और करीब दो दशक बाद 1987 में उन्‍होंने जेपी एसोसिएट के नाम से सिविल इंजीनियरिंग और कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी के साथ जेपी ग्रुप की शुरुआत की।

साल 1992 में पावर सेक्‍टर में इंट्री

जेपी का कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी का बिजनेस काफी फल-फूल रहा था। उन्‍होंने इसे और विस्‍तार देने की सोची। साल 1992 में जेपी ने जयप्रकाश हाइड्रो पॉवर लिमिटेड के नाम से पॉवर सेक्‍टर में प्रवेश किया। वह देश के सबसे बड़े हाइड्रो पॉवर प्रोड्यूसर बन गए। टिहरी डैम और सरदार सरोवर डैम बनाने में कंपनी की अहम भूमिका रही।

फॉर्मूला वन रेस ट्रैक बनाया
2000 से लेकर 2010 तक जेपी ग्रुप ने देश में काफी नाम कमा लिया था। बाद में जय प्रकाश ने रियल एस्‍टेट कंपनी का गठन किया और कई प्रोजेक्‍ट तैयार किए। 2011 में कंपनी ने बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट तैयार किया। इस ट्रैक पर फॉर्मूला वन रेस कराने के बाद कंपनी की पहचान पूरी दुनिया में हो गई। इसके ठीक एक साल बाद 2012 में कंपनी ने यमुना एक्‍सप्रेस-वे का प्रोजेक्‍ट तैयार कर एक और बड़ी उपलब्‍धि अपने नाम कर ली।

जय प्रकाश के रिटायरमेंट के बाद गिरी कंपनी
जेपी समूह को इतनी ऊंचाई पर पहुंचाने का श्रेय जयप्रकाश को जाता है। लेकिन 2010 में जब वो रिटायर हो गए तो कंपनी की कमान उनके बेटे मनोज गौड़ को सौंप दी गई। लगभग दो साल तक सबकुछ ठीक-ठाक रहा। लेकिन इकोनॉमिक स्‍लोडाउन और रियल एस्‍टेट मार्केट में मंदी के कारण जेपी ग्रुप का फॉल डाउन शुरु होने लगा। एक समय कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्‍या 90 हजार तक पहुंच गई थी। अब यह घटकर सिर्फ 30 हजार रह गई।

संपत्‍ति और एसेट भी बिक गए
कंपनी पर लगातार कर्ज बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि कंपनी ने कई एसेट भी बेच दिए हैं। वहीं 9700 करोड़ रुपये के दो हाइड्रो पॉवर भी कंपनी को बेचने पड़े। इसके अलावा गुजरात सीमेंट प्‍लांट भी बिक गया। साथ ही मध्‍य प्रदेश के दो सीमेंट प्‍लांट भी अल्‍ट्राटेक सीमेंट को 5,400 करोड़ में बेच दिए। कंपनी ने अपना कर्ज कम करने के लिए हाल ही में एक्‍सिस बैंक को 2200 एकड़ में फैले अपने हेडक्‍वॉर्टर को खरीदने के लिए कहा है।

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